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बेहोशी की नई तकनीक से इलाज अधिक सुरक्षित

Tue, 25 Dec 2018 01:12 PM IST
शिखा पांडेय यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Tue, 25 Dec 2018 01:12 PM IST
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This new technique of unconsciousness is more secure
डेमो पिक
एनेस्थीसिया के क्षेत्र में मरीज को बेहोश करने की नई तकनीकों के आने से गंभीर रोगियों का इलाज अधिक सुरक्षित हो गया है। इनमें एक ब्लॉक तकनीक है। इसमें अंग विशेष (सर्जरी जहां होनी है) को सुन्न किया जाता है।
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यह जानकारी कानपुर में जेम्स कॉन-2018 में अमेरिका के अनेस्थेटिस्ट डॉ. प्रवीण कालरा ने दी। उन्होंने बताया कि अब बेहोशी की दवा देने के पहले मरीज के ब्रेन की आक्सीजन का पता लगाया जा सकता है।
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इससे स्पष्ट हो जाता है कि मरीज को कितनी दवा देना है। इसके साथ ही रोगी को दी जाने वाली बेहोशी की दवा से निकलने वाली गैस के खतरों से बचा जा सकता है।

This new technique of unconsciousness is more secure
डेमो पिक
बेहोशी की दवा से निकलने वाली गैस डेसफ्लोरिन कार्बन से 10 गुना अधिक खतरनाक होती है। डॉ. प्रवीण मेडिकल कालेज के 1988 बैच के एमबीबीएस हैं। उन्होंने बताया कि ग्लोबल वार्मिंग से बचाव के लिए मेडिकल कचरे को न्यूनतम करने की जरूरत है।

इस वक्त ऐसी तकनीक पर शोध किया जा रहा है कि मेडिकल कचरा न्यूनतम निकले। इसके साथ ही कचरे के निस्तारण की सही ढंग से व्यवस्था की जानी चाहिए।
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