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UP: दलों के सामने अपनों को साधे रखने की चुनौती... अगर-मगर के साथ रोजगार को लेकर सवाल; हवा का रुख भांप रहे लोग
Wed, 08 May 2024 02:38 PM IST
शाहरुख खान
पंकज प्रसून त्रिपाठी, अमर उजाला, कानपुर
पंकज प्रसून त्रिपाठी, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शाहरुख खान
Updated Wed, 08 May 2024 02:38 PM IST
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UP Lok Sabha Election
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अमर उजाला
विस्तार
अपने औद्योगिक उत्कर्ष और देश के प्रदूषित शहरों की पराकाष्ठा वाली श्रेणी में सबसे ऊपर रहने वाले कानपुर ने पहले आम चुनाव से लेकर अब तक बहुत बदलाव देखे हैं। एक तरफ लाल इमली, म्योर मिल, एल्गिन मिल जैसी बड़ी औद्योगिक इकाइयों की जगह अब लघु उद्योगों का दबदबा बढ़ने लगा है, तो कभी 800 एक्यूआई तक जाने वाले इस शहर का दमघोंटू प्रदूषण अब ठंड के मौसम में भी 200-300 के ऊपर नहीं जा पाता है। यह पहला लोकसभा चुनाव है, जब लोग मेट्रो की सवारी कर रहे हैं।आउटर रिंग रोड का निर्माण हो रहा है। पर, ऐसी कई बड़ी समस्याएं हैं, जिनका निदान होना बाकी है। इन सबसे अलग चुनाव की बात करें तो यहां बिछी बिसात से मुकाबला बेहद दिलचस्प है। समीकरणों को बारीकी से समझने के लिए हमें विधानसभावार देखना होगा।
आर्यनगर, सीसामऊ और कैंट में समाजवादी पार्टी के विधायक हैं। पिछले दो विधानसभा चुनावों में यही ट्रेंड रहा है। वहीं, किदवईनगर और गोविंदनगर में भाजपा के विधायक हैं। कानपुर लोकसभा क्षेत्र में 70-75 फीसदी हिंदू, तो 20-25 फीसदी मुस्लिम आबादी है। 2011 की जनगणना के मुताबिक हिंदू आबादी में 11.47 फीसदी दलित हैं।
यहां पूरी तरह से शहरी आबादी है। अगर समीकरणों के इस प्रोजेक्शन को और जूम करें तो सामने आता है कि यहां ब्राह्मण मतदाता निर्णायक रहे हैं। भगवा खेमे ने मौजूदा सांसद सत्यदेव पचौरी का टिकट काटकर ब्राह्मण चेहरे रमेश अवस्थी पर दांव लगाया है। पर, कांग्रेस ने आलोक मिश्रा को मैदान में उतारकर ब्राह्मण वोटों में बंटवारे की पटकथा लिख दी।
बसपा ने ठाकुर चेहरे कुलदीप भदौरिया को मैदान में उतारकर सवर्ण मतदाताओं में सेंध लगाने की पूरी कोशिश की है। ऐसे में समीकरणों की बिसात पर मुस्लिमों, दलितों का रुख बेहद अहम हो गया है। शायद यही वजह है कि पीएम नरेंद्र मोदी के रोड शो में मुस्लिम महिलाओं को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया। महिलाओं ने मोदी सरकार के प्रति आस्था भी व्यक्त की। पर, यह सब वोटों में कितना तब्दील होगा, यह भविष्य का सवाल है।
अगर-मगर के साथ रोजगार को लेकर सवाल
मतदाताओं का मिजाज जानने के लिए हमने सबसे पहले शहर के उत्तरी छोर विकास नगर के सबसे बड़े अपार्टमेंट सिग्नेचर ग्रींस की ओर रुख किया। यहां मिले आयुर्वेद विभाग के पूर्व अधिकारी डॉ. निरंकार गोयल कहते हैं, वैसे तो मोदी का क्रेज बरकरार है, लेकिन इंडी गठबंधन ने जिस तरह से रोजगार और शिक्षा को लेकर सवाल उठाए हैं, उससे लोग विपक्ष की चर्चा भी करने लगे हैं।
मतदाताओं का मिजाज जानने के लिए हमने सबसे पहले शहर के उत्तरी छोर विकास नगर के सबसे बड़े अपार्टमेंट सिग्नेचर ग्रींस की ओर रुख किया। यहां मिले आयुर्वेद विभाग के पूर्व अधिकारी डॉ. निरंकार गोयल कहते हैं, वैसे तो मोदी का क्रेज बरकरार है, लेकिन इंडी गठबंधन ने जिस तरह से रोजगार और शिक्षा को लेकर सवाल उठाए हैं, उससे लोग विपक्ष की चर्चा भी करने लगे हैं।
