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विश्व पर्यावरण दिवस : सोच में कंगाली, कैसे आए हरियाली, तीन साल में 18 विकास योजनाओं ने ले ली 11861 पेड़ों की बलि

Sat, 05 Jun 2021 12:59 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Sat, 05 Jun 2021 12:59 PM IST
सार

वन विभाग का दावा है कि जिन निर्माण स्थलों के किनारे पेड़ लगाने की जगह नहीं बची है, उसके एवज में किसी दूसरे क्षेत्र या फिर किसी दूसरे जिले में पेड़ों को लगाया जा रहा है। मगर जिस आबादी में पेड़ कटे, वहां सांसों के लिए क्या इंतजाम किए गए, इसका कोई जवाब नहीं है। 

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world environment day 2021, 11,861 trees cut in 18 development plans in three years
विश्व पर्यावरण दिवस 2021 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कानपुर में तीन साल के भीतर 18 विकास कार्यों के लिए 11861 पेड़ों की बलि ली जा चुकी है। इन पेड़ों के बदले निर्माण एजेंसियों ने 10 फीसदी पौधे भी नहीं रोपे। इससे 25 लाख से अधिक की आबादी को पेड़ों की छांव और शुद्ध हवा से वंचित होना पड़ा है। शेष 90 फीसदी पेड़ कहां लगे, इसका भी कोई हिसाब नहीं।
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कुल मिलाकर विकास के नाम पर पेड़ों की कटाई तो तत्परता से की जाती है, मगर उसी आबादी में दोबारा नए पौधे लगाने की चिंता किसी को नहीं। नियमानुसार विकास कार्य के दौरान जब भी कोई पेड़ काटा जाता है तो उसके एवज में 10 गुना पौधे रोपे जाने चाहिए। इसके लिए विकास कार्य कराने वाली संस्था की तरफ से वन विभाग को जगह मुहैया कराई जाती है।
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वन विभाग का दावा है कि जिन निर्माण स्थलों के किनारे पेड़ लगाने की जगह नहीं बची है, उसके एवज में किसी दूसरे क्षेत्र या फिर किसी दूसरे जिले में पेड़ों को लगाया जा रहा है। मगर जिस आबादी में पेड़ कटे, वहां सांसों के लिए क्या इंतजाम किए गए, इसका कोई जवाब नहीं है। 
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16 लाख पेड़ लगाने का दावा, कितने बचे पता नहीं 
वन विभाग की तरफ से वर्ष-2020 से लेकर कानपुर मंडल के विभिन्न क्षेत्रों में 16 लाख पौधे रोपने का दावा किया गया है। इसके अलावा 19 लाख पौधे विभिन्न विभागों के माध्यम से अभियान के तहत लगाए जाने की बात कही गई है। इनमें से कितने पौधे सूख गए और कितने जिंदा हैं, विभागों के पास इसका कोई ब्योरा नहीं है। यानी पेड़ लगाने का दावा कागजी है और हकीकत सबके सामने है। 

काटने का हिसाब है, लगाने का कौन देगा
बानगी के तौर पर वर्ष 2020-21 में सिर्फ अनवरगंज-मंधना रेलवे लाइन, कानपुर-अनवरगंज रेलवे लाइन, कानपुर-शिवराजपुर रेलवे लाइन, घाटमपुर-यमुना रेलवे लाइन, कानपुर-बिठूर मार्ग चौड़ीकरण के अलावा आईआईटी से गुरुदेव तक मेट्रो निर्माण में बाधक बने कुल 567 विशालकाय पेड़ काट डाले गए। इसके एवज में 5670 पौधे रोपे जाने थे, लेकिन इसका हिसाब देने वाला कोई नहीं।


केंद्र सरकार की निगरानी में बना कैंपा कोष
डीएफओ अरविंद यादव का कहना है कि निर्माण कार्यों के लिए जिन पेड़ों को काटा जाता है, उसके बदले निर्माण करने वाली संस्थाओं से जो धनराशि दी जाती है, उसे केंद्र सरकार की निगरानी में संचालित होने वाले कैंपा कोष में जमा किया जाता है। इस कोष से कब कितना और कहां पर धन दिया गया, इसकी मॉनिटरिंग सुप्रीम कोर्ट के जरिये भी की जाती है। इस कोष से धन मिलने के बाद और कार्यदायी संस्थाओं के माध्यम से वन विभाग को जमीन उपलब्ध कराने के बाद ही नए स्थान पर पेड़ लगाए जाते हैं। 
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