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Kanpur News: संकल्प लिया...नहीं किया बचाव, सूख गए लाखों पौधे
Sat, 06 Jun 2026 02:23 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
Updated Sat, 06 Jun 2026 02:23 AM IST
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कानपुर देहात। हर साल पर्यावरण दिवस पर लाखों पौधे लगाने के बाद उनके सुरक्षा का संकल्प लिया जाता है। मगर संकल्प लेेने वाले जिम्मेदार पौधों को बचा नहीं पाते। दरअसल बीते साल मानसून आने पर वन व 25 अन्य विभागों ने मिलकर 59.56 लाख से अधिक पौधे लगाए थे। देखरेख के अभाव में लाखों पौधे सूख गए। हालांकि वन विभाग का दावा है कि केवल दस फीसदी पौधे सूखे हैं जबकि हकीकत में जिन स्थानों पर हजारों पौधे लगाए गए थे वहां केवल सूखे पौधों के डंठल की बचे हैं।
बीते साल मानसून आने पर जुलाई में वन विभाग ने 111 स्थलों पर 26.75 लाख पौधे लगाए थे। वहीं अन्य 25 विभागों ने 7575 स्थानों पर 32.81 लाख पौधे लगाए। अंतर विभागीय टीमाें से स्थलीय सत्यापन में खुलासा हुआ कि अन्य विभागों के लगाए पौधों में 93, 528 सूख गए। इधर वन विभाग के लगाए पौधों का सत्यापन दूसरी प्रभागीय टीम ने किया। बीते साल सितंबर-अक्तूबर में हुए सत्यापन में टीमों ने सब ठीक पाया जबकि हकीकत इतर है।
रसूलाबाद वन ब्लॉकों में लगाए गए अधिकांश पौधे सूख चुके हैं। अकबरपुर में भी लगाए गए पौधों में ट्री गार्ड बचे हैं पौधे नदारद हैं। लोगों का आरोप है कि लगाने के बाद पौधों की देखरेख पर ध्यान नहीं दिया गया। इसकी वजह से पौधे सूख गए। कई जगह ट्री गार्ड में भी पौधे सुरक्षित नहीं बचे है तो कुछ जगह शरारती तत्वों ने ट्री गार्ड उखाड़ फेंके हैं।
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बयान...
हरियाली अभियान में लगाए गए पौधों में नष्ट होने या फिर सूखने वाले पौधों का औसत करीब दस फीसदी है। बीते साल लगाए गए पौधे जहां सूख गए हैं उनकी भरपाई इस साल मानसून में प्रस्तावित पौधरोपण अभियान में की जाएगी। लगाए गए पौधों की सुरक्षा का दायित्व सभी को समझाना चाहिए। तभी सही मायके में पौधे सुरक्षित रहेंगे और हरियाली तेजी से बढ़ेगी। कई बार लोग वन विभाग की ही पूरी जिम्मेदारी समझ लेते हैं। - एके पांडेय, डीएफओ।
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लापरवाही से नहीं बढ़ रही वन ब्लाॅकों में हरियाली
रसूलाबाद। वन रेंज में असालतगंज, अलीपुर रामाहार, गोपालपुर तालुका, उरिया, जोत, बरिगौं व बहादुरपुर वन ब्लॉक हैं। बीते साल इन वन ब्लॉकों में करीब 80 हेक्टेयर में 1.25 लाख पौधे लगाए गए। मगर लगाए गए पौधों की सुरक्षा और देखरेख में कमी रही। इसकी वजह से इन वन ब्लॉकों में लगाए गए अधिकांश पौधे सूख गए हैं। मौके पर पौधों की जगह केवल गड्ढे और डंठल की दिख रहे हैं। गांव के जगदीश व सुरेश ने बताया कि बीते साल बारिश से पहले गड्ढे कराए गए थे। बारिश में पौधे भी लगाए गए, लेकिन इसके बाद इनकी सुरक्षा नहीं की गई तो पौधे सूख गए। तमाम पौधे छुट्टा मवेशी चर गए। विश्व पर्यावरण दिवस पर पौधे के बचे डंठल विभागीय दावों की सही तस्वीर बयां करने को काफी हैं। (संवाद)
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नसीरपुर बंबा पटरी पर ट्री गार्ड में बचे डंठल
राजपुर। पौधों की निगरानी में कमी की वजह से हजारों पौधे लगाने के कुछ समय बाद ही सूख गए। सिकंदरा के नसीरपुर में नहर पटरी के दोनों किनारों पर ट्री गार्ड में पौधे लगाए गए थे। हालांकि पौधों की न तो नियमित सिंचाई कराई गई। न ही देखरेख हुई। भीषण गर्मी और सिंचाई के अभाव में धीरे-धीरे सभी पौधे सूख गए। अब केवल खाली ट्री गार्ड लगे हैं। इसमें सूखे पौधों के डंठल दिखाई दे रहे हैं। इसी प्रकार राजपुर ब्लाक के अमराहट जंगल में वन विभाग ने कंजी, शीशम, सिरस आदि के करीब तीन हजार पौधे लगाए थे। देखभाल के अभाव में धूप में आधे से अधिक पौधे नष्ट हो गए हैं। (संवाद)
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बीते साल मानसून आने पर जुलाई में वन विभाग ने 111 स्थलों पर 26.75 लाख पौधे लगाए थे। वहीं अन्य 25 विभागों ने 7575 स्थानों पर 32.81 लाख पौधे लगाए। अंतर विभागीय टीमाें से स्थलीय सत्यापन में खुलासा हुआ कि अन्य विभागों के लगाए पौधों में 93, 528 सूख गए। इधर वन विभाग के लगाए पौधों का सत्यापन दूसरी प्रभागीय टीम ने किया। बीते साल सितंबर-अक्तूबर में हुए सत्यापन में टीमों ने सब ठीक पाया जबकि हकीकत इतर है।
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रसूलाबाद वन ब्लॉकों में लगाए गए अधिकांश पौधे सूख चुके हैं। अकबरपुर में भी लगाए गए पौधों में ट्री गार्ड बचे हैं पौधे नदारद हैं। लोगों का आरोप है कि लगाने के बाद पौधों की देखरेख पर ध्यान नहीं दिया गया। इसकी वजह से पौधे सूख गए। कई जगह ट्री गार्ड में भी पौधे सुरक्षित नहीं बचे है तो कुछ जगह शरारती तत्वों ने ट्री गार्ड उखाड़ फेंके हैं।
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बयान...
हरियाली अभियान में लगाए गए पौधों में नष्ट होने या फिर सूखने वाले पौधों का औसत करीब दस फीसदी है। बीते साल लगाए गए पौधे जहां सूख गए हैं उनकी भरपाई इस साल मानसून में प्रस्तावित पौधरोपण अभियान में की जाएगी। लगाए गए पौधों की सुरक्षा का दायित्व सभी को समझाना चाहिए। तभी सही मायके में पौधे सुरक्षित रहेंगे और हरियाली तेजी से बढ़ेगी। कई बार लोग वन विभाग की ही पूरी जिम्मेदारी समझ लेते हैं। - एके पांडेय, डीएफओ।
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लापरवाही से नहीं बढ़ रही वन ब्लाॅकों में हरियाली
रसूलाबाद। वन रेंज में असालतगंज, अलीपुर रामाहार, गोपालपुर तालुका, उरिया, जोत, बरिगौं व बहादुरपुर वन ब्लॉक हैं। बीते साल इन वन ब्लॉकों में करीब 80 हेक्टेयर में 1.25 लाख पौधे लगाए गए। मगर लगाए गए पौधों की सुरक्षा और देखरेख में कमी रही। इसकी वजह से इन वन ब्लॉकों में लगाए गए अधिकांश पौधे सूख गए हैं। मौके पर पौधों की जगह केवल गड्ढे और डंठल की दिख रहे हैं। गांव के जगदीश व सुरेश ने बताया कि बीते साल बारिश से पहले गड्ढे कराए गए थे। बारिश में पौधे भी लगाए गए, लेकिन इसके बाद इनकी सुरक्षा नहीं की गई तो पौधे सूख गए। तमाम पौधे छुट्टा मवेशी चर गए। विश्व पर्यावरण दिवस पर पौधे के बचे डंठल विभागीय दावों की सही तस्वीर बयां करने को काफी हैं। (संवाद)
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नसीरपुर बंबा पटरी पर ट्री गार्ड में बचे डंठल
राजपुर। पौधों की निगरानी में कमी की वजह से हजारों पौधे लगाने के कुछ समय बाद ही सूख गए। सिकंदरा के नसीरपुर में नहर पटरी के दोनों किनारों पर ट्री गार्ड में पौधे लगाए गए थे। हालांकि पौधों की न तो नियमित सिंचाई कराई गई। न ही देखरेख हुई। भीषण गर्मी और सिंचाई के अभाव में धीरे-धीरे सभी पौधे सूख गए। अब केवल खाली ट्री गार्ड लगे हैं। इसमें सूखे पौधों के डंठल दिखाई दे रहे हैं। इसी प्रकार राजपुर ब्लाक के अमराहट जंगल में वन विभाग ने कंजी, शीशम, सिरस आदि के करीब तीन हजार पौधे लगाए थे। देखभाल के अभाव में धूप में आधे से अधिक पौधे नष्ट हो गए हैं। (संवाद)