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Kanpur News: कागजों पर मूंगफली बेचकर 2.62 करोड़ की टैक्स चोरी करने वाले दो गिरफ्तार

Mon, 09 Feb 2026 01:57 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 09 Feb 2026 01:57 AM IST
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Two arrested for evading tax of Rs 2.62 crore by selling peanuts on paper
कानपुर। क्राइम ब्रांच ने फर्जी जीएसटी फर्म बनाकर 2.62 करोड़ की टैक्स चोरी करने वाले दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पकड़े गए आरोपियों में बर्रा निवासी कमल गौरव साहू और मसवानपुर के एतिशाम हुसैन हैं। दोनों आरोपियों ने बोगस फर्मों के माध्यम से बिना किसी
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वास्तविक माल की खरीद-फरोख्त के इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का लाभ लेकर सरकारी राजस्व को करोड़ों रुपये का चूना लगाया था। डीसीपी क्राइम श्रवण कुमार सिंह ने बताया कि सात दिसंबर 2022 को छत्तीसगढ़ के राज्य कर आयुक्त ने प्रदेश के कर आयुक्त को पत्र भेज कर जानकारी दी थी कि मेहरबान सिंह का पुरवा के एक पते पर दर्ज अपूर्वा ट्रेडिंग कंपनी ने वर्ष 2019-20 के दौरान 2.66 करोड़ की टैक्स चोरी की है। जांच में पाया गया है कि उस पते पर कोई व्यवसायिक गतिविधि नहीं हो रही है। इसके बाद दो जुलाई 2025 को राज्यकर अधिकारी रवि प्रकाश ने कल्याणपुर थाने में कर चोरी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। मामले की विवेचना क्राइम ब्रांच कर रही थी। जांच में पता चला कि आरोपियों ने 30 मार्च 2016 को कूटरचित दस्तावेजों से गल्ला बिक्री के लिए कंपनी का पंजीकरण कराया है। फर्म के मालिक के जिस मोबाइल नंबर का दस्तावेजों में जिक्र था वह भी बंद मिला।
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जांच में सामने आया कि कमल और एतिशाम कागजों पर महाराष्ट्र की राव एग्रो एजेंसी और जगदेव एग्रो एजेंसी व छत्तीसगढ़ की नीदा ट्रेडर्स को मूंगफली की बिक्री दिखा रहे थे। आरोपी इन फर्म के ई-वे बिल भी तैयार करते थे। हालांकि, कहीं कोई माल मंगाया या बेचा नहीं जाता था। इस पूरे मामले का मास्टर मांइड झांसी निवासी राकेश साहू है। पुलिस को उसकी तलाश है। पुलिस को पकड़े गए आरोपियों के पास से बैंक कार्ड, एंड्रॉइड व आई-फोन मोबाइल, जीएसटी रजिस्ट्रेशन, ई-वे बिल, फर्जी इनवॉइस और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद हुए हैं।
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ऐसे करते थे फर्जीवाड़ा
डीसीपी के अनुसार पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि कमल स्नातक है जबकि एतिशाम हुसैन एक सीए के यहां नौकरी करता है। एतिशाम को बिल बनाने और जीएसटी दाखिल करने पर 500 रुपये मिलते थे जबकि झांसी निवासी मास्टरमाइंड राकेश कमल को फर्म लाने पर 50 हजार रुपये देता था। आरोपियों ने बताया कि वह फर्जी पैन कार्ड, आधार कार्ड, बिजली बिल और किरायानामा जैसे दस्तावेज तैयार करते थे। इसके बाद उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ राज्यों में फर्जी जीएसटी फर्मों का पंजीकरण कराते थे। वास्तविक माल की आपूर्ति किए बिना केवल कागजों पर लेन-देन दिखाकर टैक्स इनवॉइस और ई-वे बिल बनाए जाते थे जिससे आईटीसी का अवैध लाभ लिया जाता था।
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