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काली नदी पार करके शहतूत खाने मैनपुरी जा रहे थेे पांच बच्चे, दो बच्चे डूबे तीन को बचाया
Fri, 05 Apr 2019 12:32 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Fri, 05 Apr 2019 12:32 AM IST
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नदी (फाइल फोटो)
- फोटो : amar ujala
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फर्रुखाबाद के मोहम्मदाबाद में काली नदी किनारे बृहस्पतिवार को बकरी चरा रहे बच्चे नदी पार कर पड़ोसी जनपद मैनपुरी की सीमा में शहतूत खाने जा रहे थे। इसी दौरान पांच बच्चे डूबने लगे। चीख पुकार सुनकर पास ही खेत में काम कर रहे तीन युवकों ने तीन बच्चों को बचा लिया।
जबकि एक छात्रा व एक छात्र का पता नहीं चला। सूचना पर पहुंचे सीओ राजवीर सिंह ने गोताखोरों को नदी में उतारा है। रात तक ढूंढने का प्रयास चल रहा था। मोहम्मदाबाद कोतवाली क्षेत्र के गांव कटिन्ना मानिकपुर निवासी नीलम (12) पुत्री सिपाही राम गांव के ही विद्यालय में आठवीं की छात्रा है। महावीर (11) पुत्र रामशरण जाटव सातवीं में पढ़ता है।
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जबकि एक छात्रा व एक छात्र का पता नहीं चला। सूचना पर पहुंचे सीओ राजवीर सिंह ने गोताखोरों को नदी में उतारा है। रात तक ढूंढने का प्रयास चल रहा था। मोहम्मदाबाद कोतवाली क्षेत्र के गांव कटिन्ना मानिकपुर निवासी नीलम (12) पुत्री सिपाही राम गांव के ही विद्यालय में आठवीं की छात्रा है। महावीर (11) पुत्र रामशरण जाटव सातवीं में पढ़ता है।
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नदी नहाने के दौरान बनाई शहतूत खाने की योजना
वह लोग गांव के अन्य बच्चों अजय कुमार पुत्र मोरपाल, नंदनी पुत्री महेश चंद्र और अरुण कुमार पुत्र ननकू लाल के साथ गांव से करीब एक किलोमीटर दूर काली नदी के किनारे बकरी चराने गए थे। इसी दौरान सभी नदी में उतर कर नहाने लगे। पांचों ने नदी के दूसरी ओर मैनपुरी जनपद के बेवर थाना क्षेत्र के गांव नसीरपुर मटेना में लगे शहतूत के पेड़ से शहतूत खाने की योजना बना ली।
इसके लिए पांचों एक दूसरे का हाथ पकड़कर नदी पार करने लगे। नदी के बीच में पहुंचने पर ज्यादा पानी में डूबने लगे। इस पर बच्चों में चीख पुकार मच गई। आवाज सुनकर खेतों में काम कर रहे गांव के ही रजनेश, गुड्डू और अमित कुमार दौड़ कर मौके पर पहुंचे। उन्होंने डूब रहे नंदनी, अजय और अरुण को बचा लिया। लेकिन महावीर व नीलम का कोई पता नहीं चला।
इसके लिए पांचों एक दूसरे का हाथ पकड़कर नदी पार करने लगे। नदी के बीच में पहुंचने पर ज्यादा पानी में डूबने लगे। इस पर बच्चों में चीख पुकार मच गई। आवाज सुनकर खेतों में काम कर रहे गांव के ही रजनेश, गुड्डू और अमित कुमार दौड़ कर मौके पर पहुंचे। उन्होंने डूब रहे नंदनी, अजय और अरुण को बचा लिया। लेकिन महावीर व नीलम का कोई पता नहीं चला।
पांच बच्चों में से गोताखोरों ने तीन को बचाया
इसकी सूचना ग्रामीणों को दी गई। जानकारी पर चौकी इंचार्ज वीरेंद्र सिंह जादौन मौके पर पहुंचे। उन्होंने मामले की सूचना उच्चाधिकारियों को दी। सीओ राजवीर सिंह व कोतवाल फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे। ग्रामीण काफी देर दोनों को नदी में तलाश करते रहे।
लेकिन कोई पता नहीं चला। देर शाम सीओ ने गोताखोरों को बुला कर नदी में उतारा है। दोनों की तलाश की जा रही है। नीलम के घर में पिता सिपाहीराम, मां संतोषी देवी भाई सुमित और पांच बहने हैं। वहीं, महावीर के पिता रामशरण भी मजदूरी करते हैं। उनके घर में मां सोनकली के अलावा चार बहने हैं।
लेकिन कोई पता नहीं चला। देर शाम सीओ ने गोताखोरों को बुला कर नदी में उतारा है। दोनों की तलाश की जा रही है। नीलम के घर में पिता सिपाहीराम, मां संतोषी देवी भाई सुमित और पांच बहने हैं। वहीं, महावीर के पिता रामशरण भी मजदूरी करते हैं। उनके घर में मां सोनकली के अलावा चार बहने हैं।