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भ्रष्टाचार पर वार: विजिलेंस अफसर ने गलत रिपोर्ट बनाने को ली रिश्वत, सीबीआई ने तीन पर दर्ज किया मामला 

Wed, 27 Apr 2022 08:18 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Wed, 27 Apr 2022 08:18 AM IST
सार

रेलवे के विजिलेंस अफसर ने डिप्टी सीआईटी के पास गड़बड़ी पकड़ी थी, जिसकी रिपोर्ट गलत बनाने के लिए रिश्वत ली। इस मामले की शिकायत पर दिल्ली सीबीआई ने जांच कर रेलवे के चीफ विजिलेंस इंस्पेक्टर, डिप्टी सीआईटी समेत तीन पर केस दर्ज किया है। 

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Vigilance officer took bribe to make wrong report, CBI registered a case against three
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

एनसीआर रेलवे के चीफ विजिलेंस इंस्पेक्टर ने चेकिंग के दौरान कानपुर सेंट्रल पर तैनात डिप्टी सीआईटी से 290 रुपये की गड़बड़ी पकड़ी। मामला रफादफा करने के लिए विजिलेंस इंस्पेक्टर ने रिश्वत के 20 हजार रुपये अपने करीबी के पेटीएम नंबर पर ट्रांसफर करवा लिए। शिकायत पर सीबीआई दिल्ली के इंस्पेक्टर ने जांच की और उनको दोषी माना, जिसके बाद विजिलेंस इंस्पेक्टर, डिप्टी सीआईटी समेत तीन पर साजिश रचने व भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया है। 

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दरअसल, एनसीआर के चीफ विजिलेंस इंस्पेक्टर संतोष पांडेय ने 16 फरवरी 2022 को मरुधर एक्सप्रेस (14863) में चेकिंग कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कानपुर के डिप्टी सीआईटी (चीफ इंस्पेक्टर टिकट) पंकज वर्मा की चेकिंग कर ब्योरा लिया, जिसमें 290 रुपये की गड़बड़ी मिली। सीबीआई की एफआईआर के मुताबिक संतोष ने पंकज से कहा कि अगर वह उनकी रिपोर्ट इस संबंध में आगे भेज देंगे, तो उनकी सर्विस संकट में पड़ जाएगी। बचाने के एवज में संतोष ने उनसे 20 हजार रुपये की रिश्वत मांगी। पंकज ने नकद रकम न होने की बात कही।

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इस पर संतोष ने प्रयागराज निवासी अपने दोस्त सुभाष चंद्र यादव के पेटीएम नंबर पर 10-10 हजार रुपये दो बार में ट्रांसफर करवा लिए। इसके बाद मामले की शिकायत पर सीबीआई ने जांच की। जांच रिपोर्ट के आधार पर सीबीआई इंस्पेक्टर संजीव कुमार सिंह की तहरीर पर इन सभी पर एफआईआर दर्ज की गई।

इसलिए जांच में फंस गए
जब सीबीआई ने जांच शुरू की तो सुभाष व संतोष पांडेय का कनेक्शन खोजना शुरू किया। सर्विलांस समेत अन्य कई तथ्यों से स्पष्ट हुआ कि संतोष व सुभाष दोनों परिचित हैं। पंकज से जो रकम सुभाष को पेटीएम कराई गई थी उसे संतोष ने ली थी। इसी आधार पर सीबीआई ने तीनों को दोषी माना है। 

खुद की शिकायत, आरोपी भी बनाए गए 
डिप्टी सीआईटी पंकज वर्मा ने मामले की खुद ही शिकायत की थी। चूंकि रिश्वत लेने वाला और देने वाला दोनों दोषी होते हैं, इसलिए उनको भी आरोपी बनाया गया है। वहीं, जो 290 रुपये की गड़बड़ी मिली थी वह भी आधार बनी। यही वजह है कि पंकज पर भी शिकंजा कसा। ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर कराने से सीबीआई को इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य मिल गए, जो केस में बेहद अहम हैं।

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