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‘स्वयं को जानो’: शरीर में भगवान का वास, बस उसे पहचानने की जरूरत
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Fri, 26 May 2017 07:41 PM IST
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कानपुर में योगोत्सव कार्यक्रम के दौरान आसन सिखाते स्वामी
पवनमुक्त आसन शरीर की हड्डियों को मजबूती प्रदान करता है। यह आसन तीन चरणों (15 मिनट का एक) में होता है। सबसे पहले जमीन पर बैठकर दोनों पैर फैलाएं। इसके बाद पैरों की अंगुलियों को एक साथ नीचे की ओर करें। पांच बार ऐसा करने के बाद फिर अंगुलियों को पीछे की ओर करें। इसी प्रकार पूरा पंजा नीचे की ओर करें और इसके बाद पीछे की ओर करें। ऐसा ही दोनों हाथों को फैलाकर पूरा चरण करें। इस आसन को प्रतिदिन करने से शरीर की हड्डियां तो मजबूत होती हैं, साथ ही अर्थराइटिस की भी समस्या भी नहीं होती। यह जानकारी ‘योगोत्सव कानपुर’ में दी गई।
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ऐसे आसन जिनके जरिये तनावमुक्त रहा जा सकता है
कानपुर में योगोत्सव कार्यक्रम के दौरान आसन सिखाते स्वामी
कानपुर के कान्हा गैलेक्सी हॉल जीटी रोड में चल रहे स्वयं को जानो योगोत्सव 2017 में अंतिम शु्क्रवार को स्वामी शिवराजानंद सरस्वती और स्वामी कैवल्यानंद सरस्वती ने पवनमुक्त आसन के बारे में बताया। इसके अलावा उन्होंने कई महत्वपूर्ण ऐसे आसन बताए जिनसे हमेशा-हमेशा के लिए तनावमुक्त रहा जा सकता है।
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योगोत्सव में बताया गया-मां काली शक्ति का स्वरूप
योग और आसन करते लोग
बिहार योग विद्यालय, विश्व योग पीठ मुंगेर बिहार और अमर उजाला की ओर से आयोजित योगोत्सव के बारे में स्वामी शिवराजानंद सरस्वती ने बताया कि मनुष्य के शरीर में भगवान का वास होता है। बस उसे पहचानने की आवश्यकता होती है। शरीर में गणेशजी की भूमिका परीक्षक की है। किसे प्रवेश देना है किसे नहीं, यह आपको गणेशजी बताएंगे। कालीजी शक्ति का स्वरूप हैं और वह मनुष्य को ताकत देती हैं।
बीमारियों का इलाज मनुष्य स्वर बदल कर सकता
योगोत्सव में शव आसन करते लोग
कृष्णजी आत्मा की आवाज हैं और जब आत्मा के साथ इंद्रियां मिलती हैं तब आपको आनंद की अनुभूति होती है। इसी आनंद को प्राप्त करने के लिए संत, मुनि और ज्ञानी तपस्या करते हैं। उन्होंने बताया कि बुखार आदि छोटी-मोटी बीमारियों का इलाज मनुष्य स्वर बदल कर सकता है। जब बायां स्वर चले तो भोजन नहीं करना चाहिए। स्वर बदलने का सबसे अच्छा तरीका है कि एक बाल्टी उठाकर थोड़ा सा चलें तो अपने आप स्वर बदल जाएगा।