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UP: हरदोई से जुड़े देशभर की साइबर ठगी के तार, 99 सिम का इस्तेमाल…एक ही विक्रेता ने बेचे थे, ऐसे पहुंचे ठगों तक

Sun, 23 Nov 2025 06:05 AM IST
हिमांशु अवस्थी आनंद मिश्रा, अमर उजाला, हरदोई
आनंद मिश्रा, अमर उजाला, हरदोई Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Sun, 23 Nov 2025 06:05 AM IST
सार

Hardoi News: देशभर में साइबर ठगी के लिए हरदोई से जारी 99 मोबाइल नंबरों और स्थानीय बैंक खातों का इस्तेमाल होने का खुलासा हुआ है। इसके बाद सिविल लाइन निवासी पॉस कोड धारक पर फर्जीवाड़े और आईटी एक्ट में प्राथमिकी दर्ज की गई है।

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Wires of cyber fraud across the country connected to Hardoi use of 99 SIMs were sold by the same seller
सांकेतिक - फोटो : amar ujala

विस्तार

देशभर में हो रही साइबर ठगी के तार हरदोई से जुड़ रहे हैं। इसके लिए हरदोई से जारी सिमों और बैंक खातों का इस्तेमाल किया जा रहा है। प्राथमिक जांच में 99 सिम के जरिये साइबर ठगी किए जाने की बात सामने आई है। यह सिम जारी करने वाले शख्स के खिलाफ शहर कोतवाली में फर्जीवाड़े और आईटी एक्ट की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है। इसके अलावा सवायजपुर, पिहानी, टड़ियावां और पाली थाना क्षेत्रों के लोगों के बैंक खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम मंगाने के लिए किए जाने की भी पुष्टि हुई है।

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इसको लेकर संबंधित थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। पिछले कुछ वर्षों से साइबर ठगी के मामले तेजी से बढ़े हैं। कभी झांसा देकर तो कभी व्यवसाय से जोड़ने के नाम पर ठगी की जा रही है। देश भर में हो रही इन घटनाओं में हरदोई जनपद के 99 मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल किया गया है। खास बात यह है कि जिन लोगों के नाम पर मोबाइल नंबर (सिम) जारी हुए हैं। उनमें से ज्यादातर को पता ही नहीं है कि उनका मोबाइल नंबर ठगी के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।

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2023 में खरीदे थे सिम
साइबर ठगी में इस्तेमाल किए गए नंबरों की जानकारी मिलने पर रेलवेगंज चौकी प्रभारी विश्वास शर्मा ने इसकी जांच की। इसमें पता चला कि प्वाइंट ऑफ सेल कोड (पॉस कोड) के जरिये एक ही जगह से सिम जारी किए गए हैं। यह पॉस कोड शहर के सिविल लाइन निवासी आशुतोष गुप्ता के नाम से जारी हुआ था। यहां से जारी 99 नंबरों का इस्तेमाल साइबर ठगी के लिए किया जा रहा है। कुछ सिमों की जांच की गई तो पता चला कि यह सिम सीतापुर जनपद के मछरेहटा थाना क्षेत्र के रानामऊ गांव निवासी लोगों के हैं। इन सभी ने सिम 2023 में खरीदे थे। आईडी तो इनकी लगी है, लेकिन साइबर ठगों के पास हैं।

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आशुतोष गुप्ता के खिलाफ फर्जीवाड़ा की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है। इसकी गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं। टीमें गठित कर साइबर ठगी के गिरोह का खुलासा किया जाएगा।  -अंकित मिश्रा, सीओ सिटी

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शाहजहांपुर से जारी हुआ था पॉस कोड, ऐसे जारी किए सिम
पुलिस को विवेचना में पता चला कि आशुतोष गुप्ता को पॉस कोड शाहजहांपुर से जारी हुआ था। ठगी में इस्तेमाल किए जा रहे सारे सिम बीएसएनएल के ही हैं और वर्ष 2023 में जारी हुए हैं। विवेचना में यह भी सामने आया कि वर्ष 2023 और 24 तक एक बार अंगूठा लगाकर और आधार देकर तीन सिम तक एक साथ जारी किए जाने की व्यवस्था थी। ऐसे में खरीदने के लिए जाने वाले ग्रामीण इलाकों के लोग एक सिम लेकर चले जाते थे लेकिन उनके नाम से दो और सिम जारी हो जाते थे। इन अतिरिक्त सिमों का इस्तेमाल साइबर फ्रॉड के लिए किया जा रहा है।

