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Kasganj News: स्टाफ की कमी से जूझ रहा बाल विकास विभाग, 76 मुख्य सेविकाओं के पद खाली
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आंगनबाड़ी केंद्र का फोटो। संवाद
कासगंज। जिला महिला एवं बाल विकास विभाग में स्वीकृत पदों और वास्तविक तैनाती के बीच का बड़ा फासला विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन में रोड़ा बन रहा है। स्टाफ की भारी कमी के कारण जिले के 2,445 आंगनबाड़ी केंद्रों की निगरानी व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है, जबकि इन योजनाओं पर जिले के 1.40 लाख से अधिक लाभार्थी निर्भर हैं।
जिले में प्रशासनिक स्तर पर जिला कार्यक्रम अधिकारी (डीपीओ) का पद लंबे समय से रिक्त है, जिसका काम सीडीपीओ को प्रभार देकर चलाया जा रहा है। वहीं, बाल विकास परियोजना अधिकारी (सीडीपीओ) के कुल सात स्वीकृत पदों में से केवल तीन पर ही तैनाती है।
हाल ही में एक सीडीपीओ के स्थानांतरण के बाद सिर्फ एक नई तैनाती हुई, जिससे चार पद अब भी खाली हैं और मौजूदा अधिकारियों पर काम का अतिरिक्त बोझ है।
सबसे बदतर स्थिति मुख्य सेविकाओं की है। जिले में इनके 88 स्वीकृत पद हैं, लेकिन कार्यरत केवल 12 हैं। पहले यह संख्या 13 थी, पर एक स्थानांतरण के बाद 76 पद खाली पड़े हैं।
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मुख्य सेविकाओं का काम आंगनबाड़ी केंद्रों का निरीक्षण, पुष्टाहार वितरण की निगरानी, अभिलेखों का सत्यापन और योजनाओं की समीक्षा करना होता है। स्टाफ न होने से एक-एक मुख्य सेविका पर कई सेक्टरों और दर्जनों केंद्रों की जिम्मेदारी आ गई है।
अधिकारियों का मानना है कि नई नियुक्तियों से ही यह व्यवस्था मजबूत हो सकेगी। फिलहाल, सीमित संसाधनों में ही काम चलाया जा रहा है।
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वर्जन:
रिक्त पदों की सूचना समय-समय पर शासन को भेजी जाती है। उपलब्ध स्टाफ के माध्यम से ही योजनाओं की निगरानी और संचालन कराया जा रहा है। - राजीव कुमार, प्रभारी डीपीओ
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जिले में प्रशासनिक स्तर पर जिला कार्यक्रम अधिकारी (डीपीओ) का पद लंबे समय से रिक्त है, जिसका काम सीडीपीओ को प्रभार देकर चलाया जा रहा है। वहीं, बाल विकास परियोजना अधिकारी (सीडीपीओ) के कुल सात स्वीकृत पदों में से केवल तीन पर ही तैनाती है।
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हाल ही में एक सीडीपीओ के स्थानांतरण के बाद सिर्फ एक नई तैनाती हुई, जिससे चार पद अब भी खाली हैं और मौजूदा अधिकारियों पर काम का अतिरिक्त बोझ है।
सबसे बदतर स्थिति मुख्य सेविकाओं की है। जिले में इनके 88 स्वीकृत पद हैं, लेकिन कार्यरत केवल 12 हैं। पहले यह संख्या 13 थी, पर एक स्थानांतरण के बाद 76 पद खाली पड़े हैं।
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मुख्य सेविकाओं का काम आंगनबाड़ी केंद्रों का निरीक्षण, पुष्टाहार वितरण की निगरानी, अभिलेखों का सत्यापन और योजनाओं की समीक्षा करना होता है। स्टाफ न होने से एक-एक मुख्य सेविका पर कई सेक्टरों और दर्जनों केंद्रों की जिम्मेदारी आ गई है।
अधिकारियों का मानना है कि नई नियुक्तियों से ही यह व्यवस्था मजबूत हो सकेगी। फिलहाल, सीमित संसाधनों में ही काम चलाया जा रहा है।
वर्जन:
रिक्त पदों की सूचना समय-समय पर शासन को भेजी जाती है। उपलब्ध स्टाफ के माध्यम से ही योजनाओं की निगरानी और संचालन कराया जा रहा है। - राजीव कुमार, प्रभारी डीपीओ