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यूपी: डॉक्टरों की बड़ी लापरवाही, रोगी को गलत खून चढ़ाया, गुर्दे फेल, हालत गंभीर
Mon, 01 Jul 2019 10:44 AM IST
शाहरुख खान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शाहरुख खान
Updated Mon, 01 Jul 2019 10:44 AM IST
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डॉक्टरों की बड़ी लापरवाही, रोगी को गलत खून चढ़ाया
- फोटो : अमर उजाला
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कानपुर के हैलट के डॉक्टरों की लापरवाही से एक रोगी मौत के मुंह में है। अस्थि रोग विभाग में पैर की सर्जरी होने के बाद रोगी को गलत ब्लड ग्रुप का खून चढ़ा दिया गया। खून चढ़ते ही रोगी की हालत बिगड़ गई। उल्टियां होने लगीं और शरीर में चकत्ते उभर आए।
गुर्दे फेल हो गए तो उसे मेडिसिन विभाग भेज दिया गया। उसकी डायलिसिस की जा रही है। गलती को डॉक्टर आठ दिन तक दबाए रहे। 9वें दिन रविवार को मामला खुलने पर जांच शुरू कर दी गई है कि किस स्तर से चूक हुई। रोगी की गंभीर हालत में डायलिसिस की जा रही है।
परिजनों ने मौखिक रूप से अधिकारियों से शिकायत की है। इटावा के ऊदी मोड़ के रहने वाले उदय सिंह (23) के पैर में चोट लगी थी। उनकी 12 अप्रैल को अस्थि रोग में अस्थि रोग विभागाध्यक्ष डॉ. संजय कुमार ने सर्जरी की और उपकरण डाले गए।
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इसके बाद मरीज को घर ले गए। आराम न मिला तो फिर पैर दिखाने के लिए आए। रोगी के उपकरण निकाल कर जांच कराई गई। 21 जून को फिर ऑपरेशन किया गया। इसके बाद डाक्टरों ने खून मंगाया।
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गुर्दे फेल हो गए तो उसे मेडिसिन विभाग भेज दिया गया। उसकी डायलिसिस की जा रही है। गलती को डॉक्टर आठ दिन तक दबाए रहे। 9वें दिन रविवार को मामला खुलने पर जांच शुरू कर दी गई है कि किस स्तर से चूक हुई। रोगी की गंभीर हालत में डायलिसिस की जा रही है।
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परिजनों ने मौखिक रूप से अधिकारियों से शिकायत की है। इटावा के ऊदी मोड़ के रहने वाले उदय सिंह (23) के पैर में चोट लगी थी। उनकी 12 अप्रैल को अस्थि रोग में अस्थि रोग विभागाध्यक्ष डॉ. संजय कुमार ने सर्जरी की और उपकरण डाले गए।
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इसके बाद मरीज को घर ले गए। आराम न मिला तो फिर पैर दिखाने के लिए आए। रोगी के उपकरण निकाल कर जांच कराई गई। 21 जून को फिर ऑपरेशन किया गया। इसके बाद डाक्टरों ने खून मंगाया।
हैलट के ब्लड बैंक से खून लाया गया। रोगी का ब्लड ग्रुप ओ पॉजीटिव है लेकिन खून ए पॉजीटिव आ गया। रोगी अस्थि रोग विभाग के वार्ड नंबर 17 के बेड नंबर तीन पर भर्ती रहा।
रोगी के मामा अखिलेश सिंह ने बताया कि खून चढ़ते ही रोगी की तबीयत बिगड़ गई। लाल चकत्ते उभर आए और उल्टियां होने लगीं। जल्दी से खून चढ़ना रोक दिया गया। दूसरे रेजीडेंट डाक्टर आ गए तो चेक किया तो पता चला ए पॉजीटिव खून है।
उन्होंने खुद पाउच की चिट देखी जिसमें ए पॉजीटिव लिखा था। आनन-फानन में ब्लड बैंक से ओ पॉजीटिव खून लाया गया। रोगी की तबियत बिगड़ती रही। इससे फिर खून नहीं चढ़ सका। बाद में उसे मेडिसिन विभाग भेजा गया।
जांच में सीरम क्रेटेनिन 11.8 निकला जबकि सामान्य 1.2 तक होता है। डायलिसिस के बाद भी सीरम क्रेटेनिन 11.1 तक आया। वह मेडिसिन के वार्ड नंबर 7 के बेड नंबर 17 पर भर्ती है। इस संबंध में वर्जन के लिए अस्थि रोग विभागाध्यक्ष डॉ. संजय कुमार का फोन नो रिप्लाई रहा। हैलट के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आरके मौर्या ने बताया कि जांच कराई जा रही है कि चूक किस स्तर पर हुई।
