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Kanpur News: बेअसर रहा परिवहन विभाग का सेफ फ्यूचर अभियान

Fri, 17 Jul 2026 02:05 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर Updated Fri, 17 Jul 2026 02:05 AM IST
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Transport Department's 'Safe Future' campaign proved ineffective.
कानपुर देहात। परिवहन विभाग का सेफ फ्यूचर अभियान बेअसर साबित हुआ। विभाग ने मानकों की अनदेखी कर संचालित स्कूली वाहनों के खिलाफ एक से 15 जुलाई तक ये अभियान चलाया। फिर भी मानकों की अनदेखी कर चालक बच्चों को स्कूल पहुंचाने व वापस घर लेकर जा रहे हैं।
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जनपद के सहायक परिवहन विभाग कार्यालय में 610 स्कूली वाहन पंजीकृत हैं। वहीं, सड़कों पर इसके विपरीत एक हजार से अधिक वाहन संचालित हो रहे हैं। अभियान के दौरान 61 स्कूली वाहनों पर कार्रवाई कर खानापूर्ति की गई। इसमें सात की फिटनेस फेल, 24 में अग्निशमन यंत्र न पाए जाने व 30 में परमिट न होने पर सीज व चालान की कार्रवाई हुई। विभाग ने भले ही 15 दिन अभियान चलाकर नियमों का पालन करने का दावा किया हो, लेकिन किसी भी दिन इसका अमल नजर नहीं आया। बुधवार को अभियान भी समाप्त हो गया। बृहस्पतिवार को संवाद न्यूज एजेंसी की टीम ने पड़ताल की तो सड़कों पर स्कूली वाहनों की पहले जैसी स्थिति दिखी। कई जगह वाहनों में क्षमता से अधिक बच्चे बैठे नजर आए। अधिकांश जगह वैन, कार, ई-रिक्शा से बच्चे जाते नजर आए, जिनमें स्कूली वाहन के मानक नहीं थे।
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रसूलाबाद-मगंलपुर रोड, समय- दोपहर 12:30 बजे
झींझक में रसूलाबाद-मंगलपुर रोड पर नहर पुल के पास पहुंचने पर एक निजी वाहन में स्कूली बच्चे बैठे नजर आए। चालक ने वाहन खिड़कियों में न तो जाली लगा रखी थी और न ही वह पीले रंग से पेंट थी। वाहन में बच्चे भी क्षमता से अधिक बैठे हुए थे। ऐसे में दुर्घटना होने पर बड़ा हादसा हो सकता है। हालांकि जिम्मेदारों को यह नजर नहीं आता है।
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माती-अकबरपुर रोड, समय- दोपहर 12:45 बजे
माती मुख्यालय मार्ग पर एक निजी वैन स्कूली बच्चों को लेकर जाती नजर आई। इसमें ऊपर स्कूल बैग रखे थे और अंदर बच्चे बैठे थे। यह वाहन किसी भी तरह से स्कूली वाहन का मानक पूरी नहीं कर रहा था। वाहन में न ही पीले रंग का पेंट था और न ही उस पर चालक का नाम, मोबाइल नंबर व अन्य मानक पूरे होते नजर आए। जबकि शासन ने स्कूली वाहनों के लिए मानक तय कर रखे हैं, जिससे उसकी अलग से पहचान हो सके।

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बयान.....
अभियान के दौरान 61 स्कूली वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। जबकि निजी वाहनों को स्कूली बच्चों के बैठाने में प्रयोग करने वाले वाहनों का चालान किया गया है। यह अभियान लगातार जारी रहेगा। इसके लिए स्कूल प्रबंधन को भी पत्र जारी किए गए हैं, जिससे स्कूल संचालित होने वाले ऐसे वाहनों पर रोक लगाई जा सके। - रोहित राजपूत, एआरटीओ, प्रवर्तन
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