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अब यहां तैयार होंगे मल्टीटैलेंटेड डॉक्टर, एमबीबीएस के कोर्स में हो रहे ये बदलाव
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Sun, 13 May 2018 02:33 PM IST
सार
- पाठ्यक्रम में होगा बदलाव, कम्युनिकेशन स्किल और संविधान के बारे में बताया जाएगा
- अगले सत्र से लागू होगा नया पाठ्यक्रम
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विस्तार
यूपी के कानपुर शहर में मल्टीटैलेंटेड डॉक्टर तैयार किए जाने की तैयारियां जोरों पर हैं। एमबीबीएस के कोर्स में अगले सत्र से बदलाव हो जाएगा। छात्रों को पहले सेमेस्टर से ही मरीज देखने की प्रैक्टिस कराई जाएगी। उन्हें कम्युनिकेशन स्किल, संविधान का पाठ भी पढ़ाया जाएगा। सत्र 2019-20 से पाठ्यक्रम को नया रूप देने की तैयारी चल रही है।
नए पाठ्यक्रम के अनुरूप शिक्षकों को इसी साल प्रशिक्षण दे दिया जाएगा, जिससे अगले वर्ष तक शिक्षक नए पाठ्यक्रम को पढ़ाने के लिए तैयार हो जाएं। मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) के एक सदस्य ने बताया कि एमबीबीएस के पाठ्यक्रम को पिछले कई वर्षों से नहीं बदला गया है। जबकि चिकित्सा के क्षेत्र में इन वर्षों में कई बड़े बदलाव हो चुके हैं। नई तकनीक भी आ चुकी है। ऐसे में बेहतर चिकित्सक बनाने के लिए पाठ्यक्रम में बदलाव जरूरी है। अब ऐसे चिकित्सक तैयार किए जाएंगे, जो विशेषज्ञ तो होंगे ही, लेकिन साथ ही उन्हें हर विषय की गहन जानकारी होगी।
नए पाठ्यक्रम में छात्रों को नई बीमारियों और उनके इलाज के बारे में भी पढ़ाया जाएगा। इसके अलावा हाल के दिनों में हुए शोध व मेडिकल से जुड़ी नई तकनीक की जानकारी भी दी जाएगी। नए पाठ्यक्रम के अनुसार छात्रों का प्रायोगिक ज्ञान बढ़ाने पर फोकस रखा जाएगा। ऐसे चैप्टर शामिल किए जाएंगे, जिससे छात्रों को प्रायोगिक ज्ञान अधिक मिले। प्रत्येक सेमेस्टर के बाद टेस्ट भी होगा, जिसमें उनके द्वारा सीखे गए कौशल की जांच होगी।
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एमबीबीएस के पाठ्यक्रम को बदलने के लिए एमसीआई के प्रस्ताव को केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने भी मंजूरी दे दी है। मंत्रालय ने छात्रों के पहले साल से ही मेडिकल प्रैक्टिस कराने की पहल को काफी सकारात्मक बताया गया है।
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नए पाठ्यक्रम के अनुरूप शिक्षकों को इसी साल प्रशिक्षण दे दिया जाएगा, जिससे अगले वर्ष तक शिक्षक नए पाठ्यक्रम को पढ़ाने के लिए तैयार हो जाएं। मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) के एक सदस्य ने बताया कि एमबीबीएस के पाठ्यक्रम को पिछले कई वर्षों से नहीं बदला गया है। जबकि चिकित्सा के क्षेत्र में इन वर्षों में कई बड़े बदलाव हो चुके हैं। नई तकनीक भी आ चुकी है। ऐसे में बेहतर चिकित्सक बनाने के लिए पाठ्यक्रम में बदलाव जरूरी है। अब ऐसे चिकित्सक तैयार किए जाएंगे, जो विशेषज्ञ तो होंगे ही, लेकिन साथ ही उन्हें हर विषय की गहन जानकारी होगी।
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नए पाठ्यक्रम में छात्रों को नई बीमारियों और उनके इलाज के बारे में भी पढ़ाया जाएगा। इसके अलावा हाल के दिनों में हुए शोध व मेडिकल से जुड़ी नई तकनीक की जानकारी भी दी जाएगी। नए पाठ्यक्रम के अनुसार छात्रों का प्रायोगिक ज्ञान बढ़ाने पर फोकस रखा जाएगा। ऐसे चैप्टर शामिल किए जाएंगे, जिससे छात्रों को प्रायोगिक ज्ञान अधिक मिले। प्रत्येक सेमेस्टर के बाद टेस्ट भी होगा, जिसमें उनके द्वारा सीखे गए कौशल की जांच होगी।
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एमबीबीएस के पाठ्यक्रम को बदलने के लिए एमसीआई के प्रस्ताव को केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने भी मंजूरी दे दी है। मंत्रालय ने छात्रों के पहले साल से ही मेडिकल प्रैक्टिस कराने की पहल को काफी सकारात्मक बताया गया है।