{"_id":"5ef71a4c7d971d7e3018988e","slug":"up-board-result-2020-arpit-yadav-got-seventh-place-in-up-board-high-school-examination","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"यूपी बोर्ड: इटावा में किसान परिवार के अर्पित और दीपिका ने प्रदेश के टॉप 10 में बनाई जगह, बताया पढ़ाई का सही तरीका","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
यूपी बोर्ड: इटावा में किसान परिवार के अर्पित और दीपिका ने प्रदेश के टॉप 10 में बनाई जगह, बताया पढ़ाई का सही तरीका
Sat, 27 Jun 2020 03:54 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इटावा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इटावा
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sat, 27 Jun 2020 03:54 PM IST
विज्ञापन
अर्पित और दीपिका ने प्रदेश की हाईस्कूल परीक्षा में सातवां स्थान प्राप्त किया
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रदेश की हाईस्कूल परीक्षा की मेरिट में सातवां स्थान पाने वाला इटावा का छात्र अर्पित यादव आगे चलकर आईएएस अधिकारी बनकर अपने किसान पिता का सपना पूरा करना चाहता है। खेती किसानी करने वाले उनके पिता सत्यवीर सिंह मूल रूप से ग्राम रजीतपुरा ग्राम पंचायत मूज के रहने वाले हैं। अपने बेटों को अच्छी शिक्षा दिलाने के लिए शहर में नई मंडी के पास उन्होंने मकान बनवा रखा है।
सत्यवीर सिंह चाहते हैं उनका बेटा प्रशासनिक सेवा में जाकर देश और समाज की सेवा कर सके। अर्पित ने 600 में से 566 अंक प्राप्त किए हैं। उनका कहना है कि गणित विषय उनका पसंदीदा है। वे गणित को सबसे आसान समझते हैं। यही कारण है कि उनका पढ़ाई का गणित भी कभी गड़बड़ता नहीं है। अपनी माता सुमन देवी जो गृहणी हैं और पिता सत्यवीर सिंह को अपना आदर्श मानने वाले अर्पित का कहना है कि पढ़ाई के लिए यह जरूरी नहीं है कि आप कितने घंटे पढ़ते हैं।
विषय को अच्छी तरह से समझने के साथ आवश्यकता इस बात की है कि आप उत्तर लिखते समय अपनी बात कितने प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करते हैं। परीक्षा में उत्तर पुस्तिका में प्रश्न का सलीके के साथ जवाब देना उन्होंने अपने स्कूल अर्चना मेमोरियल सरस्वती ज्ञान मंदिर इंटर कॉलेज के शिक्षकों से सीखा। घर में तीन चार घंटे से ज्यादा कभी पढ़ाई नहीं की। कोचिंग पर उन्हें ज्यादा विश्वास नहीं है। हां ऑनलाइन पढ़ाई के वे पक्षधर हैं।
विज्ञापन
बोले शिक्षण की यह विधा ठीक है। इसमे अभी बहुत कुछ सुधार की जरूरत है। ऑनलाइन पढ़ाई गरीब बच्चों तक कैसे पहुंचे सरकार को इस बारे में विचार करना चाहिए। जिलाधिकारी जेबी सिंह ने भी फोन करके अर्पित को शुभकामनाएं दी।
विज्ञापन
सत्यवीर सिंह चाहते हैं उनका बेटा प्रशासनिक सेवा में जाकर देश और समाज की सेवा कर सके। अर्पित ने 600 में से 566 अंक प्राप्त किए हैं। उनका कहना है कि गणित विषय उनका पसंदीदा है। वे गणित को सबसे आसान समझते हैं। यही कारण है कि उनका पढ़ाई का गणित भी कभी गड़बड़ता नहीं है। अपनी माता सुमन देवी जो गृहणी हैं और पिता सत्यवीर सिंह को अपना आदर्श मानने वाले अर्पित का कहना है कि पढ़ाई के लिए यह जरूरी नहीं है कि आप कितने घंटे पढ़ते हैं।
विज्ञापन
