‘विश्व की सबसे कम उम्र की’ बाल व्यास नेहा कल्याणी ने बताये ‘संकट से बचने के उपाय’
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
‘विश्व की सबसे कम उम्र की बाल व्यास’ ने जीवन रहस्य को ऐसे सुलझाया कि हर कोई धर्म और आध्यात्म की गंगा में डूब गया। हम बात कर रहे हैं मात्र 13 वर्षीय बाल व्यास नेहा कल्याणी की। यूपी के कन्नौज (छिबरामऊ) में श्रीमद्भागवत कथा सुनाते हुए नेहा कल्याणी के प्रवचन सुनकर हर कोई मंत्रमुग्ध हो गया।
भाग्य और पुरुषार्थ विपरीत ध्रुव हैं। जो व्यक्ति भाग्य के भरोसे रहता है वह वास्तव में कामचोर और आलसी होता है। जीवन का प्रत्येक कार्य पुरुषार्थ से ही सिद्ध होता है। इसलिए व्यक्ति को भाग्य पर नहीं पुरुषार्थ पर विश्वास रखना चाहिए।
कल्याणी ने भक्तों को भाग्य और पुरुषार्थ के बारे में बताया
शनिवार को कन्नौज ताजपुर रोड पर चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दौरान 13 वर्षीय बाल व्यास नेहा कल्याणी ने भक्तों को भाग्य और पुरुषार्थ के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि श्रीराम चरिस मानस में लिखा है कि कादर मन कहुं एक अधारा, दैव-दैव आलसी पुकारा। अर्थात आलसी व्यक्ति भाग्य के भरोसे रहता है और जब उस पर संकट आता है तो वह भगवान को याद करता है।
उन्होंने कहा कि हम नित्य प्रति भगवान को याद करें तो कोई भी संकट नहीं आएगा। भगवान भी उसी की सहायता करते हैं तो परिश्रमी और पुरुषार्थ पर भरोसा रखने वाला होता है। यह जीव की प्रकृति है कि वह सुख में भगवान को विस्मृत कर देता है और जब संकट आता है तो वह ईश्वर को याद करता है। भगवान भी बड़े दयालु हैं, जैसे ही भक्त पर संकट देखते हैं, दौड़े चले आते हैं। इसलिए भगवान को कभी नहीं भूलना चाहिए। कथा के दौरान परीक्षित रामसनेही शर्मा, विमला देवी शर्मा, कल्लू शर्मा, शिवकांत, मुनेश, ललित कुमार, कमला देवी, मोहनी भारद्वाज, मधु शर्मा आदि रहे।