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Kanpur News: बाबुओं की मिलीभगत से ऊसर-बंजर जमीनों पर तान दिए मकान
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कानपुर। मकसूदाबाद क्षेत्र में 110 बीघा सरकारी जमीन के पट्टे और फर्जीवाड़े के मामले में अब तहसील से लेकर कलक्ट्रेट तक के कर्मचारियों की भूमिका की जांच शुरू हो गई है। इस जमीन की कीमत लगभग 160 करोड़ रुपये आंकी गई है, जिसे कथित तौर पर सस्ते दामों में खरीदकर महंगे दामों पर बेचा गया। इस भूमि पर करीब एक दर्जन से अधिक मकान भी खड़े कर दिए गए हैं। ऐसे में अब इन मकानों पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
एसडीएम सदर अनुभव सिंह ने मामले की सुनवाई करते हुए पूर्व में दिए गए पट्टों को निरस्त कर दिया है, जिसके बाद यह जमीन पूरी तरह से सरकारी घोषित हो गई है। मकसूदाबाद की खतौनी संख्या 1428 से 1433 के 16 खातों में दर्ज जमीन के पट्टों को पूरी तरह से रद्द कर दिया गया है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2022 में भी इन पट्टों को निरस्त कर जमीन को बंजर भूमि में दर्ज करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन मामला फिर से उच्च न्यायालय चला गया था।
दोबारा सुनवाई के आदेशों के बाद आई जांच में यह बात सामने आई है कि इस जमीन को खरीदने वालों में ज्यादातर बाहरी लोग शामिल हैं, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि इसमें तहसील और कलक्ट्रेट के कई बाबुओं की संलिप्तता भी है। एसडीएम ने खतौनी के सभी पट्टों को निरस्त कर जमीन को दोबारा ऊसर-बंजर रिकॉर्ड में दर्ज कर दिया है। मामले में जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने एसडीएम सदर अनुभव सिंह से विस्तृत जांच रिपोर्ट मांगी है। जांच के लिए दो नायब तहसीलदारों को नियुक्त किया गया है। जांच के दौरान यह भी पाया गया है कि खसरा, खतौनी और नामांतरण के दौरान जिन पट्टों का आधार बनाया गया था, वे पूरी तरह से गलत थे।
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एसडीएम सदर अनुभव सिंह ने बताया कि जिलाधिकारी के निर्देश पर पट्टों की गहन जांच कराई जा रही है। इस जांच में यह पता लगाया जाएगा कि कब और किसने किससे जमीन खरीदी। यदि इस खरीद-फरोख्त में कलक्ट्रेट के बाबू या किसी अन्य सरकारी कर्मचारी के नाम सामने आते हैं, तो उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह पूरा फर्जीवाड़ा जल्द ही उजागर होगा और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। इस कार्रवाई से सरकारी भूमि के दुरुपयोग पर अंकुश लगने की उम्मीद है।
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एसडीएम सदर अनुभव सिंह ने मामले की सुनवाई करते हुए पूर्व में दिए गए पट्टों को निरस्त कर दिया है, जिसके बाद यह जमीन पूरी तरह से सरकारी घोषित हो गई है। मकसूदाबाद की खतौनी संख्या 1428 से 1433 के 16 खातों में दर्ज जमीन के पट्टों को पूरी तरह से रद्द कर दिया गया है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2022 में भी इन पट्टों को निरस्त कर जमीन को बंजर भूमि में दर्ज करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन मामला फिर से उच्च न्यायालय चला गया था।
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दोबारा सुनवाई के आदेशों के बाद आई जांच में यह बात सामने आई है कि इस जमीन को खरीदने वालों में ज्यादातर बाहरी लोग शामिल हैं, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि इसमें तहसील और कलक्ट्रेट के कई बाबुओं की संलिप्तता भी है। एसडीएम ने खतौनी के सभी पट्टों को निरस्त कर जमीन को दोबारा ऊसर-बंजर रिकॉर्ड में दर्ज कर दिया है। मामले में जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने एसडीएम सदर अनुभव सिंह से विस्तृत जांच रिपोर्ट मांगी है। जांच के लिए दो नायब तहसीलदारों को नियुक्त किया गया है। जांच के दौरान यह भी पाया गया है कि खसरा, खतौनी और नामांतरण के दौरान जिन पट्टों का आधार बनाया गया था, वे पूरी तरह से गलत थे।
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एसडीएम सदर अनुभव सिंह ने बताया कि जिलाधिकारी के निर्देश पर पट्टों की गहन जांच कराई जा रही है। इस जांच में यह पता लगाया जाएगा कि कब और किसने किससे जमीन खरीदी। यदि इस खरीद-फरोख्त में कलक्ट्रेट के बाबू या किसी अन्य सरकारी कर्मचारी के नाम सामने आते हैं, तो उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह पूरा फर्जीवाड़ा जल्द ही उजागर होगा और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। इस कार्रवाई से सरकारी भूमि के दुरुपयोग पर अंकुश लगने की उम्मीद है।