विषय को अच्छी तरह से समझने के साथ आवश्यकता इस बात की है कि आप उत्तर लिखते समय अपनी बात कितने प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करते हैं। परीक्षा में उत्तर पुस्तिका में प्रश्न का सलीके के साथ जवाब देना उन्होंने अपने स्कूल अर्चना मेमोरियल सरस्वती ज्ञान मंदिर इंटर कॉलेज के शिक्षकों से सीखा। घर में तीन चार घंटे से ज्यादा कभी पढ़ाई नहीं की। कोचिंग पर उन्हें ज्यादा विश्वास नहीं है। हां ऑनलाइन पढ़ाई के वे पक्षधर हैं।
विज्ञापन
बोले शिक्षण की यह विधा ठीक है। इसमे अभी बहुत कुछ सुधार की जरूरत है। ऑनलाइन पढ़ाई गरीब बच्चों तक कैसे पहुंचे सरकार को इस बारे में विचार करना चाहिए। जिलाधिकारी जेबी सिंह ने भी फोन करके अर्पित को शुभकामनाएं दी।
शिक्षिका बनना चाहती हैं टॉपर दीपिका
जसवंतनगर के ग्राम झलोखर निवासी सुनील कुमार यादव की पुत्री दीपिका कुमारी ने 600 मे से 566 अंक हासिल करके हाईस्कूल परीक्षा में प्रदेश की मैरिट में सातवां स्थान प्राप्त किया है। सुनील कुमार गांव के एक साधारण किसान हैं। वे अपनी पुत्री को अच्छी शिक्षा दिलाने के हिमायती हैं। दीपिका का कहना है किे वह पढ़ाई पूरी करके शिक्षक के रूप में समाज को अपनी सेवाएं देना चाहती हैं।
दीपिका का कहना है कि यदि लगन हो और दृढ संकल्प हो तो कुछ पाना मुश्किल नहीं है। मां नारायणी इंटर कॉलेज जसवंतनगर की छात्रा दीपिका का कहना है कि उन्होंने रोजाना 8 घंटे तक पढ़ाई करके परीक्षा की तैयारी की। ऑनलाइन पढ़ाई से इसमें काफी मदद मिली। ऑनलाइन पढाई आज की जरूरत है।
इसको बढ़ावा मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि सही ढंग से की गई तैयारी का लाभ परीक्षा के दौरान मिलता है। हमें विषय वस्तु को विस्तार से और गंभीरता से समझने पर ध्यान देना चाहिए। पढ़ाई के नाम पर सिर्फ रटकर उत्तर देने का समय अब नहीं है। अपने आपको प्रभावी ढंग से प्रस्तुतकरना होता है। अपने माता-पिता को अपनी सफलता का श्रेय देने वाली दीपिका का कहना है कि उनकी इच्छा एक सफल शिक्षक के रूप में अपनी सेवाएं समाज तक पहुंचाना है।
जसवंतनगर के ग्राम झलोखर निवासी सुनील कुमार यादव की पुत्री दीपिका कुमारी ने 600 मे से 566 अंक हासिल करके हाईस्कूल परीक्षा में प्रदेश की मैरिट में सातवां स्थान प्राप्त किया है। सुनील कुमार गांव के एक साधारण किसान हैं। वे अपनी पुत्री को अच्छी शिक्षा दिलाने के हिमायती हैं। दीपिका का कहना है किे वह पढ़ाई पूरी करके शिक्षक के रूप में समाज को अपनी सेवाएं देना चाहती हैं।
दीपिका का कहना है कि यदि लगन हो और दृढ संकल्प हो तो कुछ पाना मुश्किल नहीं है। मां नारायणी इंटर कॉलेज जसवंतनगर की छात्रा दीपिका का कहना है कि उन्होंने रोजाना 8 घंटे तक पढ़ाई करके परीक्षा की तैयारी की। ऑनलाइन पढ़ाई से इसमें काफी मदद मिली। ऑनलाइन पढाई आज की जरूरत है।
इसको बढ़ावा मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि सही ढंग से की गई तैयारी का लाभ परीक्षा के दौरान मिलता है। हमें विषय वस्तु को विस्तार से और गंभीरता से समझने पर ध्यान देना चाहिए। पढ़ाई के नाम पर सिर्फ रटकर उत्तर देने का समय अब नहीं है। अपने आपको प्रभावी ढंग से प्रस्तुतकरना होता है। अपने माता-पिता को अपनी सफलता का श्रेय देने वाली दीपिका का कहना है कि उनकी इच्छा एक सफल शिक्षक के रूप में अपनी सेवाएं समाज तक पहुंचाना है।