रोगी के मामा अखिलेश सिंह ने बताया कि खून चढ़ते ही रोगी की तबीयत बिगड़ गई। लाल चकत्ते उभर आए और उल्टियां होने लगीं। जल्दी से खून चढ़ना रोक दिया गया। दूसरे रेजीडेंट डाक्टर आ गए तो चेक किया तो पता चला ए पॉजीटिव खून है।
उन्होंने खुद पाउच की चिट देखी जिसमें ए पॉजीटिव लिखा था। आनन-फानन में ब्लड बैंक से ओ पॉजीटिव खून लाया गया। रोगी की तबियत बिगड़ती रही। इससे फिर खून नहीं चढ़ सका। बाद में उसे मेडिसिन विभाग भेजा गया।
जांच में सीरम क्रेटेनिन 11.8 निकला जबकि सामान्य 1.2 तक होता है। डायलिसिस के बाद भी सीरम क्रेटेनिन 11.1 तक आया। वह मेडिसिन के वार्ड नंबर 7 के बेड नंबर 17 पर भर्ती है। इस संबंध में वर्जन के लिए अस्थि रोग विभागाध्यक्ष डॉ. संजय कुमार का फोन नो रिप्लाई रहा। हैलट के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आरके मौर्या ने बताया कि जांच कराई जा रही है कि चूक किस स्तर पर हुई।
खून सही ग्रुप का दिया है
हैलट ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. लुबना खान का कहना है कि उन्होंने सारे अभिलेख चेक कर लिए गए हैं। रोगी को ओ पॉजीटिव ब्लड ग्रुप ही दिया गया था। कभी-कभी रोगी को अधिक एंटी बायोटिक के खाने, कैंसर होने आदि कारणों के कारण एंटी बॉडीज बन जाती हैं और रिएक्शन होने लगता है। ब्लड देने में कोई चूक नहीं हुई है।
किसी ने गंभीरता से नहीं लिया
रोगी के परिजनों का आरोप है कि किसी ने गलत खून चढ़ने के मामले को गंभीरता से नहीं लिया। सीनियर डाक्टरों ने भी नहीं देखा, जूनियर डाक्टर ही देखते रहे। समय से जांचें होतीं तो हालत इतनी न बिगड़ती। आठ दिन से मामला दबाए रहे। रविवार को ब्लड जमने से वीगो बंद हो गई। नई वीगो रखी है लेकिन नर्स ने नहीं बदली। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक के पास गए तो बोले कि वक्त खराब होता है तो पेड़ पर चढ़े इंसान को कुत्ता काट लेता है। फिर इमरजेंसी जाकर ईएमओ से शिकायत की तो बोले कि रविवार को जूनियर डाक्टर ही रहते हैं।
जूनियर डाक्टरों को काम के संबंध में पहले बताएं
हैलट के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आरके मौर्या ने प्राचार्य डॉ. आरती लालचंदानी को पत्र लिखा है कि सभी विभागाध्यक्षों को निर्देशित करें कि जूनियर डाक्टरों को काम पर लगाने के पहले ओरिएंटेशन क्लास लें। जूनियर डाक्टरों को पहले काम के संबंध में बताएं, अस्पताल के संबंध में बताएं फिर काम दें।
किसी ने गंभीरता से नहीं लिया
रोगी के परिजनों का आरोप है कि किसी ने गलत खून चढ़ने के मामले को गंभीरता से नहीं लिया। सीनियर डाक्टरों ने भी नहीं देखा, जूनियर डाक्टर ही देखते रहे। समय से जांचें होतीं तो हालत इतनी न बिगड़ती। आठ दिन से मामला दबाए रहे। रविवार को ब्लड जमने से वीगो बंद हो गई। नई वीगो रखी है लेकिन नर्स ने नहीं बदली। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक के पास गए तो बोले कि वक्त खराब होता है तो पेड़ पर चढ़े इंसान को कुत्ता काट लेता है। फिर इमरजेंसी जाकर ईएमओ से शिकायत की तो बोले कि रविवार को जूनियर डाक्टर ही रहते हैं।
जूनियर डाक्टरों को काम के संबंध में पहले बताएं
हैलट के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आरके मौर्या ने प्राचार्य डॉ. आरती लालचंदानी को पत्र लिखा है कि सभी विभागाध्यक्षों को निर्देशित करें कि जूनियर डाक्टरों को काम पर लगाने के पहले ओरिएंटेशन क्लास लें। जूनियर डाक्टरों को पहले काम के संबंध में बताएं, अस्पताल के संबंध में बताएं फिर काम दें।