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Kanpur News: फिर बढ़ा चंबल का जलस्तर, तीन रास्तों पर भरा पानी
Fri, 05 Sep 2025 10:31 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
Updated Fri, 05 Sep 2025 10:31 PM IST
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चकरनगर। कोटा बैराज से गुरुवार रात 25 हजार क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद जिले में एक बार फिर से चंबल नदी उफान मारने लगी है। शुक्रवार को शाम चंबल नदी फिर से चेतावनी निशान को पार कर गई। शाम को चंबल 120.29 मीटर पर पहुंच गई। जलस्तर बढ़ने से निभी से बाबरपुर मार्ग बंद हो गया तो वहीं सिद्धनाथ मंदिर पुलिया व भरेह-चकरनुरा मार्ग पर भी पानी भर गया।
ऊपरी क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश और कोटा बैराज से पानी छोड़े जाने के बाद से जिले में तीसरी बार चंबल नदी उफान पर आ गई है। चंबल नदी शुक्रवार शाम तीन बजे चेतावनी निशान 119.80 मीटर को पार कर 120.29 पर पहुंच गई। जलस्तर अभी खतरे के निशान से मात्र 51 सेंटीमीटर नीचे है। वहीं, हथनी कुंड बांध से पानी छोड़े जाने के बाद से यमुना नदी पहले से ही उफान पर है और खतरे के निशान के पास 121.37 मीटर पर बह रही है।
चंबल नदी शुक्रवार सुबह तक 11 सेंटीमीटर प्रति घंटे के हिसाब से बढ़ रही थी। वहीं, शाम को यह रफ्तार घटकर छह सेमी प्रति घंटा हो गई। तीसरी बार चंबल का जलस्तर बढ़ने से फिर से 42 गांवों पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। बाढ़ से चकरनगर के भरेह, चकरपुरा, हरौली बहादुरपुर, नीमाडाड़ा, रानियां, ककरैया, खिरीटी, नीमरी कर्यावली, भजन पुरा सहित 42 गांव के लोगों की नींद उड़ गई है। शुक्रवार को ऐतिहासिक सिद्ध नाथ मंदिर, भारेश्वर महादेव मंदिर, चकरपुरा के रास्ते पर पानी भर गया है।
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इससे इन गांवों के लोगों का एक बार फिर से गांव से आना जाना बंद हो गया है। हरौली बहादुरपुर गांव के रास्ते पर बनी पुलिया तक पानी पहुंच जाने से यह रास्ता भी बंद हो गया है।बढ़ते जलस्तर को लेकर तहसील प्रशासन से लेकर जिला प्रशासन अलर्ट है। सहसों चंबल पुल से एसडीएम ब्रम्हानंद कठेरिया ने बढ़ते जलस्तर का निरीक्षण किया। इसके बाद बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया।
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महेवा क्षेत्र के गांवों में किसानों के खेतों तक पहुंची यमुना
बकेवर। यमुना नदी का जलस्तर धीरे धीरे अभी भी बढ़ रहा है। जलस्तर खतरे के निशान से मात्र 50 सेमी नीचे है। इससे महेवा ब्लॉक के बकेवर व लवेदी क्षेत्र के यमुना नदी के किनारे के लगभग 20 गांव के आसपास पानी पहुंच गया है। हालांकि पानी अभी किसी गांव के अंदर नहीं पहुंचा है। जलस्तर बढ़ने से सबसे ज्यादा चिंता अन्दावा मल्लाहन, मडैया यादवान, मडैया दिलीपनगर, कछपुरा, मडैया, लखनपुर घार के लोगाें को सता रही है। कई गांवों में किसानों के खेतों में यमुना का पानी भर गया है। इससे बाजरा, तिली व हरी सब्जियों की फसलें पानी में डूबने से खराब हो रही हैं। (संवाद)
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ऊपरी क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश और कोटा बैराज से पानी छोड़े जाने के बाद से जिले में तीसरी बार चंबल नदी उफान पर आ गई है। चंबल नदी शुक्रवार शाम तीन बजे चेतावनी निशान 119.80 मीटर को पार कर 120.29 पर पहुंच गई। जलस्तर अभी खतरे के निशान से मात्र 51 सेंटीमीटर नीचे है। वहीं, हथनी कुंड बांध से पानी छोड़े जाने के बाद से यमुना नदी पहले से ही उफान पर है और खतरे के निशान के पास 121.37 मीटर पर बह रही है।
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चंबल नदी शुक्रवार सुबह तक 11 सेंटीमीटर प्रति घंटे के हिसाब से बढ़ रही थी। वहीं, शाम को यह रफ्तार घटकर छह सेमी प्रति घंटा हो गई। तीसरी बार चंबल का जलस्तर बढ़ने से फिर से 42 गांवों पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। बाढ़ से चकरनगर के भरेह, चकरपुरा, हरौली बहादुरपुर, नीमाडाड़ा, रानियां, ककरैया, खिरीटी, नीमरी कर्यावली, भजन पुरा सहित 42 गांव के लोगों की नींद उड़ गई है। शुक्रवार को ऐतिहासिक सिद्ध नाथ मंदिर, भारेश्वर महादेव मंदिर, चकरपुरा के रास्ते पर पानी भर गया है।
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इससे इन गांवों के लोगों का एक बार फिर से गांव से आना जाना बंद हो गया है। हरौली बहादुरपुर गांव के रास्ते पर बनी पुलिया तक पानी पहुंच जाने से यह रास्ता भी बंद हो गया है।बढ़ते जलस्तर को लेकर तहसील प्रशासन से लेकर जिला प्रशासन अलर्ट है। सहसों चंबल पुल से एसडीएम ब्रम्हानंद कठेरिया ने बढ़ते जलस्तर का निरीक्षण किया। इसके बाद बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया।
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महेवा क्षेत्र के गांवों में किसानों के खेतों तक पहुंची यमुना
बकेवर। यमुना नदी का जलस्तर धीरे धीरे अभी भी बढ़ रहा है। जलस्तर खतरे के निशान से मात्र 50 सेमी नीचे है। इससे महेवा ब्लॉक के बकेवर व लवेदी क्षेत्र के यमुना नदी के किनारे के लगभग 20 गांव के आसपास पानी पहुंच गया है। हालांकि पानी अभी किसी गांव के अंदर नहीं पहुंचा है। जलस्तर बढ़ने से सबसे ज्यादा चिंता अन्दावा मल्लाहन, मडैया यादवान, मडैया दिलीपनगर, कछपुरा, मडैया, लखनपुर घार के लोगाें को सता रही है। कई गांवों में किसानों के खेतों में यमुना का पानी भर गया है। इससे बाजरा, तिली व हरी सब्जियों की फसलें पानी में डूबने से खराब हो रही हैं। (संवाद)