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UP: अपहरण व हत्या के 20 साल पुराने मुकदमे में दो मौसेरे भाइयों को उम्रकैद, भतीजे की हत्या में ठहराए गए दोषी
Tue, 11 Aug 2026 10:27 PM IST
Shikha Pandey
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: Shikha Pandey
Updated Tue, 11 Aug 2026 10:27 PM IST
सार
एक अन्य आरोपी की मौत हो चुकी है व चौथे आरोपी की फाइल अलग चल रही है। तीन माह बाद खुलासा हुआ था।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
भतीजे का अपहरण कर हत्या करने के दोषी दो मौसेरे भाइयों भारतगंज निवासी जावेद और बेलीगांव निवासी सोनू को अपर जिला जज 15 मुकेश कुमार सिंह ने उम्रकैद और एक-एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। 20 साल पुराने मुकदमे में एक आरोपी मुजीब की मुकदमे की सुनवाई के दौरान मौत हो चुकी है जबकि चौथे आरोपी रिंकू की फाइल अलग चल रही है।
कर्नलगंज निवासी साबिर अली का 17 वर्षीय बेटा मो. आमिर 12 दिसंबर 2005 की शाम को घर से निकला था फिर नहीं लौटा। घटना के समय साबिर अपनी पत्नी के साथ मिर्जापुर में एक शादी में गए हुए थे जहां उन्हें फोन पर सूचना मिली तो वह कानपुर लौटे और कर्नलगंज थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई थी। शक होने पर साबिर ने अपने मामू मुजीब अहमद, उनके बेटे जावेद, जावेद के मौसेरे भाई सोनू और जावेद के दोस्त रिंकू उर्फ सुनील कुमार गौड़ के खिलाफ पुलिस में शिकायत की।
साढ़े तीन महीने बाद दो अप्रैल 2006 को पुलिस ने चारों को गिरफ्तार कर पूछताछ की तो उन्होंने आमिर की हत्या कर शव को इलाहाबाद में एक खेत में फेंकने की बात कबूल ली थी। पुलिस ने खेत के पास से आलाकत्ल भी बरामद कर लिया था। एडीजीसी ने बताया कि अभियोजन की ओर से मृतक के पिता समेत 11 गवाह कोर्ट में पेश किए गए। सबूतों और गवाहों के आधार पर कोर्ट ने इलाहाबाद के भारतगंज निवासी जावेद और बेलीगांव निवासी सोनू को अपहरण और हत्या का दोषी मानकर सजा सुनाई। मुजीब अहमद की मुकदमे की सुनवाई के दौरान मौत हो चुकी है जबकि रिंकू की फाइल अलग चल रही है।
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कर्नलगंज निवासी साबिर अली का 17 वर्षीय बेटा मो. आमिर 12 दिसंबर 2005 की शाम को घर से निकला था फिर नहीं लौटा। घटना के समय साबिर अपनी पत्नी के साथ मिर्जापुर में एक शादी में गए हुए थे जहां उन्हें फोन पर सूचना मिली तो वह कानपुर लौटे और कर्नलगंज थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई थी। शक होने पर साबिर ने अपने मामू मुजीब अहमद, उनके बेटे जावेद, जावेद के मौसेरे भाई सोनू और जावेद के दोस्त रिंकू उर्फ सुनील कुमार गौड़ के खिलाफ पुलिस में शिकायत की।
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साढ़े तीन महीने बाद दो अप्रैल 2006 को पुलिस ने चारों को गिरफ्तार कर पूछताछ की तो उन्होंने आमिर की हत्या कर शव को इलाहाबाद में एक खेत में फेंकने की बात कबूल ली थी। पुलिस ने खेत के पास से आलाकत्ल भी बरामद कर लिया था। एडीजीसी ने बताया कि अभियोजन की ओर से मृतक के पिता समेत 11 गवाह कोर्ट में पेश किए गए। सबूतों और गवाहों के आधार पर कोर्ट ने इलाहाबाद के भारतगंज निवासी जावेद और बेलीगांव निवासी सोनू को अपहरण और हत्या का दोषी मानकर सजा सुनाई। मुजीब अहमद की मुकदमे की सुनवाई के दौरान मौत हो चुकी है जबकि रिंकू की फाइल अलग चल रही है।
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नौकरी से निकालने का लिया था बदला
साबिर अली ने गवाही में बताया था कि घटना के दो-तीन साल पहले अपनी मां व मामू के कहने पर उन्होंने जावेद को अपनी शीतल पेय की एजेंसी में नौकरी पर रख लिया था। साबिर बीमार हुए तो जावेद ही कंपनी का सारा काम देखता और उनके घर पर भाई की तरह रहता था। इस बीच कंपनी में एक लाख रुपये की चोरी हुई जिसमें जावेद का नाम सामने आया था। उसकी और भी गलत हरकतों की जानकारी मिलने पर उन्होंने जावेद को नौकरी से निकाल दिया था। इसी बात की खुन्नस निकालने के लिए जावेद ने बेटे आमिर की हत्या का षड्यंत्र रचा था।
साबिर अली ने गवाही में बताया था कि घटना के दो-तीन साल पहले अपनी मां व मामू के कहने पर उन्होंने जावेद को अपनी शीतल पेय की एजेंसी में नौकरी पर रख लिया था। साबिर बीमार हुए तो जावेद ही कंपनी का सारा काम देखता और उनके घर पर भाई की तरह रहता था। इस बीच कंपनी में एक लाख रुपये की चोरी हुई जिसमें जावेद का नाम सामने आया था। उसकी और भी गलत हरकतों की जानकारी मिलने पर उन्होंने जावेद को नौकरी से निकाल दिया था। इसी बात की खुन्नस निकालने के लिए जावेद ने बेटे आमिर की हत्या का षड्यंत्र रचा था।
लावारिस में हुआ था अंतिम संस्कार
हत्या के बाद हत्यारों ने आमिर का शव इलाहाबाद रोड पर स्थित ग्राम कटोघन में एक खेत में फेंक दिया था। ग्रामीणों ने लावारिस लाश मिलने की सूचना पुलिस को दी थी। पुलिस ने भी पोस्टमार्टम कराने के बाद शव का लावारिस में अंतिम संस्कार करा दिया था। तीन माह बाद कपड़ों से परिजन ने उसकी पहचान की थी।
हत्या के बाद हत्यारों ने आमिर का शव इलाहाबाद रोड पर स्थित ग्राम कटोघन में एक खेत में फेंक दिया था। ग्रामीणों ने लावारिस लाश मिलने की सूचना पुलिस को दी थी। पुलिस ने भी पोस्टमार्टम कराने के बाद शव का लावारिस में अंतिम संस्कार करा दिया था। तीन माह बाद कपड़ों से परिजन ने उसकी पहचान की थी।