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वाणिज्य विभाग के फॉर्म के लिए नहीं दौड़ेंगे व्यापारी
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर
Updated Thu, 11 Dec 2014 02:19 AM IST
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सिक्योरिटी फीचर्स के साथ प्रिंट होने वाले वाणिज्य कर विभाग के तमाम फॉर्म को पाने के लिए अब व्यापारियों को भटकना नहीं पड़ेगा।
अधिकारी और खातापालक व्यापारी सत्यापन के लिए पुराने फॉर्म के इस्तेमाल का प्रमाण मांगते थे। साथ ही पूर्व में दाखिल रिटर्न की प्रति भी मांगी जाती थी।
मगर विभाग के ताजा सर्कुलर में सभी को निर्देश दिए गए हैं यह औपचारिकता ऑनलाईन पूरी की जाएगी। यह भी स्पष्ट किया गया है कि संबंधित व्यापारी को फॉर्म उसी दिन उपलब्ध कराया जाएगा।
गौरतलब है कि वाणिज्य कर विभाग फॉर्म-38, फॉर्म-21, फॉर्म-सी समेत तमाम फॉर्म व्यापारियों को जारी करता है, जो अलग-अलग कार्य के लिए उपयोग किए जाते हैं।
विभागीय सूत्रों के मुताबिक सभी फॉर्म विभाग सिक्योरिटी फीचर्स के साथ प्रिंट करके पर्याफ्त मात्रा में उपलब्ध करा दिए गए हैं। मगर व्यापारियों को फॉर्म देने में अधिकारी जमकर आनाकानी करते हैं।
सबसे पहले संबंधित खंड का असिस्टेंट कमिश्नर फॉर्म देने के पूर्व खातापालक की रिपोर्ट मांगता है। खातापालक व्यापारी से पूर्व में दिए गए फॉर्मों के इस्तेमाल का पूरा ब्यौरा मांगता है।
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साथ ही पहले दाखिल रिटर्न की प्रति मांगता है। कुल मिलाकर तमाम औपचारिकताओं में उलझाकर वसूली का इंतजाम किया जाता है।
इस तरह की तमाम शिकायतें मुख्यालय को मिलने के बाद कमिश्नर ने 2 दिसंबर से नई व्यवस्था लागू की है। इसके तहत अब पूर्व के फॉर्मों के इस्तेमाल का सत्यापन करने के लिए ऑनलाईन डेटा की जांच करेंगे।
इसके बाद यदि किसी तरह की गड़बड़ी का अंदेशा होता है और खातापालक की रिपोर्ट बहुत आवश्यक होती है तो उसे तत्काल लिया जाएगा।
कुल मिलाकर व्यापारी को उसी दिन फॉर्म उपलब्ध कराया जाएगा, जिस दिन वह आवेदन करेगा।
वाणिज्य कर विभाग व्यापारियों की सहायता के लिए हैं, न कि उन्हें बेवजह परेशान करने के लिए। फॉर्म को लेकर दिक्कतों के संबंध में तमाम शिकायतों को देखते हुए नई व्यवस्था लागू की है।
इसमें पुराने फॉर्मों के इस्तेमाल का सत्यापन ऑनलाईन किया जाएगा। इसके बाद भी यदि कहीं से उत्पीड़न की शिकायत आएगी तो संबंधित अधिकारी के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।
मृत्युंजय कुमार नारायण, कमिश्नर (वाणिज्य कर)
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अधिकारी और खातापालक व्यापारी सत्यापन के लिए पुराने फॉर्म के इस्तेमाल का प्रमाण मांगते थे। साथ ही पूर्व में दाखिल रिटर्न की प्रति भी मांगी जाती थी।
मगर विभाग के ताजा सर्कुलर में सभी को निर्देश दिए गए हैं यह औपचारिकता ऑनलाईन पूरी की जाएगी। यह भी स्पष्ट किया गया है कि संबंधित व्यापारी को फॉर्म उसी दिन उपलब्ध कराया जाएगा।
गौरतलब है कि वाणिज्य कर विभाग फॉर्म-38, फॉर्म-21, फॉर्म-सी समेत तमाम फॉर्म व्यापारियों को जारी करता है, जो अलग-अलग कार्य के लिए उपयोग किए जाते हैं।
विभागीय सूत्रों के मुताबिक सभी फॉर्म विभाग सिक्योरिटी फीचर्स के साथ प्रिंट करके पर्याफ्त मात्रा में उपलब्ध करा दिए गए हैं। मगर व्यापारियों को फॉर्म देने में अधिकारी जमकर आनाकानी करते हैं।
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सबसे पहले संबंधित खंड का असिस्टेंट कमिश्नर फॉर्म देने के पूर्व खातापालक की रिपोर्ट मांगता है। खातापालक व्यापारी से पूर्व में दिए गए फॉर्मों के इस्तेमाल का पूरा ब्यौरा मांगता है।
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साथ ही पहले दाखिल रिटर्न की प्रति मांगता है। कुल मिलाकर तमाम औपचारिकताओं में उलझाकर वसूली का इंतजाम किया जाता है।
इस तरह की तमाम शिकायतें मुख्यालय को मिलने के बाद कमिश्नर ने 2 दिसंबर से नई व्यवस्था लागू की है। इसके तहत अब पूर्व के फॉर्मों के इस्तेमाल का सत्यापन करने के लिए ऑनलाईन डेटा की जांच करेंगे।
इसके बाद यदि किसी तरह की गड़बड़ी का अंदेशा होता है और खातापालक की रिपोर्ट बहुत आवश्यक होती है तो उसे तत्काल लिया जाएगा।
कुल मिलाकर व्यापारी को उसी दिन फॉर्म उपलब्ध कराया जाएगा, जिस दिन वह आवेदन करेगा।
वाणिज्य कर विभाग व्यापारियों की सहायता के लिए हैं, न कि उन्हें बेवजह परेशान करने के लिए। फॉर्म को लेकर दिक्कतों के संबंध में तमाम शिकायतों को देखते हुए नई व्यवस्था लागू की है।
इसमें पुराने फॉर्मों के इस्तेमाल का सत्यापन ऑनलाईन किया जाएगा। इसके बाद भी यदि कहीं से उत्पीड़न की शिकायत आएगी तो संबंधित अधिकारी के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।
मृत्युंजय कुमार नारायण, कमिश्नर (वाणिज्य कर)