तंबाकू निषेध दिवस: पान मसाला के बाजार पर टिका है इत्र कारोबार, पढ़ें खास खबर
कन्नौज में बनने वाले इत्र की सप्लाई भले ही देश-दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में होती हो, पर यह भी सच है कि यहां के खुशबू के कारोबार का पूरा दारोमदार पान मसाला और तंबाकू उद्योग पर ही टिका हुआ है।
विस्तार
कन्नौज में तैयार होने वाले इत्र की खासियत है कि इसे यहां के कारोबारी ताजे फूलों से बिना किसी केमिकल के प्राकृतिक तरीके से तैयार करते हैं। इसी खुशबू से पान मसाला कंपनियों अपने ग्राहकों को लुभाती हैं। पिछले कुछ दशक में इत्र कारोबार की तरक्की के पीछे भी पान मसाला के बढ़ते दायरे का ही हाथ है। यहां कमोबेश सभी कारखाना में तैयार होने वाला इत्र किसी ने किसी पान मसाला कंपनी में जरूर सप्लाई होता है। पान मसाला कारोबार का तेजी से बढ़ता ग्राफ इत्र कारोबार के लिए भी मुफीद साबित हो रहा है।
इत्र कारोबार और पान मसाला कारोबार का गठजोड़
कन्नौज में बनने वाले इत्र की सप्लाई भले ही देश-दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में होती हो, पर यह भी सच है कि यहां के खुशबू के कारोबार का पूरा दारोमदार पान मसाला और तंबाकू उद्योग पर ही टिका हुआ है। इत्र कारोबार से जुड़े लोग बताते हैं कि यहां के कुल इत्र उत्पादन का 70 फीसदी से ज्यादा हिस्सा पान मसाला कारोबार में खपता है। पूरे साल में पान मसाला में 600 से 700 करोड़ रुपये से ज्यादा का इत्र खप जाता है। देश-दुनिया में छोटी-बड़ी जो भी कंपनी पान मसाला के कारोबार में है, वह उसमें इस्तेमाल होने वाला खुशबू कन्नौज में ही तैयार करवाती हैं। खुशबू के कारोबार से जुड़े लोग भी बताते हैं कि पान मसाला उद्योग और कन्नौज का इत्र उद्योग एक-दूसरे के पूरक बने हुए हैं।
इनसे महक रहा पान मसाला उद्योग
इत्र कारोबार से जुड़े लोग बताते हैं कि पान मसाला में सबसे ज्यादा खपत गुलाब के खुशबू की होती है। उसके अलावा चंदन, केवड़ा, मेहंदी, शमामा, गेंदा से तैयार इत्र का भी इस्तेमाल होता है। मिट्टी से तैयार इत्र भी पान मसाला में इस्तेमाल किया जाता है। तंबाकू में खासतौर से गेंदा और मेहंदी का इस्तेमाल होता है।
पान मसाला और तंबाकू के कारोबार से जुड़ी कंपनियां अपने-अपने प्रोडेक्ट के मुताबिक अलग-अलग खुशबू का इस्तेमाल करती हैं। कन्नौज से इत्र मंगाकर एक्सपर्ट की देखरेख में उसे एक-दूसरे में मिलाकर उसका कंपाउंड तैयार करवाया जाता है। फिर वही खुशबू पान मसाला की पहचान बन जाती है।
इत्र कारोबारी मोहम्मद आलम कहते हैं कि पिछले चार से पांच दशक के बीच इत्र कारोबार में तेजी की वजह पान मसाला कारोबार का फैलना है। पहले इत्र का इस्तेमाल शरीर पर लगाने, आयुर्वेदिक दवा में और तंबाकू में होता था। जब से पान मसाला कारोबार का दायरा बढ़ा तब से इत्र कारोबार को मानो पंख लग गया।
इत्र कारोबारी और द अतर एसोसिएशन कन्नौज के अध्यक्ष पवन त्रिवेदी बताते हैं कि पान मसाला कारोबार का बढ़ता दायरा कन्नौज के इत्र कारोबार के लिए मुफीद साबित हो रहा है। कुल इत्र उत्पादन का 60 फीसदी से ज्यादा हिस्सा पान मसाला को सप्लाई होता है। सरकार इत्र उत्पादों की जीएसटी दर कम कर दे तो यह कारोबार और तरक्की करे।
- 300 से ज्यादा छोटे-बड़े कारखाने में तैयार होता है इत्र
- 1500 करोड़ से ज्यादा का टर्नओवर है सालाना
- 60-70 फीसदी इत्र उत्पादन का इस्तेमाल पान मसाला में
- 40 साल में इत्र कारोबार में पान मसाला से आई तेजी
- 12-15 तरह के फूलों के इत्र की ज्यादा डिमांड
- एक किलोग्राम पान मसाला में दशमलव पांच प्रतिशत पड़ता है इत्र।