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डॉक्टरों की लापरवाही: औरैया में ऑपरेशन के दौरान महिला के पेट में छोड़ दिया तौलिया

Wed, 24 Jul 2024 06:57 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, औरैया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, औरैया Published by: शिखा पांडेय Updated Wed, 24 Jul 2024 06:57 PM IST
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Towel left in the stomach of a woman during operation in Auraiya
पीड़ित शांति देवी व जार में रखा तौलिया - फोटो : अमर उजाला
अस्पताल में ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों की लापरवाही का एक बड़ा मामला सामने आया है। ऑपरेशन के दौरान डॉक्टर ने महिला के पेट में तौलिया छोड़ दिया। ऑपरेशन के बाद भी महिला को पेट में असहनीय दर्द रहने लगा। परिजनों ने कानपुर में एक अस्पताल में ऑपरेशन कराया तो पेट से तौलिया निकला।
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रुरुगंज क्षेत्र के गांव चंदैया निवासी अवधेश कुमार राजपूत बिधूना में डॉ. लोहिया हॉयर सेकेंडरी पब्लिक स्कूल लोहिया नगर में प्राइवेट शिक्षक हैं। उन्होंने बताया कि 15 मार्च को उनकी पत्नी शांति देवी की आंतों से रक्तस्राव होने लगा। हालत बिगड़ने पर वह उन्हें लेकर बिधूना पहुंचे। जहां आराम न मिलने पर पत्नी को इटावा में भरथना चौराहा के पास एक प्राइवेट अस्पताल ले आए। 16 मार्च को तमाम जांचों के बाद ऑपरेशन की सलाह दी गई। अस्पताल की फीस से लेकर अन्य को मिलाकर करीब 70-80 हजार रुपये का खर्च आया।
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ऑपरेशन के बाद शांति देवी को टाइफाइड हो गया। डिस्चार्ज होने के पांच दिन बाद अवधेश फिर से अस्पताल पहुंचे। जहां दवा देकर उन्हें आराम मिलने का आश्वासन दिया, लेकिन दो-तीन बार दिखाने के बाद भी आराम नहीं मिला। इटावा में ही कुछ दूसरे अस्पतालों का भी सहारा लिया, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। इसी बीच अल्ट्रासाउंड से पता चला कि शांति देवी के पेट में पस व पानी बन गया है। परिजनों ने कानपुर में किसी ठीक-ठाक अस्पताल में दिखाने की सलाह दी। शांति देवी को लेकर 26 मई कानपुर के कल्याणपुर चुंगी स्थित न्यू श्रीराम हास्पिटल में भर्ती कराया गया।
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अल्ट्रासाउंड व सीटी स्कैन के बाद डॉ. एनएस राजपूत की देखरेख में 28 मई को शांति देवी का एक बार फिर ऑपरेशन किया गया तो उनके पेट से तौलिया निकला। यह भी पता चला कि शांति एक आंत भी कटी हुई है। अवधेश कुमार ने बताया कि शांति देवी के डिस्चार्ज होने के बाद तौलिए को वह डब्बे में रखकर घर ले आए। चार लाख रुपये से ज्यादा ऑपरेशन में खर्च हुए। अब आंत का सितंबर में दोबारा से ऑपरेशन होना है। अवधेश कुमार ने बताया कि 10 साल पहले पत्नी शांति देवी ने दिव्यांग बेटे को जन्म दिया था। तब से रक्त स्राव की समस्या थी। मार्च माह में यह समस्या अचानक ज्यादा बढ़ गई। इस पर उसे बिधूना के बाद इटावा में भर्ती कराया था। जहां यह करामात हो गई।

आरोपी डॉक्टर ने कहा- नहीं किया ऑपरेशन
मैं अक्सर ऑपरेशन करता हूं। 15 और 16 मार्च को मैने ऐसा कोई ऑपरेशन नहीं किया था। न कोई ऐसी समस्या वाला मरीज आया था।- डॉ. प्रशांत कुमार मिश्रा, इटावा

डिब्बे में बंद तौलिये को देख छलक आते हैं परिवार के आंसू
पत्नी को कोई दिक्कत न हो इसलिए अवधेश कुमार ने शांति देवी को ब्लीडिंग होने पर तुरंत ऑपरेशन कराया, लेकिन इससे राहत मिलने की जगह बीच पेट में छूटा तौलिया उनके लिए नासूर बन गया। कानपुर में दूसरे ऑपरेशन में निकली तौलिया को डिब्बे में बंद करके अवधेश घर ले आए हैं। इसे देखकर पूरा परिवार देखकर खुद को कोसता है। अवधेश कुमार का कहना है कि अब वह सीएमओ से लेकर अन्य जगह अपनी फरियाद लगाएंगे।


उपभोक्ता फोरम में करें अपील, मिलेगा न्याय
उपभोक्ता फोरम के वरिष्ठ अधिवक्ता रंजन त्रिपाठी ने कहा कि इस तरह के मामलों में चिकित्सक के खिलाफ असावधानी व लापरवाही के तहत परिवाद दर्ज किया जाता है। मामले में उपभोक्ता फोरम ही न्याय पाने का सबसे सटीक तरीका है। ऐसे मामलों की सुनवाई वहीं होती है।

इटावा में पहला ऑपरेशन हुआ था, जिसे लेकर इटावा सीएमओ कार्यालय में शिकायत दर्ज करानी चाहिए। जांच रिपोर्ट में सभी पहलु खुल जाते हैं, तो कड़ी कार्रवाई भी होती है।- डॉ. सुनील कुमार वर्मा, सीएमओ
 
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