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कानपुर: सीएसए के तीन पूर्व छात्रों का आईसीएआर एसआरएफ में चयन
Sun, 29 Nov 2020 12:40 AM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sun, 29 Nov 2020 12:40 AM IST
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सीएसए कानपुर
चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए) के तीन पूर्व छात्रों ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) नई दिल्ली द्वारा आयोजित आईसीएआर एसआरएफ परीक्षा में सफलता पाई है। शुक्रवार देर रात जारी परिणामों में कृतज्ञ गंगवार ने ऑल इंडिया रैंक छठी, दीपक राव ने 20वीं और श्याम चरण ने 29वीं रैंक पाई है।
मीडिया प्रभारी डॉ. खलील खान ने बताया कि तीनों छात्र भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई) नई दिल्ली से पीएचडी करेेंगे। इन छात्रों को 30 हजार रुपये मासिक फेलोशिप मिलेगी। छात्रों को सीएसए कुलपति डॉ. डीआर सिंह ने बधाई दी है।
मृदा प्रदूषण दूर करने की तकनीक खोजेंगे
सीएसए से 85 प्रतिशत अंकों केसाथ वर्ष 2020 में एमएससी (मृदा विज्ञान एवं कृषि रसायन) पास करने वाले कृतज्ञ के पिता वीरपाल गंगवार किसान और मां सुशीला देवी गृहिणी हैं। उन्होंने बताया कि सीएसए के शिक्षकों द्वारा दिए गए नोट्स से तैयारी करकेसफलता पाई है।
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भविष्य में मृदा वैज्ञानिक बनकर मिट्टी से प्रदूषण और हैवी मैटल्स की समस्या को खत्म करने के लिए तकनीक इजाद करनी है। मूल रूप से रामपुर जिले के रहने वाले कृतज्ञ आईएआरआई के मृदा विज्ञान एवं कृषि रसायन विभाग से पीएचडी करना चाहते हैं।
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मीडिया प्रभारी डॉ. खलील खान ने बताया कि तीनों छात्र भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई) नई दिल्ली से पीएचडी करेेंगे। इन छात्रों को 30 हजार रुपये मासिक फेलोशिप मिलेगी। छात्रों को सीएसए कुलपति डॉ. डीआर सिंह ने बधाई दी है।
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मृदा प्रदूषण दूर करने की तकनीक खोजेंगे
सीएसए से 85 प्रतिशत अंकों केसाथ वर्ष 2020 में एमएससी (मृदा विज्ञान एवं कृषि रसायन) पास करने वाले कृतज्ञ के पिता वीरपाल गंगवार किसान और मां सुशीला देवी गृहिणी हैं। उन्होंने बताया कि सीएसए के शिक्षकों द्वारा दिए गए नोट्स से तैयारी करकेसफलता पाई है।
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भविष्य में मृदा वैज्ञानिक बनकर मिट्टी से प्रदूषण और हैवी मैटल्स की समस्या को खत्म करने के लिए तकनीक इजाद करनी है। मूल रूप से रामपुर जिले के रहने वाले कृतज्ञ आईएआरआई के मृदा विज्ञान एवं कृषि रसायन विभाग से पीएचडी करना चाहते हैं।
बेहतर बीज देकर किसानों की आय बढ़ाना उद्देश्य
किसानों के लिए ज्यादा उत्पादन देने वाले बीजों की प्रजातियां विकसित करके उनकी आय बढ़ाना लक्ष्य है। यह कहना है 20वीं रैंक पाने वाले दीपक राव का। मध्य प्रदेश के छतरपुर निवासी दीपक के पिता गिरिजा प्रसाद राव व्यवसायी और मां गुलाब देवी राव सरकारी स्कूल में प्रधान शिक्षिका हैं।
इन्होंने सीएसए से वर्ष 2020 में 75.80 प्रतिशत अंकों केसाथ एमएससी (बीज विज्ञान) की है। बताया कि इस सफलता में सीनियर साथियों का भी सहयोग है। दीपक राष्ट्रीय स्तर केबॉस्केटबाल खिलाड़ी भी हैं। वह आईएआरआई के बीज विज्ञान विभाग से पीएचडी करना चाहते हैं।
कम लागत में ज्यादा उत्पादन वाली तकनीक करेंगे इजाद
हमीरपुर निवासी श्याम चरण ने आईसीएआर के सस्य विज्ञान विभाग से पीएचडी करकेकिसानों के लिए कम लागत में ज्यादा उत्पादन देने वाली तकनीक इजाद करना चाहते हैं। पिता रामलाल अहिरवार किसान हैं। मां रामरती का बचपन में ही देहांत हो चुका है। इन्होंने सीएसए से वर्ष 2020 में 80 प्रतिशत अंकों के साथ एमएससी (सस्य विज्ञान) की है।
किसानों के लिए ज्यादा उत्पादन देने वाले बीजों की प्रजातियां विकसित करके उनकी आय बढ़ाना लक्ष्य है। यह कहना है 20वीं रैंक पाने वाले दीपक राव का। मध्य प्रदेश के छतरपुर निवासी दीपक के पिता गिरिजा प्रसाद राव व्यवसायी और मां गुलाब देवी राव सरकारी स्कूल में प्रधान शिक्षिका हैं।
इन्होंने सीएसए से वर्ष 2020 में 75.80 प्रतिशत अंकों केसाथ एमएससी (बीज विज्ञान) की है। बताया कि इस सफलता में सीनियर साथियों का भी सहयोग है। दीपक राष्ट्रीय स्तर केबॉस्केटबाल खिलाड़ी भी हैं। वह आईएआरआई के बीज विज्ञान विभाग से पीएचडी करना चाहते हैं।
कम लागत में ज्यादा उत्पादन वाली तकनीक करेंगे इजाद
हमीरपुर निवासी श्याम चरण ने आईसीएआर के सस्य विज्ञान विभाग से पीएचडी करकेकिसानों के लिए कम लागत में ज्यादा उत्पादन देने वाली तकनीक इजाद करना चाहते हैं। पिता रामलाल अहिरवार किसान हैं। मां रामरती का बचपन में ही देहांत हो चुका है। इन्होंने सीएसए से वर्ष 2020 में 80 प्रतिशत अंकों के साथ एमएससी (सस्य विज्ञान) की है।