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पांच-छह को बारिश-ओलावृष्टि की संभावना
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कानपुर देहात। मौसम में उतार-चढ़ाव के चलते आगामी दिनों में बारिश की संभावना है। मौसम वैज्ञानिकों ने पांच व छह फरवरी को आकाशीय बिजली गिरने के साथ ही ओलावृष्टि की संभावना जताई है। इसे देखते हुए किसानों को फसलों की सिंचाई न करने की सलाह दी गई है।
जिले में लगातार पड़ रही ठंड व कोहरे के कारण जनजीवन अस्त-व्यस्त था। पिछले तीन दिन से दिन में धूप निकलने से लोगों को काफी राहत मिली है। हालांकि तापमान में गिरावट होने से रातें सर्द हो रही हैं। बुधवार को भी सुबह से ही धूप खिली रही। इससे लोग खुले में बैठकर धूप सेंकते रहे।
सीएसए के मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार उत्तर भारत, जम्मू-कश्मीर व आसपास के हिस्सों में पश्चिमी विक्षोभ है। साथ ही चक्रवाती हवाएं चलने से मौसम का रुख बदल रहा है। इसके चलते पांच और छह फरवरी को बरसात होने की संभावना है। कुछ हिस्सों में बिजली व ओले भी गिर सकते हैं।
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इसे देखते हुए किसान छह फरवरी तक फसलों की सिंचाई न करें। साथ ही खेत में उर्वरक व कीटनाशक का छिड़काव भी करने से बचें। मौसम विभाग के अनुसार हल्की से मध्यम बारिश रबी की फसलों के लिए मुफीद साबित हो सकती है, लेकिन असमय ओलावृष्टि से रबी की फसल व सब्जियों को नुकसान पहुंच सकता है।
इस दौरान पालतू पशु व मुर्गी पालक किसान विशेष ध्यान रखें। पशुशाला में सूखी घास-फूस या पत्तियों का बिछावन प्रतिदिन बदलते रहें। पशुओं को टाट का बोरा ओढ़ाएं। मुर्गीपालक किसान पोल्ट्री घरों में हीटर की सहायता से चूजों व मुर्गियों के लिए अनुकूल तापमान बनाए रखें।
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जिले में लगातार पड़ रही ठंड व कोहरे के कारण जनजीवन अस्त-व्यस्त था। पिछले तीन दिन से दिन में धूप निकलने से लोगों को काफी राहत मिली है। हालांकि तापमान में गिरावट होने से रातें सर्द हो रही हैं। बुधवार को भी सुबह से ही धूप खिली रही। इससे लोग खुले में बैठकर धूप सेंकते रहे।
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सीएसए के मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार उत्तर भारत, जम्मू-कश्मीर व आसपास के हिस्सों में पश्चिमी विक्षोभ है। साथ ही चक्रवाती हवाएं चलने से मौसम का रुख बदल रहा है। इसके चलते पांच और छह फरवरी को बरसात होने की संभावना है। कुछ हिस्सों में बिजली व ओले भी गिर सकते हैं।
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इसे देखते हुए किसान छह फरवरी तक फसलों की सिंचाई न करें। साथ ही खेत में उर्वरक व कीटनाशक का छिड़काव भी करने से बचें। मौसम विभाग के अनुसार हल्की से मध्यम बारिश रबी की फसलों के लिए मुफीद साबित हो सकती है, लेकिन असमय ओलावृष्टि से रबी की फसल व सब्जियों को नुकसान पहुंच सकता है।
इस दौरान पालतू पशु व मुर्गी पालक किसान विशेष ध्यान रखें। पशुशाला में सूखी घास-फूस या पत्तियों का बिछावन प्रतिदिन बदलते रहें। पशुओं को टाट का बोरा ओढ़ाएं। मुर्गीपालक किसान पोल्ट्री घरों में हीटर की सहायता से चूजों व मुर्गियों के लिए अनुकूल तापमान बनाए रखें।