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मौसम बिगड़ा, कोहरा बढ़ा
अमर उजाला ब्यूरो, कानपुर
Updated Sun, 13 Dec 2015 02:10 AM IST
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ठंड में जरा सी लापरवाही आपको गूंगा-बहरा भी बना सकती है। इसलिए सतर्क हो जाएं, बाहर निकलें तो कान और गला अच्छी तरह ढक लें। शनिवार को ठंड से आवाज बंद होने के दो मरीज वरिष्ठ ईएनटी सर्जन डॉ. देवेंद्र लाल चंदानी केे पास पहुंचे। उन्होंने बताया कि मरीजों की जरा भी आवाज नहीं निकल रही थी।
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जांच करने पर पता चला कि ठंड लगने से उनके गले (थ्रोट) की नसों में खून का दौड़ान कम हो गया है। दोनों का इलाज किया जा रहा है। जल्द ही दिक्कत दूर हो जाएगी। उन्होंने बताया कि सर्दी लगने से कई लोगों को कान की सुनने वाली नस में खून का दौड़ान कम हो जाता है। इससे अस्थाई बहरापन हो जाता है।
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मरीज को बहुत कम सुनाई देता है या सुनाई देना ही बंद हो जाता है। ये मेडिकल इमरजेंसी होती है। यदि उसी समय मरीज चिकित्सा विशेषज्ञ के पास पहुंचता है तो आडियोमीटरी जांच से इसका पता चल जाता है। तुरंत स्टेरॉयड, खून पतला करने की दवाएं आदि देकर स्थिति नियंत्रित कर ली जाती है, वरना बहरापन स्थाई भी हो सकता है।
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डाक्टर चंदानी के मुताबिक इस मौसम में साइनस, गले के संक्रमण, एलर्जी आदि भी बढ़ जाती है। कई मरीजों में यह भी देखने को मिलता है कि ठीक हो चुकी चक्कर आने की दिक्कत जाड़े में पुन: उभर आती है।
उन्होंने इस मौसम में कानों और गले को अच्छी तरह ढककर घर से निकलने की सलाह दी है। कहा कि पानी भी खूब पीएं, ताकि डिहाइड्रेशन न होने पाए।
अभी और बढ़ेगा कोहरा
घने कोहरे ने शनिवार को जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया। सुबह वातावरण में 100 फीसदी नमी होने से जहां सुबह आठ बजे तक घना कोहरा छाया रहा। लोगों को रोड पर चलने के लिए वाहनों की लाइट जलानी पड़ी। वहीं, 11 बजे तक छाया रहा कोहरा धूप निकलने के बाद कुछ साफ हुआ।
चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के मौसम विज्ञानी डॉ. अनिरुद्ध दुबे ने बताया कि हवाओं और मौसम में बदलाव हुआ तो बूंदाबांदी भी हो सकती है। उन्होंने बताया कि कोहरे से जनजीवन अस्त-व्यस्त होने के साथ दलहनी फसलों पर भी असर पड़ेगा।
इसलिए जरुरी है कि किसान मक्का, अरहर और चना सहित दलहनी फसलों पर वैज्ञानिकों की सलाह के अनुसार दवा का छिड़काव कर दें, अन्यथा आगे फसल को नुकसान होगा। घरों में तुलसी के पौधे को शाम होते ही पॉलीथिन से ढक दें, ताकि वह ओस से बच सके, अन्यथा पौधा मर जाएगा।
राजधानी समेत 52 ट्रेनें लेट
कानपुर। कोहरे से भुवनेश्वर-दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस आठ घंटे और नई दिल्ली-लखनऊ शताब्दी एक्सप्रेस ढाई घंटे देर से सेंट्रल स्टेशन पर पहुंची। सीमांचल एक्सप्रेस, हावड़ा-नई दिल्ली एक्सप्रेस और कालका एक्सप्रेस समेत 52 से ज्यादा ट्रेनें एक से 14 घंटे तक लेट रहीं।
सुबह 11:20 बजे सेंट्रल स्टेशन आने वाली स्वर्ण शताब्दी एक्सप्रेस दोपहर 1:47 बजे प्लेटफार्म नंबर एक पर आई। भुवनेश्वर-दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस सुबह 5:10 बजे की बजाय दोपहर 2:10 बजे पहुंची। ट्रेन लेट होने से वेटिंग हॉल भी फुल रहे। उधर, अलीपुरद्वार से दिल्ली जाने वाली महानंदा एक्सप्रेस शनिवार को नहीं चली। यह रविवार को नहीं आएगी।
कमरे से सीधे वॉक पर न निकलें
कानपुर। ठंड में मार्निंग वॉक करने कमरे से सीधे सड़क पर न निकलें। खासकर हार्ट, बीपी पेशेंट निकलने से पहले पर्याप्त गर्म कपड़े, जूते-मोजे पहनने के साथ ही सिर और कान ढक कर निकलें, वरना उन्हें अटैक पड़ सकता है। ये सलाह जीएसवीएम मेडिकल कालेज के मेडिसिन विभाग के डॉ. कुणाल सहाय ने दी।
डॉ. सहाय ने बताया कि सुबह चार बजे से छह बजे के बीच सर्वाधिक हार्मोनल चेंज होता है। हार्ट अटैक के जितने भी केस होते हैं, उसमें से सर्वाधिक हार्टअटैक इसी समयावधि में होते हैं। इसलिए इन दो घंटों में सर्वाधिक एहतियात बरतने की जरूरत है।