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KANPUR: सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद पूरी करती हैं मां उजियारी देवी
Sun, 26 Mar 2023 12:42 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sun, 26 Mar 2023 12:42 PM IST
सार
ब्रिटिशकाल में चेचक की बीमारी फैली तो कई लोगों ने मां उजियारी देवी को चढ़ाए जल को लगाया तो उनको बीमारी से राहत मिली। तब से यह मान्यता हो गई की चेचक व त्वचा संबंधित रोग मां पर चढ़ाए जल को लगाने से दूर होते हैं।
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मां उजियारी देवी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
कानपुर में नवाबगंज स्थित मां उजियारी देवी के मंदिर को शक्तिपीठ कहा जाता है। मंदिर के पुजारी आचार्य रजनीश शुक्ला ने बताया कि आजादी के समय लगाए गए नीम व पीपल के पेड़ आज भी मंदिर प्रांगण में लगे हुए हैं। आचार्य रजनीश ने बताया कि यहां पर सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद मां पूरी करती हैं।
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उन्होंने बताया कि आजादी से पहले पीरोड स्थित श्रीनगर में एक सिन्हा परिवार था। उनके मुखिया उजियारीदीन अंग्रेजों के यहां काम करते थे। अंग्रेजी सरकार ने उजियारीदीन के काम से खुश होकर यह जमीन उपहार स्वरूप उन्हें दी थी। इस जमीन पर उन्होंने मां शीतला देवी का मंदिर बनाया।
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आचार्य रजनीश शुक्ला
- फोटो : अमर उजाला
जब ब्रिटिशकाल में चेचक की बीमारी फैली तो कई लोगों ने मां को चढ़ाए जल को लगाया तो उनको बीमारी से राहत मिली। तब से यह मान्यता हो गई की चेचक व त्वचा संबंधित रोग मां पर चढ़ाए जल को लगाने से दूर होते हैं। उजियारी माता के तीन मंदिर कानपुर में हैं। मुख्य स्थान नवाबगंज में स्थित है, दूसरा नेहरू नगर में और तीसरा ख्योरा में है। 1857 के स्वतंत्रता आंदोलन की क्रान्ति में क्रांतिकारियों ने अपनी गतिविधियों का संचालन ख्योरा मन्दिर से बिठूर को जोड़ कर किया था।मंदिर में सुरक्षित और पर्याप्त स्थान होने से क्रांतिकारी यहीं पर रहते थे।