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Kanpur News: तीन फर्जी फर्मों ने हड़पी 127.31 करोड़ की आईटीसी, जांच में खुलासा

Sun, 15 Jun 2025 02:06 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 15 Jun 2025 02:06 AM IST
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Three fake firms grabbed ITC worth Rs 127.31 crore, investigation reveals
कानपुर। एसजीएसटी विभाग ने तीन फर्जी फर्मों का भंडाफोड़ किया है। तीनों फर्मों ने 127.31 करोड़ की इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) को हड़पा है। कागजों पर चल रहीं इन फर्मों के पंजीकरण निरस्त करने के लिए सेंट्रल जीएसटी विभाग को पत्र भेजा गया है। एक फर्म तीन महीने तो दूसरी चार महीने पहले पंजीकृत हुई थी। विभाग ने डाटा एनालिसिस और भौतिक निरीक्षण के जरिये पूरा खेल पकड़ा है। इनके खिलाफ कल्याणपुर थाने में एफआईआर दर्ज कराई है।
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बताया गया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सात जून को राज्य कर विभाग की समीक्षा की थी। इसमें राजस्व का नुकसान करने वाली विभिन्न फर्जी कंपनियों और उनके संचालकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए थे। इसी क्रम में विभाग की विशेष अनुसंधान शाखाओं की ओर से कल्याणपुर थाने में तहरीर दी गई थी। 14 जून को फर्मों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई है।
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एसजीएसटी के अपर आयुक्त एसआईबी ग्रेड दो संजय पाठक और कुमार आनंद ने बताया कि मेसर्स एसआर सेल्स 33/135 हनीफ मंजिल, मोहम्मद रोड, मूलगंज के स्वतंत्र कुमार, मेसर्स केटी ट्रेडर्स बिल्डिंग नंबर 80, गंगागंज गांव, कानपुर के कार्तिक सिंह तोमर और मेसर्स कुमार इंटरप्राइजेज 113/232, स्वरूपनगर हेस्टिंग एवेंयू कानपुर के अजीत कुमार के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। तीनों फर्म आयरन और स्क्रैप से जुड़ा काम होना दिखाते थे।
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एसआर सेल्स का पंजीकरण 19 मार्च 2025 को हुआ था। इस फर्म की जांच विभाग के अफसरों ने 11 जून को शुरू की। फर्म ने 8.44 करोड़ की आईटीसी का दावा किया। इसी तरह, केटी ट्रेडर्स का पंजीकरण 11 फरवरी 2025 को हुआ था। इसकी जांच दो मई से टीमें कर रही थीं। इसमें पता चला कि इसने फर्जी बिलों के जरिये 83 करोड़ की आईटीसी हड़प ली। वहीं, मेसर्स कुमार इंटरप्राइजेज फर्म का पंजीकरण 22 सितंबर 2024 का था। इसकी जांच तीन जून से शुरू की गई थी। इसने इस अवधि में 35.87 करोड़ की आईटीसी का दावा कर राजस्व को नुकसान पहुंचाया।


डाटा एनालिसिस और विभाग के अफसरों ने भौतिक निरीक्षण के बाद फर्जी फर्मों का भंडाफोड़ किया। निरीक्षण में कहीं पर भी कोई फर्म संचालक नहीं मिला। फर्मों ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पंजीयन लिया था। केवल कागजों पर व्यापार कर रहे थे। वास्तविक खरीद बिक्री नहीं की जाती है। अफसरों ने बताया कि तीनों फर्मों का पंजीकरण सेंट्रल के कार्यक्षेत्र में होना दिखाया गया था। इसके चलते सीजीएसटी के अफसरों को इन तीनों फर्मों के पंजीकरण निरस्त के लिए पत्र लिखा गया है।
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