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Kanpur News: वक्फ, नजूल या शत्रु संपत्ति, किसकी है आगमन गेस्ट हाउस की जमीन
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कानपुर। सिविल लाइंस स्थित वक्फ संपत्ति कब्जाने के मामले में अखिलेश दुबे संग भाई व बेटी पर रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। उस जमीन के रिकॉर्ड की जांच में अब नया खुलासा हुआ है। अभी तक इस जमीन को वक्फ बोर्ड का माना जा रहा था लेकिन यह जमीन नजूल और शत्रु संपत्ति के रिकॉर्ड में भी दर्ज है। इसकी हकीकत जानने के लिए डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह ने एसडीएम सदर अनुभव की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी गठित की है। टीम जांच कर रिपोर्ट डीएम को सौंपेगी।
अधिवक्ता सौरभ भदौरिया ने शिकायत करते हुए बताया था कि सिविल लाइंस स्थित भूखंड संख्या 13/387, 388 और 390 वक्फ के अभिलेखों में दर्ज है। वर्तमान में इस जमीन पर आगमन गेस्ट हाउस, कैनरी लंदन, वंदना सैलून, आस्क म्यूचुअल फंड एवं एमपी डोर के कार्यालय संचालित हैं। इसके बाद भी गलत तरीके से अखिलेश दुबे के भाई सर्वेश दुबे को राजकुमार शुक्ला ने वर्ष 2016 में जमीन का पट्टा कर दिया था। इस मामले में बुधवार को मुतवल्ली मोईनुद्दीन आसिफ जाह शेख आसिफ जाह ने अधिवक्ता अखिलेश दुबे के साथ भाई सर्वेश, बेटी सौम्या व अन्य पर रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
एडीएम सिटी डॉ. राजेश कुमार की अध्यक्षता वाली टीम ने जमीन के रिकॉर्ड की जांच कराई तो कुछ और हकीकत सामने आई। जांच में पता चला कि यह जमीन नजूल के रिकॉर्ड में वर्ष 1860 के करीब हाफिज मोहम्मद हलीम नामक व्यक्ति को लीज पर दी गई थी। वर्ष 1979 में इस संपत्ति की नीलामी कर दी गई। इसके बाद तत्काल मुतवल्ली इसे वक्फ संपत्ति बताकर कोर्ट चले गए। वर्ष 1982 में कोर्ट ने आपत्ति खारिज कर दी। इसके बाद भूखंड संख्या 13/388 सिविल लाइंस निवासी नीलामी क्रेता प्रभावती अग्रवाल ने आधा भाग व रंजना काशीवार ने अपना पूरा भाग वर्ष 1985 में अलका खेमका पत्नी श्याम खेमका, निर्मला गुप्ता व उमा ओमर को बेच दिया। इस जमीन को वर्ष 2001 में किदवई नगर निवासी राजकुमार शुक्ला को 99 वर्ष के लिए पट्टे पर दे दिया गया था। दूसरी तरफ इसी वर्ष तत्कालीन जिलाधिकारी ने इस संपत्ति को शत्रु संपत्ति घोषित कर दिया था। रिकॉर्ड में वक्फ संपत्ति के अनुसार ही इस जमीन को वर्ष 2016 में अखिलेश दुबे के भाई सर्वेश दुबे को बेच दी गई जबकि जमीन के पट्टे की अवधि वर्ष 2010 में समाप्त हो चुकी है। इसमें सबसे खास बात सामने आई कि यह संपत्ति नजूल से वक्फ और वक्फ से शत्रु संपत्ति के रिकॉर्ड में कैसे दर्ज हो गई। इसकी जांच एसडीएम सदर, तहसीलदार सदर और एसीएम सात को दी गई है। ये संपत्ति के सभी रिकॉर्डों की जांच कर जिलाधिकारी को रिपोर्ट सौंपेंगे।वर्जन-
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भूखंड संख्या 13/387, 388, 390 नजूल, वक्फ बोर्ड और शत्रु संपत्ति के रिकॉर्ड में दर्ज है। इसकी जांच शुरू कर दी गई है। जल्द ही जांच कर रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपेंगे।
अनुभव कुमार, एसडीएम सदर
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अधिवक्ता सौरभ भदौरिया ने शिकायत करते हुए बताया था कि सिविल लाइंस स्थित भूखंड संख्या 13/387, 388 और 390 वक्फ के अभिलेखों में दर्ज है। वर्तमान में इस जमीन पर आगमन गेस्ट हाउस, कैनरी लंदन, वंदना सैलून, आस्क म्यूचुअल फंड एवं एमपी डोर के कार्यालय संचालित हैं। इसके बाद भी गलत तरीके से अखिलेश दुबे के भाई सर्वेश दुबे को राजकुमार शुक्ला ने वर्ष 2016 में जमीन का पट्टा कर दिया था। इस मामले में बुधवार को मुतवल्ली मोईनुद्दीन आसिफ जाह शेख आसिफ जाह ने अधिवक्ता अखिलेश दुबे के साथ भाई सर्वेश, बेटी सौम्या व अन्य पर रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
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एडीएम सिटी डॉ. राजेश कुमार की अध्यक्षता वाली टीम ने जमीन के रिकॉर्ड की जांच कराई तो कुछ और हकीकत सामने आई। जांच में पता चला कि यह जमीन नजूल के रिकॉर्ड में वर्ष 1860 के करीब हाफिज मोहम्मद हलीम नामक व्यक्ति को लीज पर दी गई थी। वर्ष 1979 में इस संपत्ति की नीलामी कर दी गई। इसके बाद तत्काल मुतवल्ली इसे वक्फ संपत्ति बताकर कोर्ट चले गए। वर्ष 1982 में कोर्ट ने आपत्ति खारिज कर दी। इसके बाद भूखंड संख्या 13/388 सिविल लाइंस निवासी नीलामी क्रेता प्रभावती अग्रवाल ने आधा भाग व रंजना काशीवार ने अपना पूरा भाग वर्ष 1985 में अलका खेमका पत्नी श्याम खेमका, निर्मला गुप्ता व उमा ओमर को बेच दिया। इस जमीन को वर्ष 2001 में किदवई नगर निवासी राजकुमार शुक्ला को 99 वर्ष के लिए पट्टे पर दे दिया गया था। दूसरी तरफ इसी वर्ष तत्कालीन जिलाधिकारी ने इस संपत्ति को शत्रु संपत्ति घोषित कर दिया था। रिकॉर्ड में वक्फ संपत्ति के अनुसार ही इस जमीन को वर्ष 2016 में अखिलेश दुबे के भाई सर्वेश दुबे को बेच दी गई जबकि जमीन के पट्टे की अवधि वर्ष 2010 में समाप्त हो चुकी है। इसमें सबसे खास बात सामने आई कि यह संपत्ति नजूल से वक्फ और वक्फ से शत्रु संपत्ति के रिकॉर्ड में कैसे दर्ज हो गई। इसकी जांच एसडीएम सदर, तहसीलदार सदर और एसीएम सात को दी गई है। ये संपत्ति के सभी रिकॉर्डों की जांच कर जिलाधिकारी को रिपोर्ट सौंपेंगे।वर्जन-
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भूखंड संख्या 13/387, 388, 390 नजूल, वक्फ बोर्ड और शत्रु संपत्ति के रिकॉर्ड में दर्ज है। इसकी जांच शुरू कर दी गई है। जल्द ही जांच कर रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपेंगे।
अनुभव कुमार, एसडीएम सदर