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कानपुर: तीन महिलाओं ने थामी बस की स्टीयरिंग, आगरा की सोनू पहले भी चलाती थीं प्राइवेट बस
Thu, 11 Mar 2021 08:11 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Thu, 11 Mar 2021 08:11 PM IST
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बस चलाती महिलाएं
- फोटो : amar ujala
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कानपुर में विकास नगर स्थित मॉडल ड्राइविंग ट्रेनिंग एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट में चल रहे महिला ड्राइवर प्रशिक्षण कोर्स के तीन दिनों में ही तीन महिलाओं ने बस की स्टीयरिंग थाम ली। इनमें एक आगरा की सोनू पहले भी प्राइवेट बस चलाती रहीं हैं।
वहीं दूसरी आगरा की ही अमिता जैन टैक्सी ड्राइवर रहीं हैं। गाजियाबाद की वेद कुमारी के पास भी चार साल पुराना लाइट वाहनों का डीएल है। इन्हें सिखाने के लिए साथ में अनुभवी ड्राइवर भी रहे। इंस्टीट्यूट के प्रधानाचार्य एसपी सिंह ने बताया कि वह इन महिलाओं और लड़कियों को चयन प्रक्रिया के समय से प्रोत्साहित कर रहे थे।
तीन ने प्रशिक्षण के दौरान बस चलाकर अपनी दक्षता दिखाई है। बाकी ने भी कार से ट्रेनिंग में अच्छा प्रदर्शन किया। सात माह के इस प्रशिक्षण में 34 दिन क्लासेज और परिसर में प्रैक्टिकल कराया जाएगा। इसके बाद सिर्फ प्रैक्टिकल ही होगा।
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27 के बैच में एक ने छोड़ी ट्रेनिंग
आठ मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर जिन 27 लड़कियों के बैच ने प्रशिक्षण की शुरुआत की थी। उसमें 26 तो प्रशिक्षण ले रही हैं लेकिन फर्रुखाबाद की लड़की नाज फातिमा ने ट्रेनिंग छोड़ दी। उसने अपने न आने का कारण सामाजिक बंदिश बताया है। उसका कहना है कि वह परिवार के लिए एक हुनर सीखना चाहती थी लेकिन चयन के बाद भी मुमकिन नहीं हो सका।
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वहीं दूसरी आगरा की ही अमिता जैन टैक्सी ड्राइवर रहीं हैं। गाजियाबाद की वेद कुमारी के पास भी चार साल पुराना लाइट वाहनों का डीएल है। इन्हें सिखाने के लिए साथ में अनुभवी ड्राइवर भी रहे। इंस्टीट्यूट के प्रधानाचार्य एसपी सिंह ने बताया कि वह इन महिलाओं और लड़कियों को चयन प्रक्रिया के समय से प्रोत्साहित कर रहे थे।
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तीन ने प्रशिक्षण के दौरान बस चलाकर अपनी दक्षता दिखाई है। बाकी ने भी कार से ट्रेनिंग में अच्छा प्रदर्शन किया। सात माह के इस प्रशिक्षण में 34 दिन क्लासेज और परिसर में प्रैक्टिकल कराया जाएगा। इसके बाद सिर्फ प्रैक्टिकल ही होगा।
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27 के बैच में एक ने छोड़ी ट्रेनिंग
आठ मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर जिन 27 लड़कियों के बैच ने प्रशिक्षण की शुरुआत की थी। उसमें 26 तो प्रशिक्षण ले रही हैं लेकिन फर्रुखाबाद की लड़की नाज फातिमा ने ट्रेनिंग छोड़ दी। उसने अपने न आने का कारण सामाजिक बंदिश बताया है। उसका कहना है कि वह परिवार के लिए एक हुनर सीखना चाहती थी लेकिन चयन के बाद भी मुमकिन नहीं हो सका।