केस-1
सवायजपुर कोतवाली क्षेत्र के जिलगांव निवासी सत्य प्रकाश का खाता नंबर साइबर ठगी के लिए इस्तेमाल किया गया। ठगी महाराष्ट्र के मुंबई निवासी विक्रम नारेंद्र से हुई। कुल 19 हजार रुपये की ठगी हुई थी। सत्य प्रकाश के बैंक ऑफ बड़ौदा के खाते में दस हजार रुपये और इंडियन ओवरसीज बैंक के खाते में नौ हजार रुपये मंगाए गए। ठगी में जिस मोबाइल नंबर का इस्तेमाल किया गया वह आदर्श की आईडी पर है।

केस-2
सवायजपुर कोतवाली क्षेत्र के कन्हारी निवासी ओम राज का बैंक खाता बैंक ऑफ बड़ौदा में है। उसकी आईडी से जारी मोबाइल नंबर का इस्तेमाल ठगी के लिए किया गया। महाराष्ट्र के नागपुर सिटी निवासी पंकज के साथ एक हजार रुपये की साइबर ठगी हुई थी। ठगी की रकम ओम राज के बैंक खाते में मिली है। मामले की शिकायत भी महाराष्ट्र में ही दर्ज कराई गई है।

केस-3
सवायजपुर कोतवाली क्षेत्र के मिश्रनपुरवा निवासी आदर्श के मोबाइल नंबर का इस्तेमाल भी साइबर ठगी के लिए किया गया। उनके खिलाफ शिकायत मेरठ निवासी भारत ग्रोवर ने मेरठ में ही दर्ज कराई थी। उनके बैंक खाते से 6500 रुपये ठगे गए थे। गाजीपुर निवासी कैलाश यादव के साथ 45,000 रुपये की साइबर ठगी हुई। इसमें भी आदर्श का मोबाइल नंबर और बैंक खाते का इस्तेमाल किया गया। उनके बैंक ऑफ इंडिया के तीन खातों में 2,100 रुपये, 3,350 रुपये और 1,400 रुपये ठगी के मिले। एयरटेल पेमेंट बैंक के तीन खातों में 15,000, 20,000 और 10,000 रुपये आने की पुष्टि हुई।

केस- 4
पचदेवरा थाना क्षेत्र के बिलसरी निवासी सुधीर कुमार और पांडेयपुर निवासी राजेश के मोबाइल नंबर और बैंक खाते का इस्तेमाल भी साइबर ठगी के लिए किया गया। दोनों ने साइबर ठगी के लिए ही बैंक खाता खुलवाया था। इस खाते में साइबर ठगी के जरिये 3,300 रुपये आए थे और पता चलने पर इसके लेनदेन पर रोक लगा दी गई।

केस-5
सवायजपुर कोतवाली क्षेत्र के धौकलपुर निवासी शशिराजन के बैंक खाते और मोबाइल नंबर को ठगी के लिए राजस्थान में इस्तेमाल किया गया। राजस्थान के गंगानगर निवासी शिप्रा के साथ पांच हजार रुपये और पश्चिम बंगाल की जुमजुम खातून के साथ 1030 रुपये की साइबर ठगी हुई। जांच हुई तो शशिराजन के अलग-अलग खातों में इन रुपयों के आने की पुष्टि हुई। मोबाइल नंबर शशिराजन की आईडी से ही जारी है।

केस-6
सवायजपुर कोतवाली क्षेत्र के रामपुर खम्हरिया निवासी कृष्ण पाल के मोबाइल नंबर और बैंक खाते का इस्तेमाल साइबर ठगी के लिए किया गया। पश्चिम बंगाल के हुगली में संदीप बेरा के साथ साइबर फ्रॉड हुआ और वहीं उन्होंने इसकी शिकायत दर्ज कराई। कृष्ण पाल के बैंक खाते में साइबर ठगी के एक हजार रुपये आने की पुष्टि हुई है।

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