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Kanpur: केबल ऑपरेटर की हत्या में 22 साल बाद आया फैसला, एक दोषी करार…पत्नी व दिव्यांग भाई बरी, सजा कल

Sun, 07 Jul 2024 11:28 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Sun, 07 Jul 2024 11:28 AM IST
सार

Kanpur News: वर्ष 2002 में डिस्क के किराये के विवाद में हरजेंदर नगर निवासी केबल ऑपरेटर की हत्या हुई थी।हत्या के बाद सियासी घमासान मच गया था और विधायक महाना के घर और स्कूल में भीड़ ने पथराव किया था।

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Verdict came after 22 years in murder of a cable operator, one convicted, wife and disabled brother acquitted
कोर्ट फैसला - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कानपुर में डिस्क के किराये को लेकर हुई केबल मालिक के भतीजे की हत्या के मुकदमे में 22 साल बाद फैसला आ गया है। अपर जिला जज सप्तम आजाद सिंह ने एक को गैर इरादतन हत्या का दोषी करार दिया है, जबकि दो को बरी कर दिया है। एक आरोपी की मौत हो चुकी है। दोषी को कोर्ट आठ जुलाई को सजा सुनाएगी।

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डिस्क का काम करने वाले हरजेंद्र नगर निवासी प्रताप सिंह चार सितंबर 2002 की दोपहर भतीजे जसविंदर सिंह के साथ किराया वसूलने मोहल्ले के सुभाष बिंद्रा के घर गए थे। रुपयों को लेकर यहां मारपीट हो गई थी। इसमें जसविंदर की मौत हो गई थी। प्रताप ने चकेरी थाने में सुभाष ब्रिंदा, उसकी पत्नी शशि, भाई विनय कुमार बिंद्रा उर्फ बाड़े और मां रामकली के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
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आरोप था कि चारों ने मिलकर लोहे की रॉड से पीट-पीटकर जसविंदर की हत्या कर दी। एडीजीसी विनोद त्रिपाठी ने बताया कि मुकदमे में चारों के खिलाफ वर्ष 2006 में कोर्ट ने हत्या का आरोप तय किया था। अभियोजन की ओर से नौ गवाह पेश किए गए। सुनवाई के दौरान रामकली की मौत हो गई थी। कोर्ट ने घटना को हत्या नहीं बल्कि गैर इरादतन हत्या मानकर सुभाष को दोषी करार दिया, जबकि सबूतों और गवाहों के आधार पर पत्नी शशि और दिव्यांग भाई विनय को बरी कर दिया।

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22 साल बाद मिटा हत्या का कलंक तो छलक पड़े आंसू
हत्या का कलंक झेल रहे दिव्यांग को 22 साल बाद कोर्ट से न्याय मिल सका। कोर्ट का आदेश सुनने के बाद उसकी आंखों से आंसू छलक पड़े। मौत के बाद उपजे आक्रोश के चलते जो एफआईआर दर्ज हुई, उसमें सुभाष के साथ-साथ उसकी पत्नी, उसके एक हाथ से दिव्यांग भाई और बुजुर्ग मां को भी आरोपी बना दिया गया था। दिव्यांग विनय के अधिवक्ता कमलेश पाठक ने एक गवाह के माध्यम से कोर्ट में साबित किया कि घटना के समय विनय आर्डनेंस पैराशूट फैक्ट्री में दोस्त से मिलने गया था। तर्क रखा कि एक हाथ से दिव्यांग पर मारपीट कर हत्या का आरोप हास्यास्पद है। बुजुर्ग मां पर गुम्मे चलाने का आरोप लगाया गया था। कोर्ट ने दिव्यांग और वृद्धा को बरी कर दिया।

भीड़ ने विधायक के घर को भी बनाया था निशाना
जसविंदर की हत्या के बाद क्षेत्र में तनाव फैल गया था। केबल ऑपरेटर्स ने हड़ताल कर दी थी। क्षेत्रीय लोगों ने सुभाष के घर और दुकान पर पथराव व तोड़फोड़ की थी। दुकान में आग लगाने की कोशिश की गई थी। हालात बिगड़ने पर पुलिस ने रात में ही शव का पोस्टमार्टम कराया था। अगले दिन शवयात्रा निकलने के दौरान बाजार बंद रहा। इस बीच भी लोगों ने तोड़फोड़ की थी। कुछ लोगों ने इसे राजनीतिक रंग देने की कोशिश की।

पुलिस ने उपद्रवियों के खिलाफ भी मुकदमे दर्ज किए थे
तत्कालीन भाजपा विधायक सतीश महाना पर हत्यारोपियों की पैरवी करने का आरोप लगाया गया, जिसके बाद भीड़ ने महाना के घर और स्कूल पर भी पथराव कर दिया था। स्कूल बस फूंकने की कोशिश पर पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा था। पुलिस ने उपद्रवियों के खिलाफ भी मुकदमे दर्ज किए थे। व्यापारियों के बीच सतीश महाना के कहने पर मुकदमे दर्ज करने की अफवाह फैलाकर चिंगारी को हवा देने की कोशिश की गई थी। इस हत्याकांड के बाद कई दिनों तक शहर में सियासी हलचल मची रही थी।

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