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Kanpur News: कामकाजी महिलाओं के लिए मस्जिदों में नमाज पढ़ने की हो व्यवस्था
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कानपुर। मुस्लिम कामकाजी महिलाओं के सामने नमाज पढ़ने की मुश्किलें हैं। इसे देखते हुए हमने दो महीने पहले लखनऊ में सेमिनार कर इस पर चर्चा की और उसके बाद प्रदेश के उलेमाओं को पत्र लिखकर अवगत कराया। इसमें कहा कि कामकाजी महिलाओं के लिए मस्जिदों में नमाज पढ़ने का अलग समय या जगह मुकर्रर की जाए। यह बातें बुधवार को लखनऊ से शहर आए एमिनेंट स्कॉलर मौलाना याहया नोमानी ने बताईं।
हुमायूं बाग स्थित एक घर आए मौलाना ने कहा कि मस्जिदों का उपयोग हम नमाज पढ़ने के बाद लोगों की भलाई के लिए भी कर सकते हैं। ऐसे में हमें कामकाजी महिलाओं के बारे में भी ध्यान देना होगा। ऑल इंडिया मुस्लिम महिला पर्सनल लॉ बोर्ड की राष्ट्रीय अध्यक्ष व समाजसेविका शाइस्ता अंबर ने कहा कि महिलाएं अब घर से बाहर निकल रही हैं। उनके सामने नमाज पढ़ने की मुश्किलें हैं। हमारा मिशन 1997 से यही रहा है कि कामकाजी महिलाओं को मस्जिदों में जगह मिले। उनके लिए वजूखाना, नमाज पढ़ने की जगह अलग हो। एशिया में यह दिक्कतें महिलाओं के सामने हैं, बाकी देशों में बाहर नमाज पढ़ने के इंतजाम किए जाते हैं।
महिलाओं के लिए हो मस्जिद-ए-निस्वां
महिलाओं के लिए मस्जिद-ए-निस्वां होनी चाहिए, जिसमें वह नमाज पढ़ें ताकि उनकी नमाज न छूटे और वह दीन से भी जुड़ी रहें। पटकापुर में पहले अलग नमाज पढ़ने की जगह तय की गई थी। - डॉ. हिना जहीर, धार्मिक स्कॉलर
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मस्जिद में हो अलग जगह
आदमी-औरत सभी हज करने जाते हैं। इसी तरह महिलाओं के लिए मस्जिद में अलग जगहहोनी चाहिए। पांच वक्त नमाज पढ़ने वाली महिलाओं के सामने यह बहुत बड़ी दिक्कत हैं। - फर्जाना जब्बार, नगर अध्यक्ष ऑल इंडिया मुस्लिम महिला पर्सनल लॉ बोर्ड
अलग समय और जगह हो तय
बाहर मुल्कों में महिलाओं के लिए मस्जिदों में अलग नमाज की व्यवस्था है। अपने मुल्क में भी मस्जिदों में उनके लिए अलग जगह, समय, वजूखाना और रास्ता हो तो महिलाओं को सुविधा होगी। - हाफिज मामूर अहमद, शहरकाजी
महिलाओं के लिए अलग अच्छी बात
कामकाजी महिलाओं के लिए मस्जिद में अलग व्यवस्था और जगह तय की जा सकती है। यह अच्छी बात है। महिलाएं पर्दे के साथ अलग नमाज पढ़ें लें। बाजार में रास्ते में इसके लिए मस्जिद तय होनी चाहिए। - मुफ्ती इकबाल अहमद कासमी
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हुमायूं बाग स्थित एक घर आए मौलाना ने कहा कि मस्जिदों का उपयोग हम नमाज पढ़ने के बाद लोगों की भलाई के लिए भी कर सकते हैं। ऐसे में हमें कामकाजी महिलाओं के बारे में भी ध्यान देना होगा। ऑल इंडिया मुस्लिम महिला पर्सनल लॉ बोर्ड की राष्ट्रीय अध्यक्ष व समाजसेविका शाइस्ता अंबर ने कहा कि महिलाएं अब घर से बाहर निकल रही हैं। उनके सामने नमाज पढ़ने की मुश्किलें हैं। हमारा मिशन 1997 से यही रहा है कि कामकाजी महिलाओं को मस्जिदों में जगह मिले। उनके लिए वजूखाना, नमाज पढ़ने की जगह अलग हो। एशिया में यह दिक्कतें महिलाओं के सामने हैं, बाकी देशों में बाहर नमाज पढ़ने के इंतजाम किए जाते हैं।
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महिलाओं के लिए हो मस्जिद-ए-निस्वां
महिलाओं के लिए मस्जिद-ए-निस्वां होनी चाहिए, जिसमें वह नमाज पढ़ें ताकि उनकी नमाज न छूटे और वह दीन से भी जुड़ी रहें। पटकापुर में पहले अलग नमाज पढ़ने की जगह तय की गई थी। - डॉ. हिना जहीर, धार्मिक स्कॉलर
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मस्जिद में हो अलग जगह
आदमी-औरत सभी हज करने जाते हैं। इसी तरह महिलाओं के लिए मस्जिद में अलग जगहहोनी चाहिए। पांच वक्त नमाज पढ़ने वाली महिलाओं के सामने यह बहुत बड़ी दिक्कत हैं। - फर्जाना जब्बार, नगर अध्यक्ष ऑल इंडिया मुस्लिम महिला पर्सनल लॉ बोर्ड
अलग समय और जगह हो तय
बाहर मुल्कों में महिलाओं के लिए मस्जिदों में अलग नमाज की व्यवस्था है। अपने मुल्क में भी मस्जिदों में उनके लिए अलग जगह, समय, वजूखाना और रास्ता हो तो महिलाओं को सुविधा होगी। - हाफिज मामूर अहमद, शहरकाजी
महिलाओं के लिए अलग अच्छी बात
कामकाजी महिलाओं के लिए मस्जिद में अलग व्यवस्था और जगह तय की जा सकती है। यह अच्छी बात है। महिलाएं पर्दे के साथ अलग नमाज पढ़ें लें। बाजार में रास्ते में इसके लिए मस्जिद तय होनी चाहिए। - मुफ्ती इकबाल अहमद कासमी