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बिजली गिरने से दो की मौत
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Thu, 07 Jun 2018 07:31 PM IST
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आकाशीय बिजली से यूपी में 2 की मौत
यूपी के दो जिलों में गुरुवार सुबह आकाशीय बिजली कहर बनकर गिरी। इटावा और कन्नौज के के अलग-अलग इलाकों में बिजली गिरने से 2 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई।
इटावा के इकदिल थानाक्षेत्र के ग्राम अकबरपुर में 23 वर्षीय शिवम दीक्षित पुत्र सुरेश की आकाशीय बिजली की चपेट में आने से मौत। आज सुबह तेज बारिश के साथ गिरी आकाशीय बिजली से यह हादसा हुआ। वहीं थाना चकरनगर के ग्राम सगरा में आकाशीय बिजली की वजह से राष्ट्रीय पक्षी मोर की भी मौत हो गई। कई अन्य पक्षियों के शव भी खेतों और बागों में पड़े दिखाई दिए हैं। दूसरी ओर कन्नौज सकरावा में आकाशी बिजली गिरने से अजय (28) की मौत हो गई। गुरुवार की सुबह अजय पुत्र महेंद्र निवासी सकरावा अपनी छत पर सो रहा था, तभी हादसा हुआ। परिजन अस्पताल ले गए जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया।
Act of God
एडवोकेट शिवाकंत दीक्षित ने बताया कि मनुष्य के नियंत्रण के बाहर एक प्राकृतिक खतरा है। जैसे कि भूकंप, आकाशीय बिजली या सुनामी। ऐसी घटना जिसके लिए कोई भी व्यक्ति जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है। एक्ट ऑफ गॉड-दैवीय आपदा कहलाता है।
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बीते मानसून के दौरान एक हफ्ते में ही आसमानी बिजली गिरने से देशभर में120 लोग मारे गए और 57 लोग घायल हुए। इनमें सबसे अधिक बिहार में 57, उत्तर प्रदेश में 41, मध्य प्रदेश में 12 और झारखंड में 10 लोग मरे। मुसीबत यह है कि आम इंसान के साथ सरकारी अधिकारियों का एक बड़ा तबका अब भी इसे गंभीरता से नहीं लेता है और इसकी रोकथाम के लिए कुछ भी नहीं करता। आकाशीय बिजली से पीड़ितों में से कुछ को ही अधिकृत तौर पर सरकारी मदद मिल पाती है। क्योंकि इस तरह के हादसे को राष्ट्रीय आपदा राहत निधि के अंतर्गत शामिल नहीं किया गया है। भारत में बिजली गिरना शायद अकेली ऐसी प्राकृतिक आपदा है जिसपर आम लोगों से सरकारी अधिकारियों तक यही रवैया रहता है कि इस आपदा से बचाव के लिए कुछ नहीं किया जा सकता।
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इटावा के इकदिल थानाक्षेत्र के ग्राम अकबरपुर में 23 वर्षीय शिवम दीक्षित पुत्र सुरेश की आकाशीय बिजली की चपेट में आने से मौत। आज सुबह तेज बारिश के साथ गिरी आकाशीय बिजली से यह हादसा हुआ। वहीं थाना चकरनगर के ग्राम सगरा में आकाशीय बिजली की वजह से राष्ट्रीय पक्षी मोर की भी मौत हो गई। कई अन्य पक्षियों के शव भी खेतों और बागों में पड़े दिखाई दिए हैं। दूसरी ओर कन्नौज सकरावा में आकाशी बिजली गिरने से अजय (28) की मौत हो गई। गुरुवार की सुबह अजय पुत्र महेंद्र निवासी सकरावा अपनी छत पर सो रहा था, तभी हादसा हुआ। परिजन अस्पताल ले गए जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया।
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एडवोकेट शिवाकंत दीक्षित ने बताया कि मनुष्य के नियंत्रण के बाहर एक प्राकृतिक खतरा है। जैसे कि भूकंप, आकाशीय बिजली या सुनामी। ऐसी घटना जिसके लिए कोई भी व्यक्ति जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है। एक्ट ऑफ गॉड-दैवीय आपदा कहलाता है।
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बीते मानसून के दौरान एक हफ्ते में ही आसमानी बिजली गिरने से देशभर में120 लोग मारे गए और 57 लोग घायल हुए। इनमें सबसे अधिक बिहार में 57, उत्तर प्रदेश में 41, मध्य प्रदेश में 12 और झारखंड में 10 लोग मरे। मुसीबत यह है कि आम इंसान के साथ सरकारी अधिकारियों का एक बड़ा तबका अब भी इसे गंभीरता से नहीं लेता है और इसकी रोकथाम के लिए कुछ भी नहीं करता। आकाशीय बिजली से पीड़ितों में से कुछ को ही अधिकृत तौर पर सरकारी मदद मिल पाती है। क्योंकि इस तरह के हादसे को राष्ट्रीय आपदा राहत निधि के अंतर्गत शामिल नहीं किया गया है। भारत में बिजली गिरना शायद अकेली ऐसी प्राकृतिक आपदा है जिसपर आम लोगों से सरकारी अधिकारियों तक यही रवैया रहता है कि इस आपदा से बचाव के लिए कुछ नहीं किया जा सकता।