कभी 12 हजार करोड़ से अधिक की संपत्ति के मालिक रहे विजयपत बाबू (विजयपत सिंघानिया ) की गिनती प्रयोगधर्मी कारोबारी के तौर पर होती रही है। जवानी के दिनों में इन्होंने अपने कारोबार को बढ़ाने में ढेरों प्रयोग किए। पिता कैलाशपत सिंहानिया के न रहने पर अपने चचेरे बड़े भाई गोपालपत (सर पदमपत सिंहानिया के बेटे) के साथ मिलकर रेमंड कंपनी को दुनिया के सरताज ब्रांडों में शुमार कराया।
ये रहा अरबपति विजयपत सिंघानिया का कानपुर कनेक्शन और अब हैं ऐसे हालात
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गोपाल बाबू के दुनिया से रुखसत होने के बाद न सिर्फ रेमंड कंपनी को अकेले संभाला, बल्कि एक दर्जन से अधिक नई कंपनियां खोलीं। यह बात और कि अलग अलग कारणों से बाद में खुली कंपनियां बहुत लंबे समय तक नहीं चल सकीं। जेके केमिकल, न्यू केसरे हिंद, जेके शिपिंग, हेलेन कर्टिस के नाम आज भी लोगों की जुबान पर चढ़े हुए हैं।
ये हैं सिंघानिया के कारनामे
- 24 दिन में पूरी की 34 हजार किलोमीटर की उड़ान
- 67 साल की उम्र में सबसे ऊंचाई पर उड़ाया हॉट एयर बैलून
- ऊंचाई पसंद थी इसीलिए बनवाया 36 मंजिला घर- मुकेश अंबानी के एंटीलिया से भी ऊंचे घर पर रहे
1958 में मुंबई में खुला पहला शोरूम
1980 में संभाली रेमंड कंपनी की कमान
1986 में रेमंड का प्रीमियम ब्रांड पार्क एवेन्यू लॉन्च किया
1990 में देश के बाहर ओमान में कंपनी का पहला विदेशी शो रूम खोला
विजयपत बाबू का बचपन कानपुर शहर में गंगा किनारे स्थित अपने घर ‘गंगाकुटी’ (कैंट) में बीता। संयुक्त परिवार में इनका पालन पोषण हुआ। सिविल लाइंस स्थित गुरुनारायण (जीएनके) खत्री इंटर कालेज से पढ़े। इसके बाद पिता के साथ रहने मुंबई चले गए। वहां 36 मंजिला ऊंचे भव्य घर में रहने के बावजूद शहर को नहीं भूले। परिवार के सदस्यों के बुलावे पर या फिर जब भी मन हुआ, त्योहारों में शहर आते रहे। जब भी शहर आए, परमट में आनंदेश्वर बाबा के दर्शन जरूर किए।