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कब के बिछुड़े हुए हम आज यहां आके मिले
अमर उजाला ब्यूरो/कानपुर
Updated Fri, 25 Dec 2015 01:57 AM IST
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जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के 1965 बैच के स्टूडेंट 50 साल बाद गुरुवार को मिले तो जवानी की यादें ताजा हो गईं। कॉलेज के दिन, कॅरियर, परिवार के साथ आने वाले डॉक्टरों की पीढ़ी और समाज के लिए कुछ कर गुजरने पर चर्चा हुई।
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जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई के स्वर्णिम दिन और तब के माहौल पर बातचीत कर उत्साहित होते रहे। डॉक्टरों को कॉलेज के वर्तमान हालात की जानकारी मिली तो वह थोड़ा दुखी हुए। जूनियर डॉक्टरों को अच्छे व्यवहार की सलाह देकर बोले अच्छे डॉक्टर बन जाएंगे तो रुपये तो अपने आप आने लगेंगे।
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17 साल की उम्र में गोरखपुर से जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की पढ़ाई करने आने वाले डॉ. शिवदयाल सिंह अब 68 साल के हो गए हैं।
लंदन की स्वास्थ्य सेवा में डॉक्टर रह चुके और वर्तमान में वहीं अपना अस्पताल खोलकर प्लास्टिक सर्जरी कर रहे डॉ. सिंह कहते हैं कि जीएसवीएम ने डॉक्टर तो बनाया ही जीने का तरीका भी सिखाया। डॉ. ताराचंद्र, डॉ. भटनागर, डॉ. गिरिराज को याद कर वह भावुक भी हो गए। बोले कि गुरु ही हमारे आदर्श थे।
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मरीजों के बीच वह इतने लोकप्रिय थे कि जूनियर डॉक्टरों की हिम्मत भी नहीं पड़ती थी कि मरीज या तीमारदार से आंख तरेर सकें। कानपुर से पढ़े डॉक्टर आज पूरे विश्व में छाए हुए हैं। कहते हैं कि सरकारी संपत्ति को लोग अपना मान लेंगे तो सरकारी अस्पताल स्वर्ग हो जाएंगे।