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परमाणु हमले से महफूज रहेंगे टैंक में बैठे जवान, आप भी देखकर हैरान रह जाएंगे सेना के ये आइटम
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Sat, 12 May 2018 01:39 PM IST
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रक्षा सामग्री और भंडार अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान (डीएमएसआरडीई) ने लगाई प्रदर्शनी
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हमारे जवान किसी भी देश की सरहद में घुस जाएंगे तो दुश्मन ढूंढ नहीं पाएगा। टेक्नोलॉजी डे पर रक्षा सामग्री और भंडार अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान (डीएमएसआरडीई) कानपुर में लगाई गई प्रदर्शनी में कुछ ऐसी खूबियों वाले उत्पादों का प्रदर्शन किया गया। परमाणु हमला होने के बाद भी टैंक में बैठे जवान सुरक्षित रहेंगे। हल्के लड़ाकू हेलीकाप्टर में बैठे पायलट को सामने से आ रही दुश्मन की गोली नहीं मार पाएगी। पेश है एक रिपोर्ट...
कंपोजिट आर्मर पैनल
रक्षा सामग्री और भंडार अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान (डीएमएसआरडीई) ने लगाई प्रदर्शनी
हल्के लड़ाकू हेलीकाप्टर की कॉकपिट में सिरैमिक, पाली रबर के मिश्रण के बने कंपोजिट आर्मर पैनल की कोटिंग की गई है। इससे पायलट और को पायलट को सामने से आ रहे दूसरे लड़ाकू विमान की गोलियां निशाना नहीं बना पाएंगी। इस पैनल पर एयरफोर्स में इस्तेमाल होने वाली गोली का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। एचएएल बंगलुरू की आवश्यकता पर डीएमएसआरडीई में इसे विकसित किया है।
न्यूक्लियर बम कॉम्बेट (एनबीसी) पैड
रक्षा सामग्री और भंडार अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान (डीएमएसआरडीई) ने लगाई प्रदर्शनी
इसे टी-90 और बीएमपी टू व टू के टैंक पर लगाया जाता है। इस पैड को लगाने के बाद टैंक के भीतर बैठे सेना के जवानों पर किसी भी प्रकार के परमाणु हमले का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। इसमें विशेष रबर और विशेष मिश्रण का इस्तेमाल किया गया है।
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टारपीडो पनडुब्बी होगी और हल्की
रक्षा सामग्री और भंडार अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान (डीएमएसआरडीई) ने लगाई प्रदर्शनी
मौजूदा पनडुब्बी टारपीडो में इलेक्ट्रिकल जेनरेटर होते हैं जो मेटल के बने होते हैं। मेटल होने के कारण पनडुब्बी का भार अधिक हो जाता है। संस्थान में ऐसे कार्बन नैनो ट्यूब विकसित किए गए हैं जो बेहद हल्के होते हैं। इनके इस्तेमाल से न केवल पनडुब्बी की लाइफ बढ़ेगी बल्कि उसका वजन भी कम होगा। ऐसा होने पर पनडुब्बी में हथियार रखने की क्षमता बढ़ जाएगी।
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दुश्मन नहीं ढूंढ पाएगा
रक्षा सामग्री और भंडार अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान (डीएमएसआरडीई) ने लगाई प्रदर्शनी
संस्थान में मल्टी स्पेक्ट्रल कैमो फ्लेज नेट बनाया गया है। इसके माध्यम से 500 मीटर दूरी पर बैठा दुश्मन भी जवानों को ढूंढ नहीं सकेगा। नेट के पीछे जवानों की छोटी बटालियन और हथियारों को छिपाया जा सकता है। इसे रडार, कैमरे भी नहीं पकड़ पाएंगे। इसमें ऐसी तकनीक का इस्तेमाल किया गया है जो रडार से निकलने वाली किरणों को अवशोषित कर लेगा। इस तरह एक मैटीरियल तैयार किया गया। जिसकी कोटिंग लड़ाकू विमानों में कर दी जाए तो उसे पकड़ा नहीं जा सकेगा। इसके अलावा टैंक को छिपाने में भी इसका इस्तेमाल किया जा सकेगा।