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दुर्घटना में दो नौनिहालों की मौत

Tue, 09 Feb 2016 02:07 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, कानपुर
अमर उजाला ब्यूरो, कानपुर Updated Tue, 09 Feb 2016 02:07 AM IST
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Two friend killed in accident
भौंती-रूमा हाइवे पर पनकी गैस प्लांट के सामने सोमवार दोपहर तेज रफ्तार कार की टक्कर से बाइक सवार दो युवा दोस्तों की मौत हो गई, जबकि उछलकर दूर गिरने से एक दोस्त बाल-बाल बच गया। तीनों युवक एक ही बाइक पर थे और किसी ने हेलमेट नहीं पहन रखा था। एक युवक का नेवी (ए ग्रेड) में चयन हो चुका था।
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18 फरवरी को उसे उड़ीसा में ज्वाइन करना था। नौबस्ता संजय गांधी नगर निवासी रमेशचंद्र दुबे कस्टम विभाग में हेड कांस्टेबल हैं। छोटा बेटा विकास उर्फ अंकित (19) एसएस डिग्री कॉलेज मेहरबान सिंह का पुरवा में बीएससी फाइनल ईयर का छात्र था। अंकित, दामोदर नगर निवासी आशीष द्विवेदी (20) और नौबस्ता निवासी नागेंद्र के बेटे अनुरंजन (21) तीनों अच्छे दोस्त थे और साथ-साथ कोचिंग पढ़ते थे।
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अनुरंजन ने बताया कि सोमवार दोपहर तीनों दोस्त एक ही बाइक से नौबस्ता से भौंती की तरफ जा रहे थे। पनकी गैस प्लांट के सामने पीछे से एक कार ने बाइक में टक्कर मार दी। वह तो उछल कर दूर गिरा जाकर लेकिन उसके दोस्त बाइक के साथ ही काफी दूर तक घिसटते चले गए और डिवाइडर से जा टकराए। अनुरंजन ने रोते-रोते बताया कि हाइवे से नीचे उतरने का कोई रास्ता नहीं था।
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दोनों दोस्त लहूलुहान हालत में तड़प रहे थे और वह आने जाने वाली गाड़ियों को इशारा कर मदद की गुहार लगाता रहा लेकिन कोई रुका नहीं। अनुरंजन कहता है कि अगर उसके दोस्तों को समय पर अस्पताल पहुंचा दिया जाता तो शायद बच जाते। काफी देर बाद पुलिस आई। सूचना पर अंकित की मां विनीता, भाई अतुल, पिता रमेशचंद्र पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे और शव देखकर गश खाकर गिर पड़े।

आशीष की मां मनीषा, पिता रविंद्र का भी बुरा हाल था। एक साथ पढ़ाई और मस्ती करने वाले दोस्तों अंकित और आशीष की अपने सामने मौत देखकर अनुरंजन सदमे में है। वह उस भयावह मंजर को याद करके बिलख पड़ता है। बार-बार बेहोश हो जाता है।

लाडलों की मौत से बिखरीं खुशियां
पनकी हाईवे पर हादसे का शिकार हुए विकास उर्फ अंकित और आशीष की मौत की खबर सुनते ही दोनों परिवारों की खुशियां पल भर में बिखर गई। एक झटके में सब कुछ उजड़ गया। अंकित दो भाई और तीन बहनों में सबसे छोटा था। बड़ा भाई अतुल एसएसबी में कांस्टेबल और पिता कस्टम विभाग में सिपाही है।

छोटा होने के चलते परिवार में अंकित सभी का दुलारा था। भाई ने बीएससी अच्छे नंबरों से पास होने पर मनचाहा गिफ्ट देने का वादा किया था। पिता ने भी छोटे बेटे को पढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। जिसका नतीजा रहा कि वह बीएससी फाइनल ईयर पास होने से पहले ही नेवी में अधिकारी बन गया।

लाडले की नौकरी लगने से तो परिवार की खुशियां दो गुनी हो गई थीं। परिवार की खुशियों को ना जाने किसकी नजर लग गई कि नौकरी ज्वाइनिंग से पहले ही एक झटके में सब कुछ बिखर गया। अंकित की मां रोते-रोते पोस्टमार्टम हाउस पर बेहोश हो गई तो पिता भी बेटे का शव देख चिपटकर रोने लगे। छोटे भाई की मौत से दुखी अतुल रोते हुए बोला हे भगवान ये क्या किया। ऐसा करना ही था तो भाई की जगह मुझे ही उठा लेता।

वहीं बर्रा दामोदर नगर निवासी रविन्द्र ड्राइवर हैं। घर में पत्नी मनीषा के साथ दो बेटे आशीष दिवेदी और अमन था। ड्राइवर होने के बाद भी दोनों बच्चों को अच्छे स्कूल में पढ़ाकर बेहतर परवरिश दी। अशीष बचपन से ही पढ़ने में बहुत हो था। हाईस्कूल से लेकर बीएससी तक थ्रो आउट फर्स्ट क्लास पास किया।


पिता को बड़े बेटे से उम्मीद थी कि पढ़ाई पूरी होते ही जल्द बड़ा बेटा सहारा बनेगा। मां पोस्टमार्टम हाउस में बस यही कहकर रोती रही कि मेरे बाबू को कुछ नहीं हो सकता। एक बार मेरे बाबू से मिला दो बस। दोनों परिवारों का विलाप देख वहां मौजूद लोगों का भी कलेजा कांप उठा। दोनों के कई दोस्त भी पहुंचे जो सिसकियां भरते दिखाई दिए।
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