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क्रोमियम कचरा हटाने को दो कंपनियों ने दिखाई रुचि

Tue, 01 Sep 2020 01:36 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 01 Sep 2020 01:36 AM IST
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wastage
रनियां। खानचंद्रपुर में डंप क्रोमियम सल्फेट कचरे निस्तारण में कुंभी की दो कूड़ा निस्तारण कंपनियों ने रुचि दिखाई है। राज्य सरकार की नामित संस्था यूपीसीडा क्रोमियम निस्तारण की प्रगति के अनुसार किस्तों में कूड़ा निस्तारण का भुुगतान करेगी। क्रोमियम कचरा हटाने के एवज में कंपनी को 34 करोड़ रुपये मिलेगा। हालांकि यूपीसीडा की ओर से किस कंपनी को काम दिया जाए, इस पर निर्णय आना बाकी है।
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छह फैक्टरियों से निकला 63 हजार मीट्रिक टन क्रोमियम कचरा लगातार भूजल में घुल रहा है। जिससे क्षेत्र में पीने का पानी दूषित हो गया है। बारिश व हवा के साथ क्रोमियम कचरा से भूजल दूषित करने का दायरा लगातार बढ़ रहा है। एनटीजी की सख्ती के बाद राज्य सरकार ने क्रोमियम कचरा हटाने के लिए यूपीसीडा को कार्यदायी संस्था नामित किया है। यूपीसीडा क्रोमियम कचरा हटवाने के लिए नियमानुसार टेंडर प्रक्रिया करा रहा है। 17 अगस्त को टेंडर प्रक्रिया शुरू हुई थी।
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अकबरपुर के कुंभी में सेंगुर नदी किनारे स्थिति कुंभी स्थिति भारत ऑयल एंड वेस्ट मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड और यूपी वेस्ट मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड कंपनियों ने क्रोमियम कचरा निस्तारण के लिए रुचि दिखाई है। इन कंपनियों ने यूपीसीडा की ऑनलाइन टेंडर प्रक्रिया में भाग लिया है। टेंडर प्रक्रिया क्लोज हो गई है।
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यूपीसीडा के अधिशासी अभियंता संजय तिवरी ने बताया कि क्रोमियम कचरा निस्तारण कार्य की शुरुआत 34 करोड़ रुपये से होनी है। हालांकि टेंडर प्रक्रिया में शामिल कंपनियों के रेट के आधार पर ही टेंडर फाइनल होगा। जल्द ही इसका निर्णय आएगा। क्रोमियम कचरा मौके से हटाए जाने का सत्यापन कराकर ही भुगतान किया जाएगा।
सख्ती हुई तो कचरा छोड़ गए थे उद्यमी
औद्योगिक क्षेत्र रनियां के पास खानचंद्रपुर इलाके में केमिकल फैक्टरियां स्थापित थी। इन फैक्टरियों से निकला क्रोमियम उद्यमियों ने नजदीक सड़क किनारे सरकारी भूमि पर एकत्र कर दिया। कुछ ग्रामीणों की भूमि पर भी मामूली किराया का लालच देकर क्रोमियम कचरा डाला गया। 2015 में भूजल का दूसरा स्ट्रेटा दूषित होने पर हैंडपंप से पीला पानी आने लगा तो लोगों ने शिकायत की। इसके बाद सख्ती हुई तो फैक्टरियां बंद कर दी गई। उद्यमी क्रोमियम कचरा छोड़कर चले गए। 2019 में एनजीटी इस पर सख्त हुई।

कुर्की के लिए फैक्टरियों के अभिलेखों की तलाश
सेरुलीन केमिकल्स, हिल्जर केमिकल्स, वारिस केमिकल्स, रुक्मिणी केमिकल्स, अमलिहा, टेक्सटाइल्स, चांदनी केमिकल्स फैक्टरियों का क्रोमियम कचरा खानचंद्रपुर में डंप है। इन फैक्टरियों पर एनजीटी ने 280 करोड़ रुपये जुर्माना लगाया है। अभी तक फैक्टरियों से वसूली नहीं हो सकी है। अकबरपुर के तहसीलदार अजीत कुमार ने बताया कि तहसील प्रशासन फैक्टरियों की संपत्ति की कुर्की की प्रक्रिया शुरू की, तो केवल रुक्मिणी केमिकल्स की एक बीघा छह विस्वा भूमि राजस्व अभिलेखों में दर्ज मिली। अन्य किसी फैक्टरी के नाम अचल संपत्ति का ब्योरा राजस्व अभिलेखों में दर्ज नहीं मिला। इसकी वजह से इन फैक्टरियों की कुर्की नहीं हो सकी है। हालांकि तहसील प्रशासन अभी अन्य संपत्तियों की तलाश के लिए कार्रवाई कर रहा है।
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