वहीं, गांधीनगर में रहने वाले प्रसिद्ध नाट्य कलाकार ओमेंद्र कुमार यही बात थोड़ा अलग अंदाज में रखते हैं। वह कहते हैं, जो यह सोचते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का औरा कम हो रहा है, वे गलत हैं। मेरा मानना है कि अभी ऐसा सोचना गलत होगा। पर, युवाओं को लेकर सरकार को सोचना होगा। मुफ्त में राशन बांटना ही तो कोई विकल्प नहीं है, जीवन में स्थायित्व के लिए रोजगार की दिशा में काम करना होगा।
हवा का रुख भांप रहे लोग
मुस्लिमों का रुझान किधर है यह जानने के लिए हमने जाजमऊ का रुख किया। अपने कार्यालय में मिले चमड़ा उत्पादों का कारोबार करने वाले असद के इराकी कहते हैं, इस बार भाजपा और इंडी गठबंधन में कांटे की टक्कर है। मेरा अनुमान है कि जीत-हार का अंतर बहुत कम होगा। कौन जीतेगा और कौन हारेगा, यह अभी एकदम से कह पाना मुश्किल है।
मुस्लिमों का रुझान किधर है यह जानने के लिए हमने जाजमऊ का रुख किया। अपने कार्यालय में मिले चमड़ा उत्पादों का कारोबार करने वाले असद के इराकी कहते हैं, इस बार भाजपा और इंडी गठबंधन में कांटे की टक्कर है। मेरा अनुमान है कि जीत-हार का अंतर बहुत कम होगा। कौन जीतेगा और कौन हारेगा, यह अभी एकदम से कह पाना मुश्किल है।
जाजमऊ से हम रावतपुर की ओर निकले। रास्ते में कार के अंदर सुस्ताते मिले नमक फैक्टरी क्षेत्र के रहने वाले चालक मनोज कुमार गौतम चुनावी माहौल पर सवाल करते ही तपाक से बोल पड़े, भइया अबकी सब खिचड़ी चल रही है। दोनों की चर्चा बराबर है। दलितों का वोट किधर जाएगा, इस सवाल पर बोले- हमारे क्षेत्र के कुछ लोग तो हाथी पर जाएंगे। कुछ रुककर बोले, वैसे हाथी पर जाने का कउनो फायदा नहीं है, लेकिन लोग बिरादरी छोड़ते कहां हैं!
80 फीट रोड स्थित चाय की एक दुकान पर चुनावी चर्चा चल रही थी। हम भी उनमें शामिल हो लिए। बीच से दलील आई-मुस्लिम वोट बैंक को गठबंधन अपना मानकर चल रहा है। उनका मानना है कि मुस्लिम मतदाता विचारधारा के आधार पर भाजपा के साथ नहीं जाएंगे। इसपर अनूप सिंह तपाक से बोल पड़े-सीसामऊ विधानसभा क्षेत्र (सबसे अधिक मुस्लिम मतदाता वाला क्षेत्र) का वोट प्रतिशत निकालकर देख लीजिए, पिछले विधानसभा चुनाव से ही यहां भाजपा का मत प्रतिशत बढ़ रहा है।
चुनाव ज्यों-ज्यों आगे बढ़ रहा है, स्थितियां बदल रही हैं
राजनीति विज्ञान विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर पुष्कर पांडेय का कहना है कि भाजपा-कांग्रेस से ब्राह्मण प्रत्याशी मैदान में हैं, ऐसे में ब्राह्मण किस ओर जाएगा, यह सवाल प्रत्याशियों की घोषणा के कुछ दिनों तक जरूर लोगों के जेहन में थी। शुरुआत में गठबंधन के प्रत्याशी के प्रति ब्राह्मणों का रुझान ज्यादा था। ऐसा इसलिए क्योंकि भाजपा ने इस बार बिल्कुल नए चेहरे को मौका दिया है। पर, जैसे-जैसे चुनाव आगे बढ़ रहा है, स्थितियां काफी बदलती जा रही हैं।
राजनीति विज्ञान विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर पुष्कर पांडेय का कहना है कि भाजपा-कांग्रेस से ब्राह्मण प्रत्याशी मैदान में हैं, ऐसे में ब्राह्मण किस ओर जाएगा, यह सवाल प्रत्याशियों की घोषणा के कुछ दिनों तक जरूर लोगों के जेहन में थी। शुरुआत में गठबंधन के प्रत्याशी के प्रति ब्राह्मणों का रुझान ज्यादा था। ऐसा इसलिए क्योंकि भाजपा ने इस बार बिल्कुल नए चेहरे को मौका दिया है। पर, जैसे-जैसे चुनाव आगे बढ़ रहा है, स्थितियां काफी बदलती जा रही हैं।