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डाकुओं की धमाचौकड़ी के लिए मशहूर था गांव अब उसी गांव के किसान का बेटा बना सरकारी खजाने का अफसर
Fri, 11 Oct 2019 09:12 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
यूपी डेस्क, अमर उजाला, बांदा
यूपी डेस्क, अमर उजाला, बांदा
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Fri, 11 Oct 2019 09:12 PM IST
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पीसीएस 2017 में चयनित सौम्या सिंह एवं होरीलाल
- फोटो : अमर उजाला
जो गांव डाकुओं की धमाचौकड़ी के लिए शोहरत में रहा था, अब उसी गांव के किसान का बेटा सरकारी खजाने का अफसर बनेगा। यहां के मेधावी होरीलाल पटेल ने पीसीएस-2017 की परीक्षा में ट्रेजरी आफीसर (कोषाधिकारी) पद पर सफलता हासिल की है।
जिले के फतेहगंज थाना क्षेत्र का जबरापुर गांव दस्यु प्रभावित क्षेत्र है। यह कई दशकों से किसी न किसी दस्यु गिरोह की धमाचौकड़ी का अड्डा रहा है। कुछ साल पहले डकैत बलखड़िया ने इस गांव में सड़क निर्माण की सरकारी कोशिश नाकाम कर दी थी। अब जबरापुर को एक नई पहचान मिली है।
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जिले के फतेहगंज थाना क्षेत्र का जबरापुर गांव दस्यु प्रभावित क्षेत्र है। यह कई दशकों से किसी न किसी दस्यु गिरोह की धमाचौकड़ी का अड्डा रहा है। कुछ साल पहले डकैत बलखड़िया ने इस गांव में सड़क निर्माण की सरकारी कोशिश नाकाम कर दी थी। अब जबरापुर को एक नई पहचान मिली है।
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पहली बार इस गांव से किसी युवक ने पीसीएस परीक्षा उत्तीर्ण की है। साधारण किसान रामप्रकाश पटेल के बेटे होरीलाल को बृहस्पतिवार को घोषित पीसीएस-2017 परीक्षा में ट्रेजरी आफीसर पद पर सफलता हासिल हुई है। होरीलाल बताते हैं कि उन्हें चौथे प्रयास में सफलता मिली।
हाल ही में घोषित सहायक प्रोफेसर के नतीजे में भी होरीलाल का चयन भूगोल विषय में सहायक प्रोफेसर पद पर हुआ है, लेकिन वे ट्रेजरी आफीसर पद पर ज्वाइन करेंगे। इससे गांव में जश्न का माहौल है। पहली बार इस गांव से कोई पीसीएस अफसर बना है।
होरीलाल के बड़े भाई महेंद्र प्रताप गुजरात में कस्टम आफीसर हैं। छोटा भाई अजय गांव में रहकर पढ़ाई कर रहा है। होरीलाल का कहना है कि उसका लक्ष्य आईएएस बनना है। इसकी तैयारी कर रहा है। माता-पिता, भाई-बहनों के अलावा मित्र जुनैद खां, सत्येंद्र सिंह, प्रेम वर्मा, मान सिंह पटेल और आजाद सिंह को भी सफलता में भागीदार बताया। बेरोजगार युवाओं को इस पंक्ति के साथ संदेश दिया- रख हौसला वो मंजर भी आएगा, प्यासे के पास चलकर समुंदर भी आएगा।
हाल ही में घोषित सहायक प्रोफेसर के नतीजे में भी होरीलाल का चयन भूगोल विषय में सहायक प्रोफेसर पद पर हुआ है, लेकिन वे ट्रेजरी आफीसर पद पर ज्वाइन करेंगे। इससे गांव में जश्न का माहौल है। पहली बार इस गांव से कोई पीसीएस अफसर बना है।
होरीलाल के बड़े भाई महेंद्र प्रताप गुजरात में कस्टम आफीसर हैं। छोटा भाई अजय गांव में रहकर पढ़ाई कर रहा है। होरीलाल का कहना है कि उसका लक्ष्य आईएएस बनना है। इसकी तैयारी कर रहा है। माता-पिता, भाई-बहनों के अलावा मित्र जुनैद खां, सत्येंद्र सिंह, प्रेम वर्मा, मान सिंह पटेल और आजाद सिंह को भी सफलता में भागीदार बताया। बेरोजगार युवाओं को इस पंक्ति के साथ संदेश दिया- रख हौसला वो मंजर भी आएगा, प्यासे के पास चलकर समुंदर भी आएगा।
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रेलवे में यातायात निरीक्षक पीके सिंह की बेटी कुमारी सौम्या सिंह का सौभाग्य सिर चढ़कर बोल रहा है। यूपीपीएससी-2015 में उनका चयन उद्योग विभाग में सहायक आयुक्त पद पर हुआ था। इसमें कार्यरत रहते हुए उन्होंने वर्ष 2017 में यूपीपीएससी की परीक्षा दी। गुरुवार को घोषित नतीजे में सौम्या का चयन पुलिस उपाधीक्षक पद पर हुआ है। जल्द ही वह खाकी वर्दी में नजर आएगी।
मूलरूप से महोबा जिले के ग्योड़ी गांव के रहने वाले पीके सिंह बांदा में तैनात हैं। घर में खुशियों का माहौल है। सौम्या ने इसका श्रेय माता-पिता को दिया। छोटी बहन तान्या सिंह ने भी वर्ष 2017 में यूपीपीएससी की परीक्षा दी थी। मुख्य परीक्षा में सफलता के बाद साक्षात्कार में चयन नहीं हो पाया। सौम्या वर्तमान समय में उद्योग विभाग में सहायक आयुक्त पद पर आगरा में तैनात हैं।
मूलरूप से महोबा जिले के ग्योड़ी गांव के रहने वाले पीके सिंह बांदा में तैनात हैं। घर में खुशियों का माहौल है। सौम्या ने इसका श्रेय माता-पिता को दिया। छोटी बहन तान्या सिंह ने भी वर्ष 2017 में यूपीपीएससी की परीक्षा दी थी। मुख्य परीक्षा में सफलता के बाद साक्षात्कार में चयन नहीं हो पाया। सौम्या वर्तमान समय में उद्योग विभाग में सहायक आयुक्त पद पर आगरा में तैनात हैं।