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नाबालिग से गैंगरेप में दो अभियुक्तों को बीस साल का कारावास, 25-25 हजार अर्थदंड भी लगाया
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कानपुर देहात। कोतवाली क्षेत्र के उमरन के पास झोपड़ी में रहने वाले मजदूर की आठ वर्षीय बेटी से छह साल पहले दो युवकों ने दुष्कर्म किया था। मामले में दोनों अभियुक्तों को पाक्सो एक्ट कोर्ट ने बुधवार को बीस साल का कारावास व 25 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।
हाईवे किनारे झोपड़ी बनाकर रहने वाला एक मजदूर नौ जुलाई 2015 को कानपुर मजदूरी करने गया था। वहीं घर में आटा खत्म होने पर उसकी पत्नी ने आठ वर्षीय बेटी को चक्की भेजा था। रास्ते में बिलसरायां के अजय उर्फ परशुराम व बाबूराम ने बालिका से दुष्कर्म किया।
इसकी जानकारी घर में देने पर जान से मारने की धमकी दी। दुष्कर्म से बच्ची की हालत बिगड़ गई थी। आरोपी उसे छोड़कर फरार हो गए थे। जानकारी पर उसे उपचार के लिए भेजा गया। सामान्य होने पर बच्ची ने घटना के बाबत मां को बताया तो मामले में दोनों आरोपियों पर सामूहिक दुष्कर्म की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी।
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इसकी सुनवाई अपर जिला सत्र न्यायाधीश 13 विशेष न्यायाधीश पाक्सो एक्ट शैलेंद्र कुमार वर्मा की कोर्ट में चल रही थी। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद आरोपी को घटना का दोषी पाया। शासकीय अधिवक्ता के साथ पीड़ित पक्ष की तरफ से अधिवक्ता गिरीश नरायन दुबे ने इस केस में कोर्ट के समक्ष मजबूत पक्ष रखे।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता की दलीलों का विरोध किया। कोर्ट ने दोनों आरोपियों घटना का दोषी मानते हुए 20-20 साल का कारावास व 25-25 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। विशेष लोक अभियोजक विकास सिंह व अमित सिंह चौहान ने बताया कि अर्थदंड अदा न करने पर दोनों को अतिरिक्त सजा काटनी होगी।
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हाईवे किनारे झोपड़ी बनाकर रहने वाला एक मजदूर नौ जुलाई 2015 को कानपुर मजदूरी करने गया था। वहीं घर में आटा खत्म होने पर उसकी पत्नी ने आठ वर्षीय बेटी को चक्की भेजा था। रास्ते में बिलसरायां के अजय उर्फ परशुराम व बाबूराम ने बालिका से दुष्कर्म किया।
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इसकी जानकारी घर में देने पर जान से मारने की धमकी दी। दुष्कर्म से बच्ची की हालत बिगड़ गई थी। आरोपी उसे छोड़कर फरार हो गए थे। जानकारी पर उसे उपचार के लिए भेजा गया। सामान्य होने पर बच्ची ने घटना के बाबत मां को बताया तो मामले में दोनों आरोपियों पर सामूहिक दुष्कर्म की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी।
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इसकी सुनवाई अपर जिला सत्र न्यायाधीश 13 विशेष न्यायाधीश पाक्सो एक्ट शैलेंद्र कुमार वर्मा की कोर्ट में चल रही थी। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद आरोपी को घटना का दोषी पाया। शासकीय अधिवक्ता के साथ पीड़ित पक्ष की तरफ से अधिवक्ता गिरीश नरायन दुबे ने इस केस में कोर्ट के समक्ष मजबूत पक्ष रखे।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता की दलीलों का विरोध किया। कोर्ट ने दोनों आरोपियों घटना का दोषी मानते हुए 20-20 साल का कारावास व 25-25 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। विशेष लोक अभियोजक विकास सिंह व अमित सिंह चौहान ने बताया कि अर्थदंड अदा न करने पर दोनों को अतिरिक्त सजा काटनी होगी।