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Kanpur News: आईआईटी के दो प्रोफेसर बने आईएनएई फेलो
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कानपुर। आईआईटी कानपुर के दो प्रोफेसर प्रो. निलेश गुराव और प्रो. निश्चल कुमार वर्मा को देश की प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग फेलोशिप मिली है। उन्हें यह उपलब्धि मिश्र धातुओं से रक्षा और एयरोस्पेस तकनीक को नई मजबूती देने से लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिये बिजली ग्रिड को स्मार्ट बनाने तक के शोध के लिए दी गई।
इंडियन नेशनल एकेडमी ऑफ इंजीनियरिंग (आईएनएई) ने सामग्री विज्ञान एवं इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. निलेश गुराव और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. निश्चल कुमार वर्मा को फेलो के लिए चुना है। दोनों की फेलोशिप एक नवंबर से प्रभावी होगी।
प्रो. निश्चल कुमार वर्मा का शोध एआई, मशीन लर्निंग, कंप्यूटर विजन और कंडीशन बेस्ड हेल्थ मॉनिटरिंग से जुड़ा है। उन्होंने ऐसी तकनीकों पर काम किया है, जिनसे जटिल औद्योगिक मशीनों में खराबी आने से पहले उसके संकेतों का पता लगाया जा सकता है। स्मार्ट ग्रिड तकनीक के क्षेत्र में भी उनका शोध बिजली व्यवस्था को अधिक कुशल और विश्वसनीय बनाने से जुड़ा है। वहीं प्रो. निलेश गुराव उन्नत धातुकर्म और एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में शोध कर रहे हैं। उनके काम में थ्री-डी मेटल प्रिंटिंग के साथ एक्स-रे के दौरान विभिन्न पदार्थों के यांत्रिक व्यवहार का अध्ययन शामिल है। इन तकनीकों का इस्तेमाल रक्षा, एयरोस्पेस और ऑटोमोटिव उद्योगों में हो रहा है।
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इंडियन नेशनल एकेडमी ऑफ इंजीनियरिंग (आईएनएई) ने सामग्री विज्ञान एवं इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. निलेश गुराव और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. निश्चल कुमार वर्मा को फेलो के लिए चुना है। दोनों की फेलोशिप एक नवंबर से प्रभावी होगी।
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प्रो. निश्चल कुमार वर्मा का शोध एआई, मशीन लर्निंग, कंप्यूटर विजन और कंडीशन बेस्ड हेल्थ मॉनिटरिंग से जुड़ा है। उन्होंने ऐसी तकनीकों पर काम किया है, जिनसे जटिल औद्योगिक मशीनों में खराबी आने से पहले उसके संकेतों का पता लगाया जा सकता है। स्मार्ट ग्रिड तकनीक के क्षेत्र में भी उनका शोध बिजली व्यवस्था को अधिक कुशल और विश्वसनीय बनाने से जुड़ा है। वहीं प्रो. निलेश गुराव उन्नत धातुकर्म और एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में शोध कर रहे हैं। उनके काम में थ्री-डी मेटल प्रिंटिंग के साथ एक्स-रे के दौरान विभिन्न पदार्थों के यांत्रिक व्यवहार का अध्ययन शामिल है। इन तकनीकों का इस्तेमाल रक्षा, एयरोस्पेस और ऑटोमोटिव उद्योगों में हो रहा है।
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