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मोबाइल से होगा ट्रांजेक्शन
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर
Updated Sat, 14 Mar 2015 02:17 AM IST
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एटीएम-डेबिट कार्ड, मोबाइल-इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल मनी आदि लेनदेन की बेहतरीन तकनीकि के बाद अब देश में नियर फील्ड कम्युनिकेश सर्विस शुरू करने की पहल हुई है। आरबीआई ने इसके लिए एक कमेटी गठित की है। साथ ही लोगों से भी इस खास सुविधा के बाबत सुझाव मांगे है, जिससे इसमें आवश्यक सावधानियां और बदलाव लागू किए जा सकें।
तमाम विकसित देशों में लोग अपने मोबाइल के जरिए ही सभी प्रकार के लेनदेन करते हैं। एक खास सॉफ्टवेयर मोबाइल में क्रेडिट, डेबिट कार्ड और एकाउंट के डिटेल मोबाइल में सुरक्षित कर दिए जाते हैं।
इसके बाद यदि आपने किसी दुकान से खरीदारी की तो उसका भुगतान करने के लिए आपको अपना मोबाइल दुकान में रखी एक विशेष मशीन के पास ले जाना होगा। मशीन अपने आप मोबाइल को एक मैसेज भेजेगी, जिसमें इस ट्रांजेक्शन का मूल्य दर्ज होगा।
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साथ ही एक एप्रूवल भी मांगेगा, जैसे ही आप मोबाइल से ट्रांजेक्शन एप्रूव कर देंगे, मशीन को भुगतान मिल जाएगा। रेडियो फ्रीक्वेंसी नेटवर्क पर काम करने वाली इस सुविधा में संबंधित व्यक्ति को अपना स्मार्ट फोन पेमेंट रिसीवर मशीन के दस सेन्टीमीटर तक करीब लाना होगा।
एक प्रमुख सिनेमा समूह ने देश के पंद्रह प्रमुख शहरों में टिकट की राशि का भुगतान करने के लिए लगभग इसी तर्ज पर सेवा आरंभ की है। बस इसमें मोबाइल को मशीन पर टच कराना होता है।
आरबीआई की निदेशक संगीता दास ने इस बाबत आम ग्राहकों के सुझाव और सलाह मांगी है, जिससे इस सुविधा को लागू करने के लिए आवश्यक तैयारियां की जा सकें।
सूत्रों के मुताबिक शुरुआती चरण में आरबीआई छोटे ट्रांजेक्शन के लिए इस सुविधा को ट्रायल के रूप में आरंभ कर सकता है। यदि सबकुछ सफल रहा तो सभी प्रकार के लेनदेन इसी तकनीकि से होंगे।
जापान एवं सिंगापुर में तो लगभग सभी लेनदेन इसी तकनीकि पर होते हैं। आरबीआई ने इस संबंध में एक ड्राफ्ट कमेटी गठित की है। वहीं लोगों से भी इस संबंध में सुझाव आमंत्रित किए हैं। यह तकनीकि लागू करना एक बड़ी उपलब्धि होगी।
हेमंत गुप्ता, बैंकिंग एक्सपर्ट
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तमाम विकसित देशों में लोग अपने मोबाइल के जरिए ही सभी प्रकार के लेनदेन करते हैं। एक खास सॉफ्टवेयर मोबाइल में क्रेडिट, डेबिट कार्ड और एकाउंट के डिटेल मोबाइल में सुरक्षित कर दिए जाते हैं।
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इसके बाद यदि आपने किसी दुकान से खरीदारी की तो उसका भुगतान करने के लिए आपको अपना मोबाइल दुकान में रखी एक विशेष मशीन के पास ले जाना होगा। मशीन अपने आप मोबाइल को एक मैसेज भेजेगी, जिसमें इस ट्रांजेक्शन का मूल्य दर्ज होगा।
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साथ ही एक एप्रूवल भी मांगेगा, जैसे ही आप मोबाइल से ट्रांजेक्शन एप्रूव कर देंगे, मशीन को भुगतान मिल जाएगा। रेडियो फ्रीक्वेंसी नेटवर्क पर काम करने वाली इस सुविधा में संबंधित व्यक्ति को अपना स्मार्ट फोन पेमेंट रिसीवर मशीन के दस सेन्टीमीटर तक करीब लाना होगा।
एक प्रमुख सिनेमा समूह ने देश के पंद्रह प्रमुख शहरों में टिकट की राशि का भुगतान करने के लिए लगभग इसी तर्ज पर सेवा आरंभ की है। बस इसमें मोबाइल को मशीन पर टच कराना होता है।
आरबीआई की निदेशक संगीता दास ने इस बाबत आम ग्राहकों के सुझाव और सलाह मांगी है, जिससे इस सुविधा को लागू करने के लिए आवश्यक तैयारियां की जा सकें।
सूत्रों के मुताबिक शुरुआती चरण में आरबीआई छोटे ट्रांजेक्शन के लिए इस सुविधा को ट्रायल के रूप में आरंभ कर सकता है। यदि सबकुछ सफल रहा तो सभी प्रकार के लेनदेन इसी तकनीकि से होंगे।
जापान एवं सिंगापुर में तो लगभग सभी लेनदेन इसी तकनीकि पर होते हैं। आरबीआई ने इस संबंध में एक ड्राफ्ट कमेटी गठित की है। वहीं लोगों से भी इस संबंध में सुझाव आमंत्रित किए हैं। यह तकनीकि लागू करना एक बड़ी उपलब्धि होगी।
हेमंत गुप्ता, बैंकिंग एक्सपर्ट