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परचून की दुकान में मौत का व्यापार! शराब पीने से गई युवक की जान, पुलिस ने आरोप को नकारा
Wed, 12 Jun 2019 11:13 PM IST
प्रशांत कुमार
क्राइम डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
क्राइम डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रशांत कुमार
Updated Wed, 12 Jun 2019 11:13 PM IST
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मृतक की फाइल फोटो, रोते-बिलखते परिजन
- फोटो : अमर उजाला
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कानपुर में थाना सजेती के टिकवांपुर गांव में शराब पीने से अरुण कुमार पासवान (38) की मौत हो गई। वह बिलासपुर (छत्तीसगढ़) में किसी गुटखा फैक्ट्री में कर्मचारी था। दो दिन पहले ही छुट्टी पर आया था। परिजनों ने बताया कि उसने गांव की ही एक परचून की दुकान से शराब खरीदकर पी थी। आरोप लगाया कि जहरीली शराब पीने से उसकी मौत हुई।
थानाध्यक्ष का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में जहरीली शराब से मौत की पुष्टि नहीं हुई है। मौत का कारण स्पष्ट न होने से विसरा सुरक्षित किया गया है। आबकारी निरीक्षक साहब सिंह पाल का कहना है कि दो दिन पहले ही चार्ज मिला है। जानकारी के बाद कार्रवाई करेंगे। बता दें कि इस गांव को क्षेत्रीय सांसद देवेंद्र सिंह भोले ने गोद लिया है।
अरुण ने मंगलवार को गांव के राघवेंद्र सविता के साथ देसी शराब पी थी। शाम करीब चार बजे अरुण को उल्टी होने लगी। हालत बिगड़ने पर परिजन उसे हमीरपुर के जिला अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। बड़े बेटे लवकुश का आरोप है कि गांव में चार-पांच जगह परचून की दुकानों पर खुलेआम शराब की बिक्री होती है। पड़ोसी गांव में संचालित शराब ठेके से परचून दुकान में शराब बिकवाई जाती है। इसमें गांव का चौकीदार व उसका बेटा भी शामिल है। जानकारी के बाद भी पुलिस कार्रवाई नहीं करती है। पिता ने भी एक परचून दुकान से ही शराब खरीदी थी। आरोप है कि जहरीली शराब पीने से उनकी मौत हुई है।
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थानाध्यक्ष का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में जहरीली शराब से मौत की पुष्टि नहीं हुई है। मौत का कारण स्पष्ट न होने से विसरा सुरक्षित किया गया है। आबकारी निरीक्षक साहब सिंह पाल का कहना है कि दो दिन पहले ही चार्ज मिला है। जानकारी के बाद कार्रवाई करेंगे। बता दें कि इस गांव को क्षेत्रीय सांसद देवेंद्र सिंह भोले ने गोद लिया है।
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अरुण ने मंगलवार को गांव के राघवेंद्र सविता के साथ देसी शराब पी थी। शाम करीब चार बजे अरुण को उल्टी होने लगी। हालत बिगड़ने पर परिजन उसे हमीरपुर के जिला अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। बड़े बेटे लवकुश का आरोप है कि गांव में चार-पांच जगह परचून की दुकानों पर खुलेआम शराब की बिक्री होती है। पड़ोसी गांव में संचालित शराब ठेके से परचून दुकान में शराब बिकवाई जाती है। इसमें गांव का चौकीदार व उसका बेटा भी शामिल है। जानकारी के बाद भी पुलिस कार्रवाई नहीं करती है। पिता ने भी एक परचून दुकान से ही शराब खरीदी थी। आरोप है कि जहरीली शराब पीने से उनकी मौत हुई है।
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अरुण शराब का लती था। उसका लिवर खराब हो चुका था। डॉक्टरों ने उसे शराब पीने से मना किया था। इसके बावजूद मंगलवार को उसने शराब पी और मछली खाई थी। अगर शराब जहरीली होती तो अरुण के साथी राघवेंद्र पर भी उसका असर होता। -अमरेंद्र बहादुर सिंह, सजेती थानाध्यक्ष