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ये भी होनहार, फीस भरे सरकार

Wed, 24 Jun 2015 01:47 AM IST
संतोष सिंह, कानपुर
संतोष सिंह, कानपुर Updated Wed, 24 Jun 2015 01:47 AM IST
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They are promising, full government fees
ये आर्थिक रूप से कमजोर उन मेधावी छात्रों की करुण कथा है, जिन्होंने अपनी मेहनत और लगन के बूते आईआईटी में दाखिले का टिकट तो हासिल कर लिया, लेकिन उनके पास इतना पैसा नहीं है कि काउंसलिंग कराके दाखिला लें और पूरी फीस भरें। कोई राजमिस्त्री का लाडला है तो कोई दिहाड़ी मजदूर का बेटा। पिता ने मजदूरी करके इनकी पढ़ाई तो पूरी करा दी पर अब आईआईटी की फीस देना मुश्किल है।
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दरअसल, मीडिया में खबर आने के बाद आर्थिक रूप से कमजोर प्रतापगढ़ के दो स्टूडेंट की मदद करने की होड़ मच गई। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी मदद को आए। स्मृति ने चार साल की फीस माफ कर दी। मुख्यमंत्री ने रहने, खाने का इंतजाम कर दिया। तमाम सुविधाएं उपलब्ध कराने का भरोसा भी दिया। क्या केंद्र और प्रदेश सरकार के नुमाइंदे अब इन मेधावियों का दर्द सुनेंगे।
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ज्वाइंट एंट्रेंस टेस्ट (जेईई) एडवांस 2015 में 472वीं रैंक पाने वाले नौबस्ता के उत्तम कुमार के पिता कृष्णा गौतम राजमिस्त्री हैं। महीने में चार हजार रुपये कमाते हैं, जिससे परिवार का खर्च नहीं चल पाता है। पूरे महीने काम भी नहीं मिलता है। जो कमाई हो पाती है, वह उत्तम, उनकी छोटी बहन रोशनी और भाई हिमांशु की पढ़ाई पर खर्च हो जाती है। कोई दूसरा कामकाज भी नहीं हो पाता। यही वजह है कि उत्तम की मां ज्योति ने घर पर ही छोटी दुकान खोल रखी है, जिसमें पांच सौ रुपये के सामान रखे हैं।
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राजमिस्त्री ने वर्ष 1998 में पांच हजार रुपये जमा करके केडीए से कालोनी ली थी लेकिन आर्थिक हालत खराब होने के कारण पिछले 15 साल से कालोनी की किस्त (प्रतिमाह 680 रुपये) नहीं भरी है। अब केडीए ने आवंटन निरस्त करने का नोटिस दिया है। किस्त भरने की समयसीमा अभी तीन साल और बची है। 20 साल की किस्त बनी थी। जेईई एडवांस में बढ़िया रैंक हासिल करने वाले उत्तम कुमार आईआईटी कानपुर से मैकेनिकल या फिर इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बीटेक करना चाहते हैं।

वह कहते हैं, आईआईटी में एडमिशन के लिए कर्ज ढूंढ रहा हूं। काउंसलिंग 25 जून से शुरू होगी और अभी तक फीस का इंतजाम नहीं हो सका है। पिता राजमिस्त्री हैं, इसलिए कोई कर्ज देने को तैयार नहीं है। आईआईटी में चार साल रहना है। इस दौरान करीब पांच लाख रुपये खर्च हो जाएंगे। ट्यूशन, मेस और हॉस्टल की फीस अलग-अलग देनी पड़ती है। चार साल की पढ़ाई कैसे पूरी होगी, यह सोचकर परेशान हूं।

टेबल-मेज की जगह खाट पर बैठकर पढ़ाई की है। आईआईटी से पढ़ने का सपना है, जो अब फीस की वजह से टूटता दिख रहा है। पैसे का इंतजाम नहीं हुआ तो आसान किस्त का घर भी चला जाएगा। उत्तम कुमार ने जवाहर नवोदय विद्यालय से हाईस्कूल (9.6 सीजीपीए), इंटरमीडिएट (83.4 फीसदी) की पढ़ाई की और एडवांस में सेलेक्शन पा गए।

कच्ची मड़ैया शारदा नगर निवासी अरुण की जेईई एडवांस रैंक 1800वीं है लेकिन आईआईटी में एडमिशन की फीस का इंतजाम नहीं हो सका है। अरुण के पिता राम कुमार दिहाड़ी (ईंट-गारे का काम) मजदूर हैं। रोजाना दो सौ रुपये कमाते हैं। इतने मेें परिवार का खर्च नहीं चल पाता। अरुण के बड़े भाई राहुल आईआईटी बीएचयू और बहन रुचि डीडब्लूटीसी से पढ़ाई कर रही हैं।

ये सब कर्ज और एजूकेशन लोन की मदद से पढ़ रहे हैं। इसका भुगतान कैसे होगा, यह पता नहीं है। अब फीस के अभाव में एडमिशन का संकट खड़ा हो गया है। अरुण कुमार आईआईटी कानपुर से ही केमिकल इंजीनियरिंग में बीटेक करना चाहते हैं। वह कहते हैं, 25 जून से आईआईटी, उनकी सीटों और ब्रांच के ऑनलाइन विकल्प लॉक किए जाएंगे। विकल्प लॉक करने की तैयारी है, लेकिन फीस का इंतजाम कैसे होगा, यह अभी पता नहीं है। पिता से कर्ज लाने को कहा है। बैंक प्रापर्टी देखकर ही लोन देते हैं, इसलिए हिम्मत नहीं जुटा पा रहा हूं।

आईआईटी की पढ़ाई महंगी है। हर साल एक लाख रुपये लग जाते हैं। बहरहाल, कर्ज मिलने का इंतजार है। इसके बाद ही आईआईटी में एडमिशन का विकल्प लॉक करूंगा। डीएम, डॉ. रोशन जैकब ने बताया कि आर्थिक रूप से कमजोर और आईआईटी में सेलेक्शन पाने वाले स्टूडेंट की मदद की जाएगी। पैसे की वजह से किसी स्टूडेंट की पढ़ाई बाधित नहीं होगी। जरूरत पड़ी तो मुख्यमंत्री राहत कोष से धनराशि मांगी जाएगी। जिन स्टूडेंट का आईआईटी में सेलेक्शन हुआ है, उनका ब्यौरा बुधवार को मंगाया जाएगा।


आईआईटी का फीस स्ट्रक्चर शासन को भेजा जा चुका है। पहले साल 60 हजार रुपये फीस जमा कराई जाती है, फिर हर सेमेस्टर में 60-60 हजार रुपये फीस जमा होती है। एससी स्टूडेंट की ट्यूशन फीस माफ रहती है, कुछ सामान्य फीस ही ली जाती है।


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