{"_id":"6a208d510b4791b482097572","slug":"trees-felled-in-nsi-on-holidays-and-at-night-kanpur-news-c-12-1-knp1028-1546067-2026-06-04","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kanpur News: छुट्टी के दिन और रात में काटे गए एनएसआई में पेड़","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kanpur News: छुट्टी के दिन और रात में काटे गए एनएसआई में पेड़
विज्ञापन
कानपुर। नेशनल शुगर इंस्टीट्यूट (एनएसआई) कैंपस में हरे पेड़ों को सार्वजनिक अवकाश के दिनों में और रात में काटा गया। छोटे-बड़े मिलाकर सात सौ पेड़ काटे गए। इनमें बड़े पेड़ों की आयु 15 से 20 वर्ष के बीच रही है। यह बात वन विभाग की जांच में निकलकर सामने आई है। विभाग की जांच अभी जारी है। इस मामले में एक निजी कंपनी की भूमिका की भी जांच की जा रही है। बताया जा रहा है कि इसी कंपनी ने पेड़ कटवाए हैं।
एनएसआई कैंपस में बिना अनुमति हरे पेड़ों की कटान के प्रकरण में वन विभाग ने बारीकी से जांच शुरू कर दी है। इंस्टीट्यूट के कैंपस में कंजी, नीम, शीशम, बबूल, कनेर, यूकेलिप्टस आदि पेड़ों को काटा गया। डीएफओ विकास नायक ने बताया कि अभी तक हुई जांच से साफ है कि पेड़ों को सार्वजनिक अवकाश के दिनों में काटा गया। इसके साथ ही कटान रात में हुई है जिससे मामला किसी को पता न चले। यह जांच की जा रही है कि इस प्रकरण के जिम्मेदार कौन-कौन हैं।
उन्होंने बताया कि कैंपस में जिस जगह ये पेड़ काटे गए हैं। वहां पर वन विभाग ने भी पौधारोपण किया है। इसके अलावा विभिन्न सरकारी विभागों और संस्थाओं ने भी उस जगह पौधारोपण किया था। पेड़ों की हानि का मूल्यांकन किया जा रहा है। अनवरगंज की कंपनी मेसर्स तिवारी वुड वर्क्स की संलिप्तता की जांच की जा रही है। डीएफओ नायक का कहना एनएसआई ने वर्ष 2025 में नौ बबूल के पेड़ काटने के लिए अनुमति ली थी। लेकिन जब इतने अधिक पेड़ कटे तो अनुमति नहीं ली गई। इससे पेड़ काटने वालों का इरादा स्पष्ट है। इस संबंध में एनएसआई की निदेशक डॉ. सीमा परोहा कोई अधिकारिक वर्जन नहीं जारी किया। इंस्टीट्यूट के कुछ जिम्मेदारों का कहना है कि आंधी-तूफान डेढ़ सौ पेड़ गिर गए थे। उन्हीं को हटवाया गया है। इस पर वन विभाग का कहना है कि आंधी में गिरे पेड़ों के संबंध में पहले विभाग को सूचना दी जाती है।
विज्ञापन
-- -- -
सात हजार पेड़ लगाने पड़ेंगे
-डीएफओ का कहना है कि जांच पूरी होने और कार्रवाई सुनिश्चित होने के बाद एनएसआई को सात हजार पेड़ लगाने पड़ेंगे। इसके लिए नोटिस जारी की जाएगी। इंस्टीट्यूट बताएगा कि पेड़ कहां लगाए जाने हैं। एक पेड़ काटने के बदले में 10 पेड़ लगाए जाएंगे।
-- -- -
तीसरी बार में घुस पाई वनाधिकारियों की टीम
-एनएसआई के कैंपस के हिस्से में जहां पेड़ कटे हैं, वहां वनाधिकारी तीसरी बार प्रयास में अंदर जा पाए हैं। पेड़ कटने की शिकायत पर दो बार रेंजर वहां गए लेकिन वहां ताला लगा हुआ था। वनाधिकारी को वहां घुसने नहीं दिया गया। मंगलवार को डीएफओ की अगुवाई में टीम पहुंची। काफी प्रयास के बाद ताला खोला गया।
विज्ञापन
एनएसआई कैंपस में बिना अनुमति हरे पेड़ों की कटान के प्रकरण में वन विभाग ने बारीकी से जांच शुरू कर दी है। इंस्टीट्यूट के कैंपस में कंजी, नीम, शीशम, बबूल, कनेर, यूकेलिप्टस आदि पेड़ों को काटा गया। डीएफओ विकास नायक ने बताया कि अभी तक हुई जांच से साफ है कि पेड़ों को सार्वजनिक अवकाश के दिनों में काटा गया। इसके साथ ही कटान रात में हुई है जिससे मामला किसी को पता न चले। यह जांच की जा रही है कि इस प्रकरण के जिम्मेदार कौन-कौन हैं।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि कैंपस में जिस जगह ये पेड़ काटे गए हैं। वहां पर वन विभाग ने भी पौधारोपण किया है। इसके अलावा विभिन्न सरकारी विभागों और संस्थाओं ने भी उस जगह पौधारोपण किया था। पेड़ों की हानि का मूल्यांकन किया जा रहा है। अनवरगंज की कंपनी मेसर्स तिवारी वुड वर्क्स की संलिप्तता की जांच की जा रही है। डीएफओ नायक का कहना एनएसआई ने वर्ष 2025 में नौ बबूल के पेड़ काटने के लिए अनुमति ली थी। लेकिन जब इतने अधिक पेड़ कटे तो अनुमति नहीं ली गई। इससे पेड़ काटने वालों का इरादा स्पष्ट है। इस संबंध में एनएसआई की निदेशक डॉ. सीमा परोहा कोई अधिकारिक वर्जन नहीं जारी किया। इंस्टीट्यूट के कुछ जिम्मेदारों का कहना है कि आंधी-तूफान डेढ़ सौ पेड़ गिर गए थे। उन्हीं को हटवाया गया है। इस पर वन विभाग का कहना है कि आंधी में गिरे पेड़ों के संबंध में पहले विभाग को सूचना दी जाती है।
विज्ञापन
सात हजार पेड़ लगाने पड़ेंगे
-डीएफओ का कहना है कि जांच पूरी होने और कार्रवाई सुनिश्चित होने के बाद एनएसआई को सात हजार पेड़ लगाने पड़ेंगे। इसके लिए नोटिस जारी की जाएगी। इंस्टीट्यूट बताएगा कि पेड़ कहां लगाए जाने हैं। एक पेड़ काटने के बदले में 10 पेड़ लगाए जाएंगे।
तीसरी बार में घुस पाई वनाधिकारियों की टीम
-एनएसआई के कैंपस के हिस्से में जहां पेड़ कटे हैं, वहां वनाधिकारी तीसरी बार प्रयास में अंदर जा पाए हैं। पेड़ कटने की शिकायत पर दो बार रेंजर वहां गए लेकिन वहां ताला लगा हुआ था। वनाधिकारी को वहां घुसने नहीं दिया गया। मंगलवार को डीएफओ की अगुवाई में टीम पहुंची। काफी प्रयास के बाद ताला खोला गया।