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राज्यसभा-विधानपरिषद में महिलाओं ने मांगा आरक्षण, साथ ही कही ये बातें
Fri, 05 Apr 2019 01:56 PM IST
प्रशांत कुमार
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रशांत कुमार
Updated Fri, 05 Apr 2019 01:56 PM IST
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महिलाओं ने मांगा आरक्षण
- फोटो : अमर उजाला
महिला सशक्तीकरण संस्थान ऊर्जिता की ओर से गुरुवार को कानपुर के मर्चेंट चैंबर सभागार में मॉक पार्लियामेंट का आयोजन किया गया। आयोजन का उद्देश्य संसद एवं विधानसभाओं में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करने, महिला आरक्षण विधेयक पर लोकतांत्रिक चर्चा था। साथ ही महिला आरक्षण विधेयक के प्रारूप कार्यक्रम में शामिल महिलाओं की सहमति से प्रस्ताव भी तैयार किया गया, जिसे राष्ट्रपति को भेजा जाएगा।
इस दौरान प्रस्तावित विधेयक के प्रारूप में यह भी सम्मिलित किया गया कि राज्यसभा और विधानपरिषद में भी महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित की जाएं। मॉक पार्लियामेंट में शामिल हुईं गायत्री सिंह ने महिला आरक्षण प्रक्रिया को सामाजिक न्याय की दिशा में प्रगतिशील कदम बताया तो विपक्ष में बैठीं डॉ. ऋत्विजा ने महिलाओं को आरक्षण देने से पहले ग्रामीण स्तर पर उन्हें आर्थिक-सामाजिक रूप से सशक्त बनाने का मुद्दा उठाया।
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इस दौरान प्रस्तावित विधेयक के प्रारूप में यह भी सम्मिलित किया गया कि राज्यसभा और विधानपरिषद में भी महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित की जाएं। मॉक पार्लियामेंट में शामिल हुईं गायत्री सिंह ने महिला आरक्षण प्रक्रिया को सामाजिक न्याय की दिशा में प्रगतिशील कदम बताया तो विपक्ष में बैठीं डॉ. ऋत्विजा ने महिलाओं को आरक्षण देने से पहले ग्रामीण स्तर पर उन्हें आर्थिक-सामाजिक रूप से सशक्त बनाने का मुद्दा उठाया।
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इस बिल के पास होने से महिलाओं को फैसले लेने का अधिकार मिल जाएगा
मॉक स्पीकर डॉ. अलका दीक्षित ने विधेयक प्रारूप में कहा कि आरक्षण प्रक्रिया में पंचायतीराज प्रणाली की आरक्षण के अंदर आरक्षण को अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए भी लागू करके सभी वर्गों की महिलाओं का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाए।
मुख्य अतिथि जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य डॉ. आरती लाल चंदानी ने लोकसभा व विधानसभा में महिला आरक्षण को महिलाओं के सर्वांगीण विकास के लिए सहायक माना। डॉ. माहे तिलत सिद्दीकी ने भी महिला आरक्षण को उचित मानते हुए कहा कि इस बिल के पास होने से महिलाओं को फैसले लेने का अधिकार मिल जाएगा।
मुख्य अतिथि जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य डॉ. आरती लाल चंदानी ने लोकसभा व विधानसभा में महिला आरक्षण को महिलाओं के सर्वांगीण विकास के लिए सहायक माना। डॉ. माहे तिलत सिद्दीकी ने भी महिला आरक्षण को उचित मानते हुए कहा कि इस बिल के पास होने से महिलाओं को फैसले लेने का अधिकार मिल जाएगा।