World Heart Day: 55 फीसदी को अटैक के बाद पता चलती है बीमारी, आठ हजार हृदय रोगियों पर अध्ययन से हुआ खुलसा
Kanpur News: कार्डियोलॉजी के प्रोफेसर डॉ. अवधेश कुमार शर्मा का कहना है कि लोगों का ब्लड प्रेशर बढ़ा रहता है, लेकिन उन्हें पता ही नहीं रहता। हृदय में धीरे-धीरे खराबी आती रहती है। जिन रोगियों का अध्ययन किया गया उनमें बहुत कम ने कोलेस्ट्राल पता करने के लिए ब्लड की जांच कराई थी।
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विश्व हृदय दिवस शुक्रवार को है। इस बार की थीम है कि हृदय को जानें और हृदय का उपयोग करें। यह थीम जाहिर करती है कि लोग हृदय की सेहत को लेकर लापरवाही बरत रहे हैं। एलपीएस कार्डियोलॉजी इंस्टीट्यूट के अध्ययन से खुलासा हुआ है कि 55 फीसदी रोगी अटैक आने के पहले न तो हृदय की कोई जांच कराते हैं और न ही एहतियात बरतते हैं।
अटैक पड़ने पर जब अस्पताल पहुंचते हैं तो बीमारी पता चलती है। ब्लड प्रेशर के रोगी नाक से खून आने, घबराहट बढ़ने पर जांच कराते हैं। कार्डियोलॉजी इंस्टीट्यूट ने वर्ष 2016 से अभी तक आठ हजार हृदय रोगियों का अध्ययन किया है। अध्ययन में पाया गया कि हार्ट अटैक के साथ अस्पताल पहुंचे 55 फीसदी रोगियों को पता ही नहीं था कि उनके अंदर बीमारी ने घर कर लिया है।
इन रोगियों ने ब्लड प्रेशर तक की जांच नहीं कराई थी। इनमें कुछ रोगियों को घबराहट और नाक से खून आने की शिकायत हुई तो अस्पताल भागे। इसकी वजह से इनके गुर्दों, नसों आदि में भी खराबी आने लगी थी। 20 फीसदी रोगियों का ब्लड शुगर लेवल हाई रहता था।
धीरे-धीरे आती रहती है हृदय में खराबी
कार्डियोलॉजी के प्रोफेसर डॉ. अवधेश कुमार शर्मा का कहना है कि लोगों का ब्लड प्रेशर बढ़ा रहता है, लेकिन उन्हें पता ही नहीं रहता। हृदय में धीरे-धीरे खराबी आती रहती है। जिन रोगियों का अध्ययन किया गया उनमें बहुत कम ने कोलेस्ट्राल पता करने के लिए ब्लड की जांच कराई थी। उन्होंने बताया कि अध्ययन में 35 फीसदी महिलाएं थीं।
हृदय पर पड़ता है अधिक स्ट्रेस लेने का बुरा असर
महिलाएं सबसे अधिक लापरवाही बरतती हैं। उन्हें हार्ट अटैक आने पर सीने में तेज दर्द नहीं होता। उन्हें घबराहट, सांस फूलना और थकान का लक्षण आता है। इन लक्षणों को वे गंभीरता से नहीं लेतीं। इसके अलावा बहुत कम लोग जागरूक थे कि अधिक स्ट्रेस लेने का बुरा असर हृदय पर पड़ता है।
जानें क्या बोलते हैं आंकड़े...कुल रोगी आठ हजार रोगियों पर सर्वे
- 65 फीसदी पुरुष रोगी, 35 फीसदी महिलाएं।
- 20 फीसदी को डायबिटीज, 80 फीसदी का कोलेस्ट्राल बढ़ा।
- 53 फीसदी रोगियों को तोंदियल मोटापा, ट्राइग्लीसिराइड बढ़ा।
ऐसे करें बचाव
- 40 साल की उम्र होने पर ईसीजी, ईको, टीएमटी की जांच कराएं।
- 30 साल से अधिक उम्र होने पर छह महीने में ब्लड प्रेशर की जांच करा लें।
- नियमित व्यायाम करें, योग, प्राणायाम करें।
- खुश रहें, मनपसंद गाने सुनें, नकारात्मक सोच से दूर रहें।
- तला, भुना और गरिष्ठ भोजन से परहेज करें।
- पौष्टिक और सादा खाना खाएं।