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विश्व रैबीज दिवस: कानपुर में रोज 30 लोगों को शिकार बना रहे कुत्ते, अस्पतालों में 98 फीसदी केस कुत्ते काटने के
Mon, 28 Sep 2020 11:43 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Mon, 28 Sep 2020 11:43 AM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : Social media
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विश्व रैबीज दिवस आज है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने रैबीज के लिए चार जानवरों के काटने को जिम्मेदार माना है। इनमें कुत्ता, बंदर, सियार और नेवला है। अस्पतालों में रैबीज का इंजेक्शन लगवाने वाले मामलों में 98 फीसदी केस डॉग बाइट यानी कुत्ता काटने के आ रहे हैं।
उर्सला समेत अन्य अस्पतालों के आंकड़ों के मुताबिक कोरोना काल में रोज कुत्ते काटने के 30 नए और 70 पुराने रोगी आ रहे हैं। बारिश में इक्का-दुक्का केस नेवला काटने के आते हैं। दो फीसदी केस में ज्यादातर मामले बंदर काटने के होते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि लोगों में जागरुकता आई है। लोग टीके लगवा लेते हैं इससे रैबीज के केस बहुत कम हो गए हैं।
कोरोना काल में उर्सला समेत अन्य अस्पतालों में रोज आने वाले रैबीज के मामलों में 98 फीसदी केस कुत्ते काटने के हैं। इनमें 30 फीसदी नए और 70 फीसदी फॉलोअप में आते हैं। कहीं-कहीं कटखने बंदर की शिकायतें मिलती हैं। उर्सला में साल में एक-दो केस नेवला और सियार के काटने के आते हैं। जंगल और झाड़ियों के कट जाने से सियार के मामले कई स्वास्थ्य केंद्रों पर सालों से नहीं आए हैं।
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उर्सला समेत अन्य अस्पतालों के आंकड़ों के मुताबिक कोरोना काल में रोज कुत्ते काटने के 30 नए और 70 पुराने रोगी आ रहे हैं। बारिश में इक्का-दुक्का केस नेवला काटने के आते हैं। दो फीसदी केस में ज्यादातर मामले बंदर काटने के होते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि लोगों में जागरुकता आई है। लोग टीके लगवा लेते हैं इससे रैबीज के केस बहुत कम हो गए हैं।
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कोरोना काल में उर्सला समेत अन्य अस्पतालों में रोज आने वाले रैबीज के मामलों में 98 फीसदी केस कुत्ते काटने के हैं। इनमें 30 फीसदी नए और 70 फीसदी फॉलोअप में आते हैं। कहीं-कहीं कटखने बंदर की शिकायतें मिलती हैं। उर्सला में साल में एक-दो केस नेवला और सियार के काटने के आते हैं। जंगल और झाड़ियों के कट जाने से सियार के मामले कई स्वास्थ्य केंद्रों पर सालों से नहीं आए हैं।
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इस साल उर्सला में अभी तक सात हजार लोग रैबीज का इंजेक्शन लगवाने के लिए आए हैं। जीएसवीएम मेडिकल कालेज के संक्रामक रोग अस्पताल में इस साल रैबीज के पांच रोगी आए हैं। इनमें ज्यादातर आसपास के जिलों के हैं। सीएचसी कल्यानपुर के अधीक्षक डॉ. अनिवाश यादव ने बताया कि इस वक्त कुत्ते काटने के ही मामले आ रहे हैं। लोग समय पर टीके लगवा ले रहे हैं। इस कारण रैबीज घातक नहीं हो पा रहा है।
ऐसे लगता है टीका
जिस दिन कुत्ता काटे, बाइट का दिन छोड़कर तीसरे दिन, सातवें दिन और 21 वें दिन। इसके बाद बूस्टर डोज लगती है।
कुत्ता, बंदर काटे तो फौरन यह करें
कुत्ता, बंदर काटे तो तुरंत साबुन लगाकर घाव धो लें। टिटनेस का इंजेक्शन फौरन लगवा लें। घाव पर अधिक पट्टी न बांधें। अगर कुत्ता, बंदर काटने के 10 दिन बाद तक जिंदा है और स्वस्थ है तो घबराने की जरूरत नहीं है। पालतू कुत्ते को रैबीज का टीका लगवाएं। इससे कुत्ता के काटने से बीमारी का डर नहीं रहेगा।
ऐसे लगता है टीका
जिस दिन कुत्ता काटे, बाइट का दिन छोड़कर तीसरे दिन, सातवें दिन और 21 वें दिन। इसके बाद बूस्टर डोज लगती है।
कुत्ता, बंदर काटे तो फौरन यह करें
कुत्ता, बंदर काटे तो तुरंत साबुन लगाकर घाव धो लें। टिटनेस का इंजेक्शन फौरन लगवा लें। घाव पर अधिक पट्टी न बांधें। अगर कुत्ता, बंदर काटने के 10 दिन बाद तक जिंदा है और स्वस्थ है तो घबराने की जरूरत नहीं है। पालतू कुत्ते को रैबीज का टीका लगवाएं। इससे कुत्ता के काटने से बीमारी का डर नहीं रहेगा।