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जिले में नहीं डेंगू जांच की व्यवस्था, अंदाजे से होता इलाज
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कानपुर देहात। जिले की करीब बीस लाख आबादी को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के दावे बेमानी साबित हो रहे हैं। हालत यह है कि जिला अस्पताल सहित किसी भी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में अब तक डेंगू की सटीक जांच की सुविधा तक नहीं है। अस्पताल आने वाले मरीजों का सिर्फ अंदाजे से इलाज किया जाता है। हालत गंभीर होने पर रेफर कर बला टाल दी जाती। यह स्थिति तब बनी है, जब स्वास्थ्य के नाम पर शासन से करोड़ों रुपये का बजट दिया जा रहा।
बारिश के बाद अब नगर से लेकर गांवों तक मच्छरजनित बीमारियों का प्रकोप शुरू हो गया है। बीते रविवार को किट से जांच में डेंगू की पुष्टि होने के बाद प्राइवेट अस्पतालकर्मी विश्वप्रताप सिंह की मौत भी हो चुकी है। अस्पतालों में हर रोज मरीजों की संख्या भी बढ़ रही है। सबसे खराब हालत बीहड़ पट्टी के गांवों में हैं। हर दिन जिला अस्पताल, सीएचसी व पीएचसी में सैकड़ों मरीज जांच कराकर दवा कराते हैं।
इनमें डेंगू के मरीजों का पता भी नहीं चल पाता। इसका कारण यह है कि जिले की 11 सीएचसी, 23 पीएचसी व न्यू पीएचसी, एक जिला अस्पताल होने के बाद भी कहीं डेंगू जांच (एलाइजा टेस्ट) की व्यवस्था नहीं है। जबकि जिला अस्पताल को संचालित हुए 16 साल बीते चुके हैं। (संवाद)
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जिले में फिलहाल डेंगू जांच की सुविधा किसी सरकारी अस्पताल में नहीं है। एलाइजा टेस्ट को लैब स्थापित करने के लिए शासन में लिखापढ़ी की जाएगी। फिलहाल मरीजों की प्रारंभिक स्क्रीनिंग के लिए रैपिड किट की मांग कॉर्पोरेशन से की जाएगी। जिसमें पुष्टि होने पर कानपुर में सैंपल भेजकर एलाइजा टेस्ट कराया जाएगा। - डॉ. एके सिंह (सीएमओ)
सरकारी अस्पतालों में ऐसे होता डेंगू मरीजों का इलाज
जिला चिकित्सालय पुरुष अकबरपुर के पैथालॉजिस्टि डॉ. वीपी सिंह ने बताया कि उनके यहां डेंगू की सटीक जानकारी की कोई सुविधा नहीं है। मरीज के आने पर जांच में यदि लगातार प्लेटलेट गिरने का स्तर जारी रहता है और डेंगू जैसे लक्षण दिखाई देते हैं, तो संदेह के आधार पर परामर्श व दवा दी जाती है। गंभीर स्थिति पर रेफर करने के अलावा कोई विकल्प नहीं होता। (संवाद)
प्राइवेट अस्पतालों में किट से होती जांच, स्वास्थ्य विभाग नहीं मानता
जिला अस्पताल सहित किसी भी सरकारी अस्पताल में डेंगू जांच की सुविधा न होने से मरीज प्राइवेट अस्पतालों का रुख करते हैं। वहां पर किट से जांच के नाम पर जमकर वसूली की जाती है। जिसको लेकर पूर्व में कई शिकायतें भी स्वास्थ्य अधिकारियों के पास पहुंची, लेकिन प्रभावी कार्रवाई न होने से हालत जस के तस बने हुए हैं। वहीं मरीज जब किट से जांच कराते हैं, तो स्वास्थ्य अधिकारी उसे मानने से इंकार कर देते हैं।
इस बाबत सीएमओ का कहना है कि किट से जांच प्रारंभिक स्क्रीनिंग के तौर पर लिया जाता है। कई बार टायफाइड, मलेरिया सहित अन्य बीमारियां होने पर भी किट में पॉजिटिव दिखाई देता है। जिसे पूरी तरह सही नहीं माना जा सकता। डेंगू की पुष्टि सिर्फ एलाइजा टेस्ट से ही होती है। (संवाद)
प्रभारी मंत्री व डीएम के सामने कई बार उठा मुद्दा
जिले में करीब हर साल डेंगू कहर बरपाता है। इसके बावजूद अफसर ध्यान नहीं देते। पूर्व के दौरान जिले के प्रभारी मंत्री महेश चंद्र गुप्ता, तत्कालीन डीएम व सीएमओ के सामने भी जिले में डेंगू जांच की सुविधा उपलब्ध कराने का मुद्दा उठाया गया। जल्द व्यवस्था के दावे भी किए गए, लेकिन नतीजा अब तक नहीं निकल सका। (संवाद)
समय पर हो जांच, तो बचे मरीजों की जान
मुंगीसापुर के घनश्याम तिवारी व यहीं के डेविड कटियार ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र होने के चलते हर साल डेंगू सहित अन्य मच्छरजनित बीमारियां कहर बरपाती हैं। जिले में बेहतर इलाज तो दूर अभी तक डेंगू की जांच की सुविधा तक नहीं है। जिसके कारण हर साल न जाने कितने लोगों की मौतें होती हैं, लेकिन अधिकारी फिर भी ध्यान नहीं देते।
नबीपुर के संदीप सिंह व यूपीसीडी जैनपुर के श्रीकांत ने बताया कि प्राइवेट अस्पतालों में जाने पर डेंगू जांच से लेकर उपचार के नाम पर मनमानी वसूली होती है। लोग भी जेब ढीली करने को मजबूर होते हैं। अगर जिले में डेंगू जांच की सुविधा हो, तो मरीज को समय पर इलाज मिल सकता है। (संवाद)
बुखार से महिला की मौत
संदलपुर। कठरा गांव में गुरुवार दोपहर बुखार से महिला की मौत हो गई। चाचा की सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। थाना मंगलपुर के कठरा गांव निवासी अरविंद कुमार ने बताया कि भतीजी नेहा (25) की शादी चार वर्ष पहले झींझक के तात्या टोपे नगर निवासी राहुल राठौर के साथ हुई थी। काफी समय से पति से उसका विवाद चल रहा था। विवाद के बाद वह दिव्यांग बेटी रिंकी के साथ मायके आ गई।
नेहा करीब दो माह से बुखार से पीड़ित थी। उसका उपचार निजी अस्पताल से चल रहा था। गुरुवार दोपहर अचानक नेहा की मौत हो गई। मौत की जानकारी के बाद पुलिस मौके पर पहुंची। एसएसआई राजेश सिंह ने बताया कि चाचा की सूचना पर शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। रिपोर्ट आने पर कार्रवाई की जाएगी। (संवाद)
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बारिश के बाद अब नगर से लेकर गांवों तक मच्छरजनित बीमारियों का प्रकोप शुरू हो गया है। बीते रविवार को किट से जांच में डेंगू की पुष्टि होने के बाद प्राइवेट अस्पतालकर्मी विश्वप्रताप सिंह की मौत भी हो चुकी है। अस्पतालों में हर रोज मरीजों की संख्या भी बढ़ रही है। सबसे खराब हालत बीहड़ पट्टी के गांवों में हैं। हर दिन जिला अस्पताल, सीएचसी व पीएचसी में सैकड़ों मरीज जांच कराकर दवा कराते हैं।
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इनमें डेंगू के मरीजों का पता भी नहीं चल पाता। इसका कारण यह है कि जिले की 11 सीएचसी, 23 पीएचसी व न्यू पीएचसी, एक जिला अस्पताल होने के बाद भी कहीं डेंगू जांच (एलाइजा टेस्ट) की व्यवस्था नहीं है। जबकि जिला अस्पताल को संचालित हुए 16 साल बीते चुके हैं। (संवाद)
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जिले में फिलहाल डेंगू जांच की सुविधा किसी सरकारी अस्पताल में नहीं है। एलाइजा टेस्ट को लैब स्थापित करने के लिए शासन में लिखापढ़ी की जाएगी। फिलहाल मरीजों की प्रारंभिक स्क्रीनिंग के लिए रैपिड किट की मांग कॉर्पोरेशन से की जाएगी। जिसमें पुष्टि होने पर कानपुर में सैंपल भेजकर एलाइजा टेस्ट कराया जाएगा। - डॉ. एके सिंह (सीएमओ)
सरकारी अस्पतालों में ऐसे होता डेंगू मरीजों का इलाज
जिला चिकित्सालय पुरुष अकबरपुर के पैथालॉजिस्टि डॉ. वीपी सिंह ने बताया कि उनके यहां डेंगू की सटीक जानकारी की कोई सुविधा नहीं है। मरीज के आने पर जांच में यदि लगातार प्लेटलेट गिरने का स्तर जारी रहता है और डेंगू जैसे लक्षण दिखाई देते हैं, तो संदेह के आधार पर परामर्श व दवा दी जाती है। गंभीर स्थिति पर रेफर करने के अलावा कोई विकल्प नहीं होता। (संवाद)
प्राइवेट अस्पतालों में किट से होती जांच, स्वास्थ्य विभाग नहीं मानता
जिला अस्पताल सहित किसी भी सरकारी अस्पताल में डेंगू जांच की सुविधा न होने से मरीज प्राइवेट अस्पतालों का रुख करते हैं। वहां पर किट से जांच के नाम पर जमकर वसूली की जाती है। जिसको लेकर पूर्व में कई शिकायतें भी स्वास्थ्य अधिकारियों के पास पहुंची, लेकिन प्रभावी कार्रवाई न होने से हालत जस के तस बने हुए हैं। वहीं मरीज जब किट से जांच कराते हैं, तो स्वास्थ्य अधिकारी उसे मानने से इंकार कर देते हैं।
इस बाबत सीएमओ का कहना है कि किट से जांच प्रारंभिक स्क्रीनिंग के तौर पर लिया जाता है। कई बार टायफाइड, मलेरिया सहित अन्य बीमारियां होने पर भी किट में पॉजिटिव दिखाई देता है। जिसे पूरी तरह सही नहीं माना जा सकता। डेंगू की पुष्टि सिर्फ एलाइजा टेस्ट से ही होती है। (संवाद)
प्रभारी मंत्री व डीएम के सामने कई बार उठा मुद्दा
जिले में करीब हर साल डेंगू कहर बरपाता है। इसके बावजूद अफसर ध्यान नहीं देते। पूर्व के दौरान जिले के प्रभारी मंत्री महेश चंद्र गुप्ता, तत्कालीन डीएम व सीएमओ के सामने भी जिले में डेंगू जांच की सुविधा उपलब्ध कराने का मुद्दा उठाया गया। जल्द व्यवस्था के दावे भी किए गए, लेकिन नतीजा अब तक नहीं निकल सका। (संवाद)
समय पर हो जांच, तो बचे मरीजों की जान
मुंगीसापुर के घनश्याम तिवारी व यहीं के डेविड कटियार ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र होने के चलते हर साल डेंगू सहित अन्य मच्छरजनित बीमारियां कहर बरपाती हैं। जिले में बेहतर इलाज तो दूर अभी तक डेंगू की जांच की सुविधा तक नहीं है। जिसके कारण हर साल न जाने कितने लोगों की मौतें होती हैं, लेकिन अधिकारी फिर भी ध्यान नहीं देते।
नबीपुर के संदीप सिंह व यूपीसीडी जैनपुर के श्रीकांत ने बताया कि प्राइवेट अस्पतालों में जाने पर डेंगू जांच से लेकर उपचार के नाम पर मनमानी वसूली होती है। लोग भी जेब ढीली करने को मजबूर होते हैं। अगर जिले में डेंगू जांच की सुविधा हो, तो मरीज को समय पर इलाज मिल सकता है। (संवाद)
बुखार से महिला की मौत
संदलपुर। कठरा गांव में गुरुवार दोपहर बुखार से महिला की मौत हो गई। चाचा की सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। थाना मंगलपुर के कठरा गांव निवासी अरविंद कुमार ने बताया कि भतीजी नेहा (25) की शादी चार वर्ष पहले झींझक के तात्या टोपे नगर निवासी राहुल राठौर के साथ हुई थी। काफी समय से पति से उसका विवाद चल रहा था। विवाद के बाद वह दिव्यांग बेटी रिंकी के साथ मायके आ गई।
नेहा करीब दो माह से बुखार से पीड़ित थी। उसका उपचार निजी अस्पताल से चल रहा था। गुरुवार दोपहर अचानक नेहा की मौत हो गई। मौत की जानकारी के बाद पुलिस मौके पर पहुंची। एसएसआई राजेश सिंह ने बताया कि चाचा की सूचना पर शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। रिपोर्ट आने पर कार्रवाई की जाएगी। (संवाद)