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डीएफसी: न्यू टूंडला से भाऊपुर तक इलेक्ट्रिफिकेशन में इटली और स्पेन की आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल
Mon, 11 Jan 2021 12:01 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Mon, 11 Jan 2021 12:01 PM IST
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डेडिकेटेट फ्रेट कॉरिडोर (डीएफसी)
- फोटो : amar ujala
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डीएफसी (डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर) के न्यू टूंडला से भाऊपुर तक इलेक्ट्रिफिकेशन में इटली और स्पेन की आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। जिससे मालगाड़ियों को तेज रफ्तार से चलाने में मदद मिल रही है। टुंडला से भाऊपुर तक इलेक्ट्रिफिकेशन में केटनरी वायर लगाए गए हैं।
जो वोल्टेज संतुलन का काम करते हैं। सामान्यत: इलेक्ट्रिक रूट पर चलने में अक्सर वोल्टेज घटता-बढ़ता रहता है, जिससे मालगाड़ी की स्पीड पर असर पड़ता है। इस पूरे रूट पर केटनरी वायर लगाए गए हैं। इस वायर के बीच में ड्रॉप वायर लगाया है, जो कि वोल्टेज संतुलन को बनाए रखता है।
यही वजह है कि इस रूट पर 116 वैगन वाली लंबी मालगाड़ियों को 12 हजार हॉर्स पावर वाले इंजन से 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ाना मुमकिन हो रहा है। डीएफसी के परियोजना निदेशक अंशुमान शर्मा ने बताया कि डीएफसी में बहुत ही उच्च तकनीकी का इस्तेमाल किया गया है। भले ही वह विदेशों की तकनीक जैसी हो लेकिन यह सभी मेक इन इंडिया है।
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जो वोल्टेज संतुलन का काम करते हैं। सामान्यत: इलेक्ट्रिक रूट पर चलने में अक्सर वोल्टेज घटता-बढ़ता रहता है, जिससे मालगाड़ी की स्पीड पर असर पड़ता है। इस पूरे रूट पर केटनरी वायर लगाए गए हैं। इस वायर के बीच में ड्रॉप वायर लगाया है, जो कि वोल्टेज संतुलन को बनाए रखता है।
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यही वजह है कि इस रूट पर 116 वैगन वाली लंबी मालगाड़ियों को 12 हजार हॉर्स पावर वाले इंजन से 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ाना मुमकिन हो रहा है। डीएफसी के परियोजना निदेशक अंशुमान शर्मा ने बताया कि डीएफसी में बहुत ही उच्च तकनीकी का इस्तेमाल किया गया है। भले ही वह विदेशों की तकनीक जैसी हो लेकिन यह सभी मेक इन इंडिया है।
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