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जिला अस्पताल में एक बेड पर दो मरीज, बेंच व फर्श पर लिटाकर किया इलाज
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जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में बेंच व एक बेड़ पर लेटे दो मरीज। (संवाद)
- फोटो : AKBARPUR
कानपुर देहात। जिला चिकित्सालय की इमरजेंसी से लेकर वार्ड तक मरीजों से भरे पड़े हैं। आलम यह है कि अस्पताल की क्षमता से अधिक मरीज पहुंचने पर कहीं एक बेड पर दो-दो मरीज तो कहीं बेंच या फर्श पर ही लिटाकर लोगों का इलाज करना पड़ रहा है। सबसे खराब स्थित इमरजेंसी की है। जहां रविवार को बुखार के दो-दो मरीजों को एक बेड पर भर्ती किया गया।
जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। यहां पर बेडों की स्वीकृत क्षमता 70 है। इसमें 16 बेड इमरजेेंसी, 38 बेड जनरल वार्ड, 10 बेड डेंगू व बुखार सहित आठ बेड अन्य मरीजों के लिए आरक्षित हैं। बरसात के बाद गांव-गांव फैले डेंगू व बुखार सहित अन्य प्रकार के रोगियों की संख्या बढ़ गई है। जिसके चलते सरकारी अस्पताल करीब फुल चल रहे हैं।
वहीं ग्रामीण क्षेत्रों के अस्पताल से रेफर होकर आने वाले मरीजों के कारण जिला अस्पताल में दबाव बढ़ रहा है। दुर्घटना मेें घायलों को भी चिकित्सालय में भर्ती किया जाता है। ऐसे में इमरजेंसी से लेकर जनरल वार्ड मरीजों से खचाखच भरे पड़े हैं।
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रविवार को इमरजेंसी में हालत यह रही कि बुखार के दो-दो मरीजों को एक-एक बेड पर लिटाया गया। जब बेड नहीं बचे तो बेंचों पर ही मरीज को भर्ती कर ग्लूकोज की बोतल टांग दी गई। वहीं अमराहट क्षेत्र के गोहानी बांगर निवासी बुखार व उल्टी पीड़ित गणेश (19) को बेड व बेंच नहीं मिली तो वह इमरजेंसी के बाहर फर्श पर ही लेट गया।
जिला अस्पताल में 70 बेड स्वीकृत हैं। जिनमें मरीजों को भर्ती कर इलाज किया जा रहा है। मरीजों की संख्या बढ़ने पर उन्हें भर्ती करने से भी मना नहीं किया जाता सकता है। अस्पताल मेें बेड बढ़ाने जाने का निर्णय शासन से लिया जाता है। - डॉ. आरए मिर्जा, प्रभारी सीएमएस, जिला अस्पताल
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जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। यहां पर बेडों की स्वीकृत क्षमता 70 है। इसमें 16 बेड इमरजेेंसी, 38 बेड जनरल वार्ड, 10 बेड डेंगू व बुखार सहित आठ बेड अन्य मरीजों के लिए आरक्षित हैं। बरसात के बाद गांव-गांव फैले डेंगू व बुखार सहित अन्य प्रकार के रोगियों की संख्या बढ़ गई है। जिसके चलते सरकारी अस्पताल करीब फुल चल रहे हैं।
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वहीं ग्रामीण क्षेत्रों के अस्पताल से रेफर होकर आने वाले मरीजों के कारण जिला अस्पताल में दबाव बढ़ रहा है। दुर्घटना मेें घायलों को भी चिकित्सालय में भर्ती किया जाता है। ऐसे में इमरजेंसी से लेकर जनरल वार्ड मरीजों से खचाखच भरे पड़े हैं।
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रविवार को इमरजेंसी में हालत यह रही कि बुखार के दो-दो मरीजों को एक-एक बेड पर लिटाया गया। जब बेड नहीं बचे तो बेंचों पर ही मरीज को भर्ती कर ग्लूकोज की बोतल टांग दी गई। वहीं अमराहट क्षेत्र के गोहानी बांगर निवासी बुखार व उल्टी पीड़ित गणेश (19) को बेड व बेंच नहीं मिली तो वह इमरजेंसी के बाहर फर्श पर ही लेट गया।
जिला अस्पताल में 70 बेड स्वीकृत हैं। जिनमें मरीजों को भर्ती कर इलाज किया जा रहा है। मरीजों की संख्या बढ़ने पर उन्हें भर्ती करने से भी मना नहीं किया जाता सकता है। अस्पताल मेें बेड बढ़ाने जाने का निर्णय शासन से लिया जाता है। - डॉ. आरए मिर्जा, प्रभारी सीएमएस, जिला अस्पताल