Budget 2024: आयकर व्यवस्था को सरल करने की दिशा में सरकार का बड़ा कदम, सीए बोले- छह महीने के अंदर होगी समीक्षा
Kanpur News: नई कर रिजीम में मानक कटौती को बढ़ाया गया है। हालांकि यह उम्मीद के हिसाब से कम है। मानक कटौती को 75000 रुपये किया गया है। पुरानी स्कीम में अभी भी 50000 रुपये की सीमा को बरकरार रखा गया है।
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बजट में सरकार ने आयकर की जटिल प्रक्रिया को सरल करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। छह महीने के भीतर जहां आयकर अधिनियम की समीक्षा की जाएगी। वहीं छापा, जब्ती, सर्वे के केस में अब 10 साल की जगह छह साल का ही निर्धारण किया जाएगा। मतलब विभाग अब केवल छह साल तक के ही दस्तावेज देखेगा।
सिविल लाइंस स्थित सीए संस्थान में बजट पर परिचर्चा के बाद सदस्यों ने बताया कि अगले छह महीने में आयकर अधिनियम 1961 में बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे। इसमें सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट के दिए हुए आदेशों को भी होने वाले बदलाव में शामिल किया जाएगा। इस बदलाव से कर प्रणाली में नई क्रांति आएगी। आईसीएआई की क्षेत्रीय काउंसिल के सदस्य सीए अभिषेक पांडेय ने बताया कि छापा और सर्वे में पहले 50 लाख से अधिक के कर अपवंचना के 10 साल तक के पुराने मामले खोले जा सकते थे, लेकिन इस बजट में यह सीमा छह साल ही कर दी गई है।
सीए अतुल मेहरोत्रा ने बताया कि वेतनभोगियों को छोटा लाभ दिया गया है। नई कर रिजीम में मानक कटौती को बढ़ाया गया है। हालांकि यह उम्मीद के हिसाब से कम है। मानक कटौती को 75000 रुपये किया गया है। पुरानी स्कीम में अभी भी 50000 रुपये की सीमा को बरकरार रखा गया है। ओवरऑल बजट अच्छा है। सीए नवीन भार्गव ने बताया कि विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए कंपनियों पर लगने वाले टैक्स को पांच फीसदी तक घटाया गया है।
शॉर्ट टर्म कैपिटल गैन को 20 प्रतिशत पर ही बरकरार रखा
अब विदेशी कंपनियों पर 40 प्रतिशत की जगह 35 प्रतिशत ही टैक्स लगेगा। इससे विदेशी कंपनियां भारत में ज्यादा निवेश कर सकेंगी। टीडीएस स्तर पर नया प्रावधान किया गया है कि टीडीएस नहीं जमा करना एक अपराध नहीं है। सीए डीसी शुक्ला ने बताया कि सरकार ने बजट में शॉर्ट टर्म कैपिटल गैन को 20 प्रतिशत पर ही बरकरार रखा है।
बजट पूरी तरह से उम्मीद पर खरा नहीं उतरा है
इससे निवेशकों को झटका लगा है। वही लांग टर्म कैपिटल गैन को 15 फीसदी से घटकर 12.5 फीसदी किया गया है। इसको और कम किए जाने की उम्मीद थी। सीए प्रशांत रस्तोगी ने बताया कि बजट पूरी तरह से उम्मीद पर खरा नहीं उतरा है। उम्मीद थी कि कारोबार को एक बूस्टर डोज मिलेगा जो कि नहीं मिल पाया है बल्कि कई नियमों में बदलाव से असमंजस हो